अबूझमाड़ की खामोशी टूटी: कलमानार में पहली बार गूंजा मोबाइल नेटवर्क, डिजिटल दुनिया से जुड़ा दुर्गम गांव
गांव से बाहर पहाड़ी पर चढ़कर बात करने की मजबूरी हुई खत्म | जिओ टावर शुरू होने से कलमानार और पोकानार के 464 ग्रामीणों को मिलेगा सीधा लाभ | शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग, ई-गवर्नेंस और आपातकालीन सेवाओं तक होगी आसान पहुंच

नारायणपुर। अबूझमाड़ के दुर्गम वनांचल में बसे ग्राम कलमानार के लिए सोमवार का दिन ऐतिहासिक साबित हुआ। वर्षों तक मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट जैसी बुनियादी संचार सुविधा से वंचित रहे इस गांव में पहली बार जिओ मोबाइल टावर स्थापित होने के साथ ही डिजिटल युग का नया अध्याय शुरू हो गया है। अब ग्रामीणों को मोबाइल पर बात करने या इंटरनेट चलाने के लिए गांव छोड़कर पहाड़ियों और ऊंचे स्थानों तक नहीं जाना पड़ेगा। गांव में ही निर्बाध मोबाइल एवं इंटरनेट सेवाओं का लाभ मिलने लगा है।

नारायणपुर जिले के विकासखंड ओरछा अंतर्गत स्थित ग्राम कलमानार तथा समीपस्थ ग्राम पोकानार लंबे समय से संचार सुविधा के अभाव से जूझ रहे थे। मोबाइल नेटवर्क नहीं होने के कारण ग्रामीणों को अपने परिजनों से संपर्क करने, शासकीय जानकारी प्राप्त करने अथवा ऑनलाइन सेवाओं का लाभ लेने के लिए काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। कई बार मोबाइल पर बातचीत करने के लिए गांव से कई किलोमीटर दूर ऊंची पहाड़ियों तक जाना पड़ता था।
अब जिओ मोबाइल टावर स्थापित होने के बाद यह समस्या पूरी तरह समाप्त हो गई है। ग्रामीण अपने गांव में ही बेहतर मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सुविधा का उपयोग कर सकेंगे। इससे न केवल संचार व्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग और शासन की डिजिटल सेवाओं तक भी उनकी पहुंच आसान हो जाएगी।
464 ग्रामीणों को मिलेगा सीधा लाभ
जिला प्रशासन के अनुसार इस मोबाइल टावर से ग्राम कलमानार के 144 तथा ग्राम पोकानार के 320 नागरिकों सहित कुल 464 ग्रामीणों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। यह सुविधा आसपास के अन्य क्षेत्रों के लिए भी भविष्य में उपयोगी साबित होगी।
कलेक्टर बोलीं— अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगी शासन की योजनाएं
कलेक्टर नम्रता जैन ने कहा कि अबूझमाड़ जैसे दुर्गम क्षेत्रों में संचार सुविधाओं का विस्तार शासन की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि कलमानार में मोबाइल टावर की स्थापना केवल नेटवर्क उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शासन की योजनाओं और सेवाओं को अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन का लक्ष्य अबूझमाड़ के अन्य दूरस्थ और नेटवर्क विहीन क्षेत्रों में भी चरणबद्ध तरीके से मोबाइल नेटवर्क का विस्तार करना है, ताकि वहां रहने वाले ग्रामीण भी आधुनिक संचार सुविधाओं से जुड़ सकें।
आपातकाल में अब तुरंत मिलेगी मदद
मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध होने के बाद ग्रामीण अब आवश्यकता पड़ने पर 108 एंबुलेंस सेवा, स्वास्थ्य केंद्रों तथा प्रशासनिक अधिकारियों से तत्काल संपर्क स्थापित कर सकेंगे। अब किसी गंभीर बीमारी, दुर्घटना अथवा अन्य आपात स्थिति में सहायता के लिए घंटों इंतजार नहीं करना पड़ेगा। समय पर सूचना मिलने से उपचार और राहत कार्य अधिक प्रभावी ढंग से संचालित हो सकेंगे।
डिजिटल सेवाओं का खुलेगा नया रास्ता
संचार सुविधा शुरू होने से अब ग्रामीणों तक शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी समय पर पहुंचेगी। इसके साथ ही डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन आवेदन, बैंकिंग सेवाएं, आधार आधारित सेवाएं, ई-गवर्नेंस सुविधाएं तथा अन्य ऑनलाइन सेवाओं का लाभ भी गांव में ही उपलब्ध होगा। इससे ग्रामीणों का समय और आर्थिक संसाधनों की बचत होगी तथा सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता भी बढ़ेगी।
शिक्षा और युवाओं को मिलेगा बड़ा लाभ
मोबाइल नेटवर्क शुरू होने से क्षेत्र के छात्र-छात्राओं को ऑनलाइन अध्ययन सामग्री, डिजिटल शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं की जानकारी और विभिन्न शैक्षणिक प्लेटफॉर्म तक पहुंच आसान होगी। वहीं युवा रोजगार संबंधी सूचनाएं, ऑनलाइन आवेदन और कौशल विकास कार्यक्रमों से भी जुड़ सकेंगे।
ग्रामीणों में खुशी, प्रशासन का जताया आभार
ग्राम कलमानार और पोकानार के ग्रामीणों ने मोबाइल टावर की स्थापना पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए शासन और जिला प्रशासन के प्रति आभार जताया। ग्रामीणों का कहना है कि अब संचार सुविधा मिलने से शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग और प्रशासनिक सेवाओं तक पहुंच पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान हो जाएगी। उनका मानना है कि यह पहल अबूझमाड़ के सामाजिक और आर्थिक विकास को नई गति देने वाली महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित होगी।
बदलेगी अबूझमाड़ की तस्वीर
दशकों तक संचार व्यवस्था से कटे रहे अबूझमाड़ के इस गांव में मोबाइल नेटवर्क की शुरुआत केवल तकनीकी सुविधा नहीं, बल्कि विकास की नई दस्तक है। यह पहल डिजिटल इंडिया के सपने को धरातल पर उतारने के साथ-साथ अबूझमाड़ के दूरस्थ अंचलों को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है। अब गांव की आवाज सिर्फ जंगलों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरी दुनिया तक पहुंचेगी।




