चार दशक बाद अबूझमाड़ में विकास की दस्तक: हितुल में घर-घर पहुंचा राशन
नक्सल प्रभाव खत्म होने के बाद बदली तस्वीर | 30 किमी पैदल की मजबूरी समाप्त, ट्रैक्टर से गांव तक पहुंची खाद्यान्न आपूर्ति

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और सुरक्षा बलों की सुदृढ़ उपस्थिति के बाद क्षेत्र में नक्सल प्रभाव के कमजोर पड़ने से प्रशासन की सक्रियता बढ़ी है। इसी का परिणाम है कि अब वर्षों से उपेक्षित रहे गांवों में मूलभूत सुविधाएं पहुंचने लगी हैं।

30 किमी की कठिन राह से मिली राहत
हितुल के ग्रामीणों के लिए राशन प्राप्त करना अब तक एक कठिन परीक्षा से कम नहीं था। उन्हें सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत खाद्यान्न लेने के लिए करीब 30 किलोमीटर दूर ओरछा तक पैदल जाना पड़ता था। घने जंगलों और दुर्गम रास्तों से होकर गुजरने वाला यह सफर बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांगों के लिए बेहद मुश्किल भरा होता था।
अब जिला प्रशासन की पहल से यह तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। कलेक्टर नम्रता जैन के मार्गदर्शन में विशेष अभियान चलाकर गांव में ही “चावल उत्सव” आयोजित किया गया, जिसमें पहली बार हितुल में ही राशन वितरण किया गया।
ट्रैक्टर से पहुंचा राशन, गांव में ही वितरण
दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद प्रशासन ने ट्रैक्टरों के जरिए खाद्यान्न को गांव तक पहुंचाया। जिला खाद्य अधिकारी अलाउद्दीन खान के अनुसार, इस नई व्यवस्था से हितुल के 271 राशन कार्डधारियों को सीधा लाभ मिल रहा है। अब ग्रामीणों को न तो लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है और न ही अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है।
ग्रामीणों के चेहरे पर लौटी मुस्कान
नई व्यवस्था लागू होने के बाद गांव में खुशी का माहौल है। ग्रामीणों ने प्रशासन के प्रति आभार जताते हुए कहा कि अब उनका समय, मेहनत और पैसे—तीनों की बचत हो रही है। पहले जहां राशन लाने में पूरा दिन और कई बार दो दिन लग जाते थे, वहीं अब यह सुविधा गांव में ही उपलब्ध हो रही है।
नक्सल छाया से निकलकर विकास की ओर बढ़ता अबूझमाड़
विशेषज्ञों के अनुसार, अबूझमाड़ जैसे क्षेत्रों में विकास कार्यों का विस्तार तभी संभव हो पाया है जब सुरक्षा बलों ने मजबूत पकड़ बनाई और सरकार ने स्पष्ट इच्छाशक्ति दिखाई। चार दशक तक नक्सल प्रभाव के कारण यहां प्रशासनिक पहुंच सीमित रही, लेकिन अब हालात तेजी से बदल रहे हैं।
प्रशासन का लक्ष्य—कोई भी वंचित न रहे
जिला प्रशासन का उद्देश्य है कि शासन की योजनाओं का लाभ हर जरूरतमंद तक पहुंचे। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत पात्र परिवारों को रियायती दर पर खाद्यान्न उपलब्ध कराकर उनकी खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है।
हितुल में शुरू हुई यह पहल न केवल एक गांव के लिए राहत है, बल्कि पूरे अबूझमाड़ के लिए बदलाव का संकेत भी है। आने वाले समय में यदि इसी तरह योजनाओं का विस्तार होता रहा, तो यह इलाका भी विकास की मुख्यधारा में तेजी से शामिल होता नजर आएगा।




