अबूझमाड़ में विकास की रफ्तार: जहां कभी पगडंडी थी, वहां अब दौड़ रहे वाहन
पीएम-जनमन योजना से डोंडरीबेड़ा कैंप से कटेर तक बनी 8.75 किमी सड़क • 8.56 करोड़ की परियोजना से पहली बार सुरक्षित सड़क संपर्क • शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार और विकास की राह हुई आसान

(कैलाश सोनी) नारायणपुर। कभी घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ियों के बीच पगडंडियों तक सिमटा अबूझमाड़ अब विकास की नई इबारत लिख रहा है। वर्षों तक मुख्यधारा से कटे रहे जनजातीय गांवों तक अब पहली बार पक्की सड़क पहुंच गई है। प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम-जनमन) के तहत डोंडरीबेड़ा कैंप से कदेर तक 8.75 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण पूरा होने के बाद अबूझमाड़ के ग्रामीणों के जीवन में बड़ा बदलाव दिखाई देने लगा है। यह सड़क केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और विकास की नई राह बनकर उभरी है।

लगभग 8 करोड़ 56 लाख 19 हजार रुपये की लागत से निर्मित इस सड़क ने उन गांवों को पहली बार सुरक्षित और सुगम सड़क संपर्क उपलब्ध कराया है, जहां पहुंचने के लिए कभी केवल संकरी पगडंडियां ही सहारा थीं।
बारिश में कट जाता था संपर्क, घंटों पैदल तय करना पड़ता था सफर
सड़क निर्माण से पहले ग्रामीणों को हर मौसम में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। बरसात के दिनों में गांवों का संपर्क पूरी तरह टूट जाता था। विद्यार्थियों को स्कूल पहुंचने, मरीजों को अस्पताल ले जाने और ग्रामीणों को बाजार तक पहुंचने के लिए घंटों पैदल चलना पड़ता था। कई बार समय पर इलाज नहीं मिलने से गंभीर परिस्थितियां भी बन जाती थीं।
अब गांव तक पहुंच रही एम्बुलेंस और प्रशासन
नई सड़क बनने के बाद अब क्षेत्र में आवागमन पूरी तरह बदल गया है। एम्बुलेंस, शासकीय वाहन और अन्य आवश्यक सेवाएं सीधे गांवों तक पहुंचने लगी हैं। इससे स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत हुई हैं, विद्यालयों में विद्यार्थियों और शिक्षकों की नियमित उपस्थिति बढ़ी है तथा प्रशासनिक गतिविधियों को भी नई गति मिली है।
किसानों के लिए खुला बाजार, बढ़े आय के अवसर
सड़क का सबसे बड़ा लाभ किसानों और वनोपज संग्राहकों को मिला है। अब वे अपनी कृषि उपज और वनोपज को आसानी से बाजार तक पहुंचा पा रहे हैं। इससे बेहतर मूल्य मिलने के साथ आय बढ़ने की संभावनाएं भी मजबूत हुई हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना सहित अन्य निर्माण कार्यों के लिए आवश्यक सामग्री भी अब बिना कठिनाई गांवों तक पहुंच रही है। बिजली, पेयजल और अन्य आधारभूत सुविधाओं के विस्तार को भी इस सड़क से नई गति मिली है।
ग्रामीण बोले— अब विकास हमारे गांव तक पहुंच गया
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क बनने के बाद उनका जीवन पूरी तरह बदल गया है। जहां पहले गांव तक पहुंचने में घंटों पैदल चलना पड़ता था, वहीं अब वाहन सीधे गांव तक पहुंच रहे हैं। बच्चों की पढ़ाई, मरीजों का उपचार और दैनिक जरूरतों की पूर्ति पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान हो गई है।
अबूझमाड़ के विकास का नया अध्याय
पीएम-जनमन योजना के तहत बनी यह सड़क अबूझमाड़ के सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन का मजबूत आधार बन रही है। कभी नक्सलवाद और दुर्गमता के कारण विकास से दूर रहे इस क्षेत्र में अब सड़कें नई संभावनाओं के द्वार खोल रही हैं। यह परियोजना इस बात का प्रमाण है कि मजबूत सड़क संपर्क दूरस्थ जनजातीय क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का सबसे प्रभावी माध्यम बन सकता है।
तथ्य
- 8.75 किलोमीटर लंबी सड़क डोंडरीबेड़ा कैंप से कदेर तक तैयार।
- ₹8.56 करोड़ की लागत से हुआ निर्माण।
- पहली बार दुर्गम जनजातीय गांवों को मिला सुरक्षित सड़क संपर्क।
- एम्बुलेंस, स्कूल, बाजार और सरकारी सेवाओं की पहुंच हुई आसान।
- किसानों को कृषि और वनोपज बाजार तक पहुंचाने में मिली बड़ी राहत।




