लोकार्पण के कुछ ही दिनों बाद धंसा 11.66 करोड़ का पुल एप्रोच, गुणवत्ता पर उठे सवाल
बारिश की पहली मार में उखड़ा डामर, दोनों ओर गहरी दरारें; सुधार कार्य शुरू, ग्रामीण बोले— जल्दबाजी में हुआ काम, अब भरपाई की कवायद

नारायणपुर। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार किए गए कुंदला नाला उच्च स्तरीय पुल का लोकार्पण हुए अभी कुछ ही दिन बीते हैं, लेकिन पहली ही बारिश ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुल के दोनों ओर बने एप्रोच मार्ग की मिट्टी धंसने से बड़ी-बड़ी दरारें उभर आई हैं। हालात ऐसे हैं कि निर्माण एजेंसी को आनन-फानन में सुधार कार्य शुरू करना पड़ा। एक ओर का पूरा डामरीकरण हटाकर दोबारा निर्माण की तैयारी की जा रही है।

पड़ताल में सामने आया कि पुल के एप्रोच पर कई स्थानों पर मिट्टी बैठने लगी है। इसके चलते डामर की परत में चौड़ी दरारें पड़ गईं। रविवार को निर्माण एजेंसी के कर्मचारी क्षतिग्रस्त हिस्से का डामर हटाते नजर आए।

पहले मिट्टी बैठेगी, फिर होगा दोबारा निर्माण
मौके पर मौजूद निर्माण एजेंसी के एक कर्मचारी ने बताया कि क्षतिग्रस्त हिस्से का डामर इसलिए हटाया जा रहा है ताकि बारिश के दौरान मिट्टी स्वाभाविक रूप से पूरी तरह बैठ जाए। इसके बाद दोनों ओर दोबारा उचित कंपेक्शन कर मजबूत एप्रोच तैयार किया जाएगा। फिलहाल सुधार कार्य जारी है।
ग्रामीणों का आरोप— जल्दबाजी भारी पड़ी
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्य पूरा होने के बाद पर्याप्त समय तक मिट्टी के बैठने का इंतजार नहीं किया गया। उनका आरोप है कि प्रशासनिक दबाव में जल्दबाजी के साथ लोकार्पण कर दिया गया, जबकि एप्रोच की मिट्टी पूरी तरह स्थिर नहीं हुई थी। ग्रामीणों का कहना है कि यदि एक बारिश गुजरने के बाद डामरीकरण किया जाता तो संभवतः ऐसी स्थिति नहीं बनती।
पहली बारिश में खुली निर्माण की परतें
क्षेत्रवासियों का कहना है कि पहली ही बारिश में एप्रोच की मिट्टी धंसने और डामर उखड़ने से निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। लोगों का मानना है कि करोड़ों रुपये की लागत से बने पुल में इस तरह की खामियां शुरुआत में ही सामने आना चिंता का विषय है।
सवालों के घेरे में गुणवत्ता और निगरानी
पुल से क्षेत्र में आवागमन आसान होने की उम्मीद है, लेकिन लोकार्पण के कुछ ही दिनों बाद मरम्मत की नौबत आने से निर्माण गुणवत्ता, तकनीकी परीक्षण और कार्य की निगरानी पर सवाल खड़े हो गए हैं। अब निगाहें इस बात पर हैं कि सुधार कार्य कितनी मजबूती और गुणवत्ता के साथ किया जाता है, ताकि भविष्य में यह समस्या दोबारा सामने न आए।





