‘बस्तर मुन्ने’ अभियान बना ग्रामीणों की उम्मीद
अबूझमाड़ के गांवों तक पहुंचा प्रशासन, शिविरों में 119 आवेदनों का मौके पर निराकरण

नारायणपुर। दूरस्थ वनांचल और अबूझमाड़ क्षेत्र के ग्रामीणों को शासन की योजनाओं से जोड़ने के लिए जिला प्रशासन अब गांव-गांव पहुंच रहा है। छत्तीसगढ़ शासन के निर्देश एवं कलेक्टर नम्रता जैन के मार्गदर्शन में जिले में चलाए जा रहे ‘बस्तर मुन्ने’ (अग्रणी बस्तर) अभियान के तहत नारायणपुर और ओरछा विकासखंड की ग्राम पंचायतों में विशेष संतृप्तता शिविरों का लगातार आयोजन किया जा रहा है। इन शिविरों के माध्यम से ग्रामीणों की समस्याओं का मौके पर समाधान कर उन्हें विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का त्वरित लाभ उपलब्ध कराया जा रहा है।

अभियान के तहत आयोजित शिविरों में राशन कार्ड, आधार कार्ड, आयुष्मान कार्ड, पेंशन, श्रम पंजीयन, बैंक खाता, जाति एवं निवास प्रमाण पत्र, महतारी वंदन योजना, स्वास्थ्य जांच और पोषण सेवाओं सहित विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ ग्रामीणों को दिया जा रहा है। विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी शिविर स्थल पर उपस्थित रहकर आवेदन प्राप्त कर तत्काल निराकरण सुनिश्चित कर रहे हैं।

इसी क्रम में आमासरा, नेलवाड़ एवं पोचावाड़ा में आयोजित विशेष संतृप्तता शिविरों में ग्रामीणों की भारी भागीदारी देखने को मिली। आमासरा शिविर में 48 आवेदन, नेलवाड़ में 39 आवेदन और पोचावाड़ा में 32 आवेदन प्राप्त हुए। प्रशासन द्वारा सभी 119 आवेदनों का मौके पर ही निराकरण कर हितग्राहियों को राहत प्रदान की गई।
अभियान के अंतर्गत अब तक खड़कागांव, आदनार, खोड़ गांव, मंडाली, कुतुल, आमासरा, नेलवाड़, पोचावाड़ा, बम्हनी सहित कई ग्राम पंचायतों में शिविर आयोजित किए जा चुके हैं। शिविरों में बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचकर योजनाओं का लाभ ले रहे हैं। प्रशासन द्वारा ऐसे परिवारों को भी चिन्हित किया जा रहा है, जो अब तक किसी कारणवश शासन की योजनाओं से वंचित थे। पात्र हितग्राहियों को आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराकर उन्हें योजनाओं से जोड़ने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
दूरस्थ और पहुंचविहीन क्षेत्रों में “सैचुरेशन अप्रोच” के तहत चलाया जा रहा यह अभियान अब ग्रामीणों के लिए राहत और भरोसे का माध्यम बनता जा रहा है। जिला प्रशासन का कहना है कि आगामी दिनों में जिले की अन्य ग्राम पंचायतों में भी विशेष संतृप्तता शिविर आयोजित किए जाएंगे, ताकि शासन की योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया जा सके।




