
नारायणपुर। बरसात के मौसम में अबूझमाड़ के दुर्गम वनांचल में गर्भवती महिलाओं के लिए सबसे बड़ी चिंता सुरक्षित प्रसव की होती है। उफनते नदी-नाले, कच्चे रास्ते और स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंचने की कठिनाइयों के कारण हर वर्ष अनेक परिवार जोखिम का सामना करते हैं। ऐसे चुनौतीपूर्ण हालात के बीच विकासखंड ओरछा के आदेर मायका सेंटर ने सुरक्षित मातृत्व की नई पहचान कायम करते हुए दूरस्थ अंचल की महिलाओं के लिए उम्मीद और विश्वास का नया केंद्र बनकर उभरा है।

इस विश्वास की ताजा मिसाल ग्राम भटबेड़ा निवासी गर्भवती महिला सामबती हैं, जिनका 24 जुलाई को आदेर मायका सेंटर में सुरक्षित एवं सफल संस्थागत प्रसव कराया गया। प्रसव के बाद मां और नवजात दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं तथा उन्हें आवश्यक चिकित्सकीय देखभाल और निगरानी उपलब्ध कराई जा रही है।
यह केवल एक सफल संस्थागत प्रसव नहीं, बल्कि उन सैकड़ों गर्भवती महिलाओं के लिए भरोसे का संदेश है, जो अबूझमाड़ के दूरस्थ गांवों में रहती हैं और जहां प्रसव का समय कभी सबसे कठिन और जोखिम भरा माना जाता था। अब मायका सेंटर की सुविधा से गर्भवती महिलाओं को प्रसव से पहले ही सुरक्षित वातावरण में ठहरने का अवसर मिल रहा है, जिससे आपात स्थिति की आशंका काफी हद तक कम हो गई है।
मां और शिशु दोनों की सुरक्षा पर विशेष फोकस
आदेर मायका सेंटर में गर्भवती महिलाओं को नियमित स्वास्थ्य जांच, विशेषज्ञों की निगरानी, पौष्टिक भोजन, आवश्यक दवाइयां तथा प्रसव पूर्व और प्रसव पश्चात समुचित देखभाल की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। इससे महिलाएं निश्चिंत होकर मातृत्व के इस महत्वपूर्ण सफर को सुरक्षित ढंग से पूरा कर पा रही हैं।
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि समय पर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होने से मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के साथ-साथ संस्थागत प्रसव को भी लगातार बढ़ावा मिल रहा है।
दुर्गमता अब नहीं बनेगी बाधा
अबूझमाड़ के अनेक गांव ऐसे हैं, जहां बरसात के दौरान सड़क संपर्क लगभग टूट जाता है। ऐसे में प्रसव पीड़ा शुरू होने पर समय पर अस्पताल पहुंचना बेहद कठिन हो जाता है। मायका सेंटर की अवधारणा इसी चुनौती का समाधान बनकर सामने आई है। यहां प्रसव संभावित महिलाओं को निर्धारित समय से पहले ही लाकर सुरक्षित रखा जाता है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर तत्काल चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराई जा सके।
सुरक्षित मातृत्व की नई उम्मीद
सामबती और उनके स्वस्थ नवजात का सुरक्षित प्रसव इस बात का प्रमाण है कि यदि समय पर स्वास्थ्य सेवाएं और चिकित्सकीय निगरानी उपलब्ध कराई जाए तो दुर्गम वनांचलों में भी सुरक्षित मातृत्व का सपना साकार किया जा सकता है। यह सफलता अन्य गर्भवती महिलाओं को भी संस्थागत प्रसव के लिए प्रेरित कर रही है।
प्रशासन का लक्ष्य—कोई मां न रहे वंचित
जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग का उद्देश्य है कि अबूझमाड़ का कोई भी परिवार केवल दूरी, दुर्गमता अथवा संसाधनों की कमी के कारण सुरक्षित मातृत्व के अधिकार से वंचित न रहे। इसके लिए मायका सेंटरों को और अधिक प्रभावी बनाते हुए गर्भवती महिलाओं को समय पर स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने के प्रयास लगातार किए जा रहे हैं।
हर सुरक्षित प्रसव के साथ आदेर मायका सेंटर केवल एक स्वास्थ्य सुविधा केंद्र नहीं, बल्कि दूरस्थ अंचलों की माताओं के लिए विश्वास, सुरक्षा और नई जिंदगी की शुरुआत का प्रतीक बनता जा रहा है। बरसाती मौसम की चुनौतियों के बीच यह पहल अबूझमाड़ की माताओं और नवजात शिशुओं के जीवन को सुरक्षित भविष्य देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।




