अष्टमी पर बंगीय समाज के महाभंडारे में उमड़े हजारों श्रद्धालु, नारायणपुर में दिखा आस्था का सैलाब
दोपहर 12 बजे शुरू हुआ महाभंडारा देर रात तक चला, माता रानी की प्रसादी ग्रहण करने पहुंचे विभिन्न समाजों के श्रद्धालु; धार्मिक आयोजन ने दिया सामाजिक एकता और भाईचारे का संदेश

नारायणपुर। शारदीय नवरात्रि की अष्टमी पर नारायणपुर में आस्था और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। बंगीय समाज की ओर से आयोजित महाभंडारे में हजारों श्रद्धालु माता रानी की प्रसादी ग्रहण करने पहुंचे। दोपहर 12 बजे शुरू हुआ भंडारा देर तक चलता रहा। नगर सहित आसपास के क्षेत्रों से पहुंचे श्रद्धालुओं की सहभागिता ने आयोजन को भव्य स्वरूप दिया। खास बात यह रही कि महाभंडारे में सभी समाजों के लोगों ने शामिल होकर सामाजिक एकता, आपसी सद्भाव और भाईचारे का संदेश दिया।

अष्टमी पर सुबह से नहीं, दोपहर से शुरू हुआ श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला
नवरात्रि के दौरान नारायणपुर के मंदिरों और पूजा पंडालों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। माता रानी के जयकारों से नगर का वातावरण भक्तिमय बना हुआ है। इसी धार्मिक उल्लास के बीच बंगीय समाज का महाभंडारा अष्टमी के प्रमुख आयोजनों में शामिल रहा।

महाभंडारा दोपहर 12 बजे प्रारंभ हुआ। इसके बाद प्रसादी ग्रहण करने के लिए श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हुआ, जो देर रात तक जारी रहा। करीब हजारों श्रद्धालुओं ने माता रानी की प्रसादी ग्रहण की। नगर के साथ आसपास के क्षेत्रों से भी लोग आयोजन में शामिल होने पहुंचे। महाभंडारे में विभिन्न समाजों की सहभागिता ने आयोजन को धार्मिक कार्यक्रम के साथ सामाजिक मेल-मिलाप का अवसर भी बना दिया।
षष्ठी से शुरू होती है माता रानी की विधि-विधान से पूजा
बंगीय समाज के पूर्व अध्यक्ष विपुल सरकार ने बताया कि समाज की ओर से नवरात्रि के अवसर पर षष्ठी यानी छठवें दिन से माता रानी की पूजा-अर्चना विधि-विधान के साथ शुरू की जाती है। धार्मिक परंपराओं के अनुरूप आराधना के बाद अष्टमी पर विशेष महाभंडारे का आयोजन किया जाता है।
उन्होंने बताया कि महाभंडारे में सभी समाजों के श्रद्धालुओं को शामिल होकर प्रसादी ग्रहण करने का अवसर मिलता है। इसका उद्देश्य धार्मिक आस्था को मजबूत करने के साथ लोगों में सेवा, सहयोग और आपसी सद्भाव की भावना को बढ़ावा देना है। माता रानी के दरबार में सभी लोग एक साथ जुटते हैं और प्रसादी ग्रहण करते हैं। इससे सामाजिक संबंधों को मजबूती मिलती है तथा आपसी प्रेम और भाईचारे का संदेश प्रसारित होता है।
प्रसादी के साथ सामाजिक समरसता का संदेश
नारायणपुर में बंगीय समाज की ओर से आयोजित महाभंडारा धार्मिक परंपरा और सामाजिक एकजुटता का प्रतीक बनकर सामने आया। हजारों श्रद्धालुओं की सहभागिता और विभिन्न समाजों के लोगों की उपस्थिति ने आयोजन की व्यापकता को दर्शाया। नवरात्रि के पावन अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में सेवा और समर्पण की भावना प्रमुख रूप से दिखाई दी।
धार्मिक आयोजनों का महत्व केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं रहता, बल्कि ऐसे अवसर समाज के लोगों को एक मंच पर लाकर आपसी संबंधों को मजबूत करते हैं। बंगीय समाज का यह महाभंडारा भी इसी भावना को आगे बढ़ाता नजर आया।
नवरात्रि में भक्तिमय हुआ पूरा नगर
शारदीय नवरात्रि के चलते नारायणपुर में इन दिनों उत्सव और भक्ति का माहौल है। मंदिरों और पूजा पंडालों में श्रद्धालु माता रानी की आराधना कर परिवार, समाज और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना कर रहे हैं। जगह-जगह धार्मिक गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं।
इसी क्रम में अष्टमी पर बंगीय समाज के महाभंडारे में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ ने नवरात्रि के उत्साह को और बढ़ा दिया। हजारों लोगों ने माता रानी की प्रसादी ग्रहण कर आशीर्वाद लिया। आयोजन ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि धार्मिक परंपराएं आस्था के साथ-साथ समाज में एकता, सहयोग और सद्भाव को मजबूत करने का माध्यम भी हैं।




