नारायणपुर

अबूझमाड़ के धानोरा में ITBP का मेडिकल कैम्प, दूर-दराज के ग्रामीणों को मिली राहत

45वीं बटालियन के जवानों ने संभाली स्वास्थ्य सेवा की कमान, महिलाओं-बच्चों की जांच और दवाइयों का निःशुल्क वितरण

(कैलाश सोनी) नारायणपुर/धानोरा, अबूझमाड़ के सुदूर और लंबे समय तक उपेक्षित रहे धानोरा क्षेत्र में शनिवार को उस समय एक अलग ही तस्वीर देखने को मिली, जब 45वीं बटालियन ITBP द्वारा लगाए गए निःशुल्क मेडिकल कैम्प में ग्रामीणों की लंबी कतारें लग गईं। जंगलों के बीच तंबू में सजे इस शिविर में जवान खुद डॉक्टर की भूमिका निभाते नजर आए और ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण कर उन्हें दवाइयां वितरित की गईं।

कैम्प स्थल पर पहुंचने पर देखा गया कि सुबह से ही आसपास के गांवों से महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे इलाज के लिए पहुंचने लगे थे। कई ग्रामीणों ने बताया कि इस इलाके में नियमित स्वास्थ्य सुविधाएं अब भी दूर की बात हैं, ऐसे में इस तरह के शिविर उनके लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं।

शिविर में मौजूद ITBP के चिकित्सा दल ने रक्तचाप, बुखार, त्वचा रोग सहित सामान्य बीमारियों की जांच की। एक महिला मरीज की जांच करते हुए जवान ने बताया कि ग्रामीणों में मौसमी बीमारियों और पोषण की कमी से जुड़ी समस्याएं ज्यादा सामने आ रही हैं। मौके पर ही दवाइयों का वितरण भी किया गया।

तस्वीरों में साफ नजर आता है कि जवान पूरी संवेदनशीलता के साथ मरीजों की जांच कर रहे हैं—कहीं स्टेथोस्कोप से जांच, तो कहीं रजिस्टर में मरीजों का विवरण दर्ज किया जा रहा है। एक कोने में स्कूली बच्ची भी अपनी बारी का इंतजार करते दिखी, जो इस पहल की व्यापकता को दर्शाता है।

महिलाओं और बच्चों पर विशेष फोकस
शिविर में महिलाओं की भागीदारी सबसे अधिक रही। स्वास्थ्य टीम ने उन्हें साफ-सफाई, पोषण और नियमित जांच के प्रति जागरूक भी किया। बच्चों के लिए अलग से जांच की व्यवस्था रखी गई, जिससे अभिभावकों में भरोसा देखने को मिला।

विश्वास जीतने की पहल
ITBP द्वारा चलाए जा रहे इस ‘सिविक एक्शन प्रोग्राम’ का उद्देश्य केवल स्वास्थ्य सेवा देना ही नहीं, बल्कि स्थानीय ग्रामीणों के बीच विश्वास कायम करना भी है। लंबे समय तक नक्सल प्रभाव झेल चुके इस इलाके में अब इस तरह की पहल से बदलाव की बयार महसूस हो रही है।

ग्रामीणों ने जताया आभार
इलाके की एक महिला ने बताया, “पहली बार गांव के पास इतना अच्छा इलाज मिल रहा है, नहीं तो हमें कई किलोमीटर दूर जाना पड़ता था।” वहीं अन्य ग्रामीणों ने भी ITBP की इस पहल को सराहते हुए इसे नियमित रूप से आयोजित करने की मांग की।

बदलती तस्वीर का संकेत
अबूझमाड़ जैसे कठिन भौगोलिक क्षेत्र में इस तरह के मेडिकल कैम्प न सिर्फ स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी को पूरा कर रहे हैं, बल्कि यह भी संकेत दे रहे हैं कि अब विकास की पहुंच धीरे-धीरे इन इलाकों तक हो रही है।

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