चांद की गोद में चमका शुक्र, आसमान में दिखा अद्भुत खगोलीय नजारा
14 सितंबर की शाम चंद्रमा ने शुक्र को ढका; भारत के कुछ हिस्सों में हुआ ‘लूनर ऑकल्टेशन’, सूर्यास्त के बाद कई इलाकों में दिखी दोनों की नजदीकी

करीब 12 फीसदी रोशन था चंद्रमा; 18 सितंबर को साल की सर्वाधिक चमक पर पहुंचेगा शुक्र
14 सितंबर सोमवार की शाम आसमान में खगोलीय प्रेमियों के लिए बेहद खास नजारा रहा। पतले अर्धचंद्र के बेहद करीब चमकता शुक्र ग्रह लोगों के आकर्षण का केंद्र बना। 14 सितंबर को चंद्रमा और शुक्र की बेहद करीबी युति के साथ कुछ क्षेत्रों में चंद्रमा के पीछे शुक्र के छिपने की घटना भी हुई, जिसे लूनर ऑकल्टेशन ऑफ वीनस (चंद्र-शुक्र आच्छादन) कहा जाता है।

खगोलीय गणनाओं के अनुसार घटना का वैश्विक समय करीब 09:26 से 13:42 UTC रहा। भारत समेत दक्षिण एशिया में यह घटना शाम के आसपास की परिस्थितियों में रही। अलग-अलग स्थानों पर इसका समय और दृश्यता अलग रही।
करीब 12 फीसदी रोशन था चांद
14 सितंबर को चंद्रमा नवचंद्र के कुछ दिन बाद की अवस्था में था और उसका लगभग 12 प्रतिशत भाग प्रकाशित था। इसी पतले चंद्रमा के पास बेहद चमकीला शुक्र दिखाई दे रहा था। दोनों की कोणीय दूरी अपने सबसे करीब लगभग 28.8 आर्कमिनिट तक पहुंची।
यानी सामान्य नजर से देखने पर यह दृश्य ऐसा प्रतीत हो सकता था मानो चांद के पास कोई असाधारण रूप से चमकीला तारा चमक रहा हो, लेकिन वह वास्तव में शुक्र ग्रह था।
हर जगह नहीं दिखा शुक्र का छिपना
इस घटना की खास बात यह रही कि चंद्रमा का शुक्र को ढकना पूरी दुनिया में दिखाई नहीं दिया। यह केवल पृथ्वी के कुछ हिस्सों में दिखाई देने वाली घटना थी। यूरोप, अफ्रीका, मध्य-पूर्व और एशिया के कुछ क्षेत्रों में अलग-अलग चरणों में इसका अवलोकन संभव था। भारत में यह घटना कई स्थानों पर सूर्यास्त के आसपास रही, इसलिए वास्तविक दृश्यता स्थानीय क्षितिज और रोशनी की परिस्थितियों पर निर्भर रही।
उदाहरण के लिए कोलकाता में शुक्र के चंद्रमा के पीछे जाने का समय लगभग शाम 5:49 बजे और दोबारा दिखाई देने का समय 6:24 बजे बताया गया है।
रायपुर समेत छत्तीसगढ़ में क्या रहा नजारा?
रायपुर में 14 सितंबर को सूर्यास्त लगभग शाम 6:07 बजे रहा। ऐसे में चंद्रमा और शुक्र की नजदीकी का दृश्य सूर्यास्त के आसपास पश्चिमी आसमान में देखने की स्थिति बनी। शुक्र सूर्यास्त के बाद पश्चिमी आकाश में बेहद चमकीले बिंदु के रूप में दिखाई देता रहा।
हालांकि इसे सीधे तौर पर यह कहना सही नहीं होगा कि छत्तीसगढ़ के हर स्थान से शुक्र का चंद्रमा के पीछे जाना साफ दिखाई दिया। स्थानीय मौसम, क्षितिज की ऊंचाई और सूर्यास्त के समय के कारण दृश्यता में अंतर हो सकता है।
आखिर इतना चमकीला क्यों है शुक्र?
आसमान में चमकते इस ‘तारे’ को अक्सर लोग तारा समझ लेते हैं, जबकि यह शुक्र ग्रह है। सूर्य और चंद्रमा के बाद शुक्र आकाश की सबसे चमकीली प्राकृतिक वस्तुओं में शामिल है। सूर्य के बाद पृथ्वी के आकाश में दिखाई देने वाली इसकी चमक का कारण इसकी सूर्य के प्रकाश को परावर्तित करने की क्षमता और पृथ्वी से इसकी अपेक्षाकृत कम दूरी है।
18 सितंबर को और बढ़ेगी चमक
खगोलीय प्रेमियों के लिए सितंबर अभी और खास होने वाला है। 18 सितंबर 2026 के आसपास शुक्र अपनी ‘ग्रेटेस्ट ब्रिलिएंसी’ यानी वर्ष की सर्वाधिक चमक पर पहुंचेगा। उस समय इसकी चमक लगभग -4.8 मैग्नीट्यूड तक पहुंच सकती है। सूर्यास्त के बाद पश्चिमी आकाश में इसे बिना दूरबीन के भी देखा जा सकेगा, हालांकि यह क्षितिज के काफी करीब रहेगा।
खगोलीय घटना, कोई अशुभ संकेत नहीं
चंद्रमा और शुक्र का एक-दूसरे के सामने आना पूरी तरह खगोलीय यांत्रिकी की सामान्य प्रक्रिया है। चंद्रमा पृथ्वी की परिक्रमा करता है और शुक्र सूर्य की परिक्रमा करते हुए पृथ्वी के दृष्टिकोण से समय-समय पर चंद्रमा के बेहद करीब दिखाई देता है। जब चंद्रमा का कोणीय आकार शुक्र की दिशा को ढक देता है तो इसे ऑकल्टेशन कहा जाता है।
इस तरह के खगोलीय घटनाक्रम वैज्ञानिकों को ग्रहों और चंद्रमा की गतियों को समझने के साथ आम लोगों को भी ब्रह्मांड की विशालता और उसकी नियमित गति से परिचित कराने का अवसर देते हैं।
खगोल प्रेमियों के लिए सलाह: सूर्यास्त के बाद पश्चिमी आकाश में क्षितिज की ओर नजर रखें। शुक्र बेहद चमकीला दिखाई देगा, लेकिन दूरबीन या कैमरा इस्तेमाल करते समय सूर्य की दिशा में सीधे देखने से बचें; सूर्य की रोशनी आंखों को स्थायी नुकसान पहुंचा सकती है।

