पशु सखियां बनेंगी गांवों में बदलाव की दूत, केवीके में सीखी खेती और पशुपालन की नई तकनीकें
कोंडागांव की महिला पशु सखियों ने नारायणपुर कृषि विज्ञान केन्द्र में लिया आधुनिक कृषि का प्रशिक्षण

जैविक खेती से लेकर मछली-बतख पालन तक के मॉडल देखे, गांव-गांव पहुंचाएंगी वैज्ञानिक खेती का संदेश
नारायणपुर। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देने और महिलाओं को कृषि नवाचारों से जोड़ने की दिशा में कृषि विज्ञान केन्द्र (केवीके) नारायणपुर की पहल रंग ला रही है। बुधवार को कोंडागांव जिले की पशु सखियों ने कृषि विज्ञान केन्द्र का शैक्षणिक भ्रमण कर आधुनिक कृषि एवं पशुपालन की तकनीकों की व्यवहारिक जानकारी हासिल की। दिनभर चले प्रशिक्षण और प्रदर्शन कार्यक्रम में महिलाओं ने खेती, पशुपालन और आयवर्धन के नए मॉडल करीब से देखे और समझे।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ग्रामीण महिलाएं वैज्ञानिक पद्धति से कृषि और पशुपालन गतिविधियों को अपनाती हैं तो गांवों की आर्थिक तस्वीर बदल सकती है। यही कारण है कि पशु सखियों को नई तकनीकों से जोड़कर उन्हें गांव स्तर पर परिवर्तन का माध्यम बनाया जा रहा है।

खेती के साथ पशुपालन से बढ़ेगी आय
भ्रमण के दौरान कृषि वैज्ञानिकों ने उन्नत फसल उत्पादन तकनीक, जैविक एवं प्राकृतिक खेती, एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन, कीट एवं रोग नियंत्रण तथा कृषि यंत्रीकरण की आधुनिक पद्धतियों की जानकारी दी। पशु सखियों ने फल, सब्जी और बहुउद्देशीय कृषि मॉडल का भी अवलोकन किया।
विशेषज्ञों ने बताया कि केवल पारंपरिक खेती पर निर्भर रहने के बजाय किसान यदि पशुपालन, मुर्गी पालन, बटेर पालन, मछली एवं बतख पालन जैसी गतिविधियों को खेती के साथ जोड़ें तो उनकी आय में कई गुना वृद्धि संभव है।
वर्मी कम्पोस्ट और मूल्य संवर्धन पर भी मिला प्रशिक्षण
कार्यक्रम में चारा उत्पादन, वर्मी कम्पोस्ट निर्माण और कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन की तकनीकों का भी प्रदर्शन किया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि जैविक संसाधनों का उपयोग कर लागत कम की जा सकती है और उत्पादन की गुणवत्ता बढ़ाई जा सकती है।
महिलाओं को यह भी समझाया गया कि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों से छोटे-छोटे उद्यम स्थापित कर स्वरोजगार के अवसर पैदा किए जा सकते हैं।
गांवों तक पहुंचेगा ज्ञान
पशु सखियों ने प्रशिक्षण के बाद कहा कि कृषि विज्ञान केन्द्र से मिली जानकारी को वे अपने-अपने गांवों में किसानों और महिला स्व-सहायता समूहों तक पहुंचाएंगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में आधुनिक कृषि तकनीकों का विस्तार होगा और महिलाओं की आर्थिक भागीदारी भी बढ़ेगी।
नई तकनीकों से जुड़े किसान
कार्यक्रम के समापन अवसर पर कृषि विज्ञान केन्द्र नारायणपुर के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. दिब्येंदु दास ने कहा कि शैक्षणिक भ्रमण किसानों और ग्रामीण महिलाओं को वैज्ञानिक खेती से जोड़ने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए वैज्ञानिक पद्धति अपनाने पर जोर दिया।
इस अवसर पर डॉ. हरेंद्र टोंडे, डॉ. ललित वर्मा, डॉ. आलिया अफरोज एवं इंद्र कुमार सहित कृषि विज्ञान केन्द्र के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
क्या सीखा पशु सखियों ने?
- उन्नत फसल उत्पादन तकनीक
- जैविक एवं प्राकृतिक खेती के तरीके
- कीट एवं रोग प्रबंधन
- कृषि यंत्रीकरण की आधुनिक विधियां
- चारा उत्पादन एवं वर्मी कम्पोस्ट निर्माण
- मुर्गी, बटेर, मछली एवं बतख पालन मॉडल
- कृषि उत्पादों का मूल्य संवर्धन
बड़ी बात
सरकार की ग्रामीण आजीविका सशक्तिकरण पहल के तहत प्रशिक्षित हो रही पशु सखियां अब गांवों में कृषि और पशुपालन की नई क्रांति की वाहक बनेंगी। इन महिलाओं के माध्यम से वैज्ञानिक खेती का ज्ञान अंतिम छोर तक पहुंचेगा और किसानों की आय बढ़ाने की राह आसान होगी।




