नारायणपुर में ‘नितारा’ थिएटर वर्कशॉप का आगाज़, 30 दिन तक संवरेंगी आदिवासी प्रतिभाएं
मंत्री केदार कश्यप ने किया शुभारंभ, कलेक्टर नम्रता जैन की पहल—नक्सल पुनर्वासित युवाओं को भी मिलेगा मंच | स्थानीय भाषा-संस्कृति पर आधारित प्रस्तुतियों से बढ़ेगी जागरूकता

(कैलाश सोनी) नारायणपुर, 19 अप्रैल। बस्तर-अबूझमाड़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को नया आयाम देने की दिशा में नारायणपुर में “नितारा” (नारायणपुर इंस्टीट्यूट ऑफ ट्राइबल एंड रूरल आर्ट) के तहत 30 दिवसीय थिएटर प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। जिला प्रशासन और राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, नई दिल्ली के संयुक्त सहयोग से शुरू इस पहल का उद्घाटन वन मंत्री केदार कश्यप ने किया।

उद्घाटन अवसर पर मंत्री कश्यप ने कहा कि बस्तर और अबूझमाड़ की पारंपरिक कला एवं संस्कृति देश की धरोहर है, जिसे संरक्षित और आगे बढ़ाना जरूरी है। उन्होंने इस कार्यशाला को युवाओं की प्रतिभा निखारने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा कि विशेष रूप से नक्सल पुनर्वासित युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने में यह पहल कारगर साबित होगी।

कलेक्टर नम्रता जैन ने बताया कि यह कार्यशाला 19 अप्रैल से 18 मई तक विरासत भवन में संचालित होगी। इसका उद्देश्य दूरस्थ, आदिवासी और पुनर्वासित युवाओं को पेशेवर रंगमंच प्रशिक्षण उपलब्ध कराना है, ताकि वे अपनी रचनात्मक क्षमता को विकसित कर सकें और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें।
उन्होंने कहा कि कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को अभिनय, संवाद अदायगी, मंच सज्जा, प्रकाश व्यवस्था और प्रस्तुति जैसे विभिन्न पहलुओं का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के विशेषज्ञ प्रशिक्षक युवाओं को पेशेवर स्तर की तकनीकों से परिचित कराएंगे।
कार्यशाला की खास बात यह है कि प्रशिक्षण के बाद प्रतिभागी स्थानीय भाषा और संस्कृति पर आधारित नाट्य प्रस्तुतियां तैयार करेंगे। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से शासन की योजनाओं और सेवाओं की जानकारी ग्रामीण अंचलों तक पहुंचाई जाएगी, जिससे जनजागरूकता बढ़ेगी और जनभागीदारी मजबूत होगी।
जिला प्रशासन का मानना है कि यह पहल केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं को सामाजिक बदलाव का माध्यम बनाने की दिशा में एक ठोस प्रयास है। इससे जहां एक ओर कला के क्षेत्र में नए अवसर खुलेंगे, वहीं दूसरी ओर युवाओं के लिए आजीविका के नए रास्ते भी तैयार होंगे।
इस आयोजन में जिले के जनप्रतिनिधि एवं जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।
प्रशासन ने जिले के अधिक से अधिक युवाओं से इस अभिनव पहल में भाग लेने की अपील की है, ताकि स्थानीय प्रतिभाओं को मंच मिल सके और बस्तर की सांस्कृतिक पहचान को नई पहचान मिल सके।




