आपातकाल लोकतंत्र का सबसे काला अध्याय, संविधान की हत्या को देश नहीं भूलेगा: भोजराज नाग
'संविधान हत्या दिवस' पर भाजपा का कांग्रेस पर हमला, 21 महीनों की तानाशाही को बताया लोकतंत्र पर सबसे बड़ा प्रहार

लोकतंत्र बचाने वालों के संघर्ष को किया नमन, कहा- कांग्रेस की निरंकुश मानसिकता आज भी जीवित
नारायणपुर। आपातकाल के 51 वर्ष पूरे होने पर भारतीय जनता पार्टी ने बुधवार को जिला भाजपा कार्यालय में ‘संविधान हत्या दिवस’ के रूप में कार्यक्रम आयोजित कर कांग्रेस पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए कांकेर लोकसभा सांसद भोजराज नाग ने 25 जून 1975 को भारतीय लोकतंत्र का सबसे काला अध्याय बताते हुए कहा कि देश संविधान और लोकतंत्र पर हुए उस प्रहार को कभी नहीं भूल सकता।

सांसद नाग ने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने “आंतरिक अशांति” का हवाला देकर देश में आपातकाल लागू किया और लोकतांत्रिक संस्थाओं, नागरिक अधिकारों तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कुचल दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने सत्ता बचाने के लिए संविधान की मूल भावना को कमजोर करने का प्रयास किया।
‘लोकतंत्र की आवाज दबाने का हुआ प्रयास’
भोजराज नाग ने कहा कि आपातकाल के दौरान लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए आवाज उठाने वालों को जेलों में डाल दिया गया। मीडिया पर सेंसरशिप लगाई गई और नागरिक अधिकारों को निलंबित कर दिया गया। उन्होंने कहा कि जो लोग आज लोकतंत्र के संरक्षक होने का दावा करते हैं, वही उस दौर में लोकतांत्रिक अधिकारों को दबाने में सबसे आगे थे।
उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी और उसके वैचारिक परिवार ने आपातकाल का डटकर विरोध किया तथा लोकतंत्र की पुनर्स्थापना के लिए संघर्ष किया। यही कारण है कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए लड़ने वाले सत्याग्रहियों और आंदोलनकारियों का योगदान देश सदैव याद रखेगा।
‘एक परिवार के सत्ता सुख के लिए देश को भुगतना पड़ा संकट’
सांसद नाग ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार ने एक परिवार के सत्ता सुख को बनाए रखने के लिए 21 महीनों तक देश को तानाशाही के दौर में धकेल दिया। इस दौरान नागरिक स्वतंत्रताओं पर अंकुश लगाया गया, संविधान में संशोधन किए गए और न्यायपालिका तक को प्रभावित करने का प्रयास हुआ।
उन्होंने कहा कि यदि आज देश में लोकतंत्र मजबूत स्थिति में है तो उसका श्रेय उन लोगों को जाता है जिन्होंने जेल की यातनाएं झेलकर भी लोकतंत्र की बहाली के लिए संघर्ष जारी रखा।
लोकतंत्र सेनानियों को किया नमन
प्रेसवार्ता के दौरान सांसद नाग ने आपातकाल के खिलाफ संसद से लेकर सड़क तक संघर्ष करने वाले सत्याग्रहियों, समाजसेवियों, श्रमिकों, किसानों, युवाओं और महिलाओं को नमन किया। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को लोकतंत्र की रक्षा के लिए किए गए इन संघर्षों से प्रेरणा लेनी चाहिए।
भाजपा नेताओं की रही मौजूदगी
कार्यक्रम में लघु वनोपज संघ के अध्यक्ष रूपसाय सलाम, जिला पंचायत अध्यक्ष नारायण मरकाम, वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन देवांगन, गौतम गोलछा, भाजपा महामंत्री संदीप झा, पंकज जैन एवं मीडिया प्रभारी सुदीप झा सहित भाजपा पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
25 जून 1975: क्यों याद किया जाता है आपातकाल?
- देश में 25 जून 1975 को आपातकाल लागू हुआ था।
- लगभग 21 महीने तक आपातकाल प्रभावी रहा।
- प्रेस पर सेंसरशिप लागू की गई थी।
- कई विपक्षी नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं को जेल भेजा गया।
- नागरिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाए गए।
- 1977 में आम चुनाव के बाद आपातकाल समाप्त हुआ।
मुख्य बात
आपातकाल की 51वीं वर्षगांठ पर भाजपा ने इसे लोकतंत्र और संविधान पर सबसे बड़ा हमला बताते हुए कांग्रेस को कठघरे में खड़ा किया, जबकि कांग्रेस इस विषय पर अलग दृष्टिकोण रखती रही है। राजनीतिक रूप से यह मुद्दा आज भी देश की लोकतांत्रिक यात्रा का महत्वपूर्ण अध्याय बना हुआ है।




