अबूझमाड़ को मिला ‘जमीन का हक’ : दशकों बाद राजस्व सर्वेक्षण से बदली तकदीर
नक्सलवाद की गिरफ्त से मुक्त होने के बाद विकास की सबसे बड़ी पहल, 246 असर्वेक्षित गांवों में शुरू हुआ सर्वेक्षण अभियान • छह गांवों के अंतिम अभिलेख तैयार, आठ दुर्गम गांवों का सर्वे पूरा • अब किसानों को मिलेगा भूमि स्वामित्व, पीएम किसान, धान खरीदी, केसीसी और सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ

(कैलाश सोनी) नारायणपुर। कभी नक्सल हिंसा और प्रशासनिक पहुंच से दूर रहा अबूझमाड़ अब विकास की नई इबारत लिख रहा है। जिले के नक्सल मुक्त होने के बाद पहली बार वर्षों से असर्वेक्षित गांवों में राजस्व सर्वेक्षण का व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। यह केवल जमीन की पैमाइश नहीं, बल्कि हजारों ग्रामीण परिवारों को उनकी पुश्तैनी जमीन पर वैधानिक अधिकार दिलाने की ऐतिहासिक पहल है। दशकों तक बिना किसी राजस्व अभिलेख के खेती करने वाले ग्रामीण अब सरकारी रिकॉर्ड में अपनी जमीन के मालिक बन सकेंगे। इसके साथ ही किसानों के लिए शासकीय योजनाओं के द्वार भी खुल जाएंगे।

छत्तीसगढ़ शासन के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के निर्देश पर नारायणपुर जिले के 246 असर्वेक्षित गांवों में राजस्व सर्वेक्षण तेजी से किया जा रहा है। अभियान का उद्देश्य ग्रामीणों को भूमि का वैधानिक स्वामित्व देना, वर्षों पुराने भूमि विवादों का समाधान करना तथा उन्हें शासन की योजनाओं से जोड़ना है।
छह गांवों का रिकॉर्ड तैयार, डिजिटल हुआ भूमि का पूरा ब्यौरा
अभियान के तहत हुच्चाकोट, गोर्रा, कुमगांव, हितुलवाड़, काडूलबेड़ा और मुरहापदर गांवों का सर्वेक्षण पूरा कर अंतिम राजस्व अभिलेख तैयार किए जा चुके हैं। इन अभिलेखों को भुइयां पोर्टल पर अपलोड कर दिया गया है, जिससे भूमि संबंधी जानकारी अब डिजिटल, सुरक्षित और पूरी तरह पारदर्शी हो गई है। वहीं कोडोली, कुंदला और चिलपरस गांवों के अभिलेख भी अपलोडिंग के लिए शासन को भेजे जा चुके हैं।
नक्सल मुक्त होने के बाद दुर्गम गांवों तक पहुंचा राजस्व अमला
31 मार्च 2026 को जिले को नक्सल मुक्त घोषित किए जाने के बाद प्रशासन ने अबूझमाड़ के दुर्गम क्षेत्रों में सर्वेक्षण अभियान को नई गति दी। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और वर्षों से प्रशासनिक पहुंच से दूर रहे इलाकों में राजस्व अधिकारियों ने ग्रामीणों के सहयोग से मसपी, मलमेटा, बड़ेकाल (कोंगे), दोड़गे (बोदुम), गोडाबेड़ा (मरसूलनापा), गोमे, कोंगे और बोगान सहित आठ गांवों का सफलतापूर्वक सर्वेक्षण पूरा किया। सर्वेक्षण के आंकड़े नक्शा तैयार करने के लिए आईआईटी रुड़की भेजे गए हैं। नक्शा तैयार होने के बाद सत्यापन कर अंतिम अभिलेख शासन को भेजे जाएंगे।
अब मिलेगा खेती का कानूनी अधिकार, खुलेंगे योजनाओं के रास्ते
राजस्व सर्वेक्षण का सबसे बड़ा लाभ उन किसानों को मिलेगा जो वर्षों से अपनी जमीन पर खेती तो कर रहे थे, लेकिन उनके पास कोई वैधानिक दस्तावेज नहीं था। भूमि स्वामित्व प्रमाणित होने के बाद अब वे किसान पंजीयन, धान उपार्जन, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी), खाद-बीज वितरण सहित अनेक शासकीय योजनाओं का लाभ आसानी से ले सकेंगे। इससे भूमि विवादों में कमी आएगी और ग्रामीणों की सरकारी सेवाओं तक पहुंच भी मजबूत होगी।
सिर्फ सर्वे नहीं, विकास की नई बुनियाद
राजस्व सर्वेक्षण अभियान अबूझमाड़ के लिए केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक बदलाव की आधारशिला बन रहा है। वैधानिक भूमि अधिकार मिलने से ग्रामीणों में आत्मविश्वास बढ़ा है और वे विकास की मुख्यधारा से तेजी से जुड़ रहे हैं। आधुनिक तकनीक, प्रशासनिक इच्छाशक्ति और जनसहभागिता के समन्वय से वर्षों पुरानी समस्या का समाधान संभव होता दिखाई दे रहा है। आने वाले समय में इस पहल से हजारों ग्रामीण परिवारों को स्थायी लाभ मिलेगा और अबूझमाड़ में सुशासन तथा समावेशी विकास को नई गति मिलेगी।
तथ्य
- 246 असर्वेक्षित गांवों में चल रहा है राजस्व सर्वेक्षण।
- 6 गांवों के अंतिम अभिलेख तैयार होकर भुइयां पोर्टल पर अपलोड।
- 8 दुर्गम गांवों का सर्वेक्षण पूरा, नक्शा निर्माण के लिए आईआईटी रुड़की भेजा गया।
- भूमि स्वामित्व मिलने पर किसानों को पीएम किसान, धान खरीदी, केसीसी, खाद-बीज समेत अनेक योजनाओं का मिलेगा लाभ।




