नई शिक्षा नीति पर शोध पत्र वाचन से शिक्षक चन्दोराम मंडावी ने बढ़ाया नारायणपुर का अकादमिक गौरव
दूरस्थ अबूझमाड़ क्षेत्र में अध्यापन के साथ शोध में सक्रिय, NEP-2020 के नवाचार और स्थानीय ज्ञान को शिक्षा से जोड़ने पर जोर

नारायणपुर। अबूझमाड़ के दूरस्थ अंचल में अध्यापन कर रहे शिक्षक एवं शोधार्थी चन्दोराम मंडावी ने शिक्षा के क्षेत्र में अपनी अकादमिक सक्रियता से नारायणपुर का गौरव बढ़ाया है। विकासखंड ओरछा की प्राथमिक शाला डोरीमरका में सहायक शिक्षक के पद पर कार्यरत मंडावी ने “नई शिक्षा नीति 2020: भारतीय शिक्षा में परिवर्तन, नवाचार, अनुसंधान की संभावनाएँ” विषय पर शोध पत्र का वाचन किया है।

उनका शोध पत्र Akshardhara Research Journal के अगस्त 2026 के विशेषांक-04, खंड-IV में प्रकाशित हुआ है। जर्नल को Single Blind Peer-Reviewed & Refereed International Research Journal के रूप में प्रकाशित किया गया है। विशेषांक में नई शिक्षा नीति-2020 के माध्यम से भारतीय शिक्षा व्यवस्था में परिवर्तन, नवाचार और अनुसंधान की संभावनाओं को केंद्र में रखा गया है।
स्थानीय ज्ञान और आधुनिक शिक्षा का समन्वय
शोध पत्र में शिक्षा में नवाचार, अनुसंधान, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, स्थानीय ज्ञान और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को रेखांकित किया गया है। मंडावी के अकादमिक कार्य में विशेष रूप से आदिवासी एवं ग्रामीण समाज के सामाजिक-सांस्कृतिक परिवेश को शिक्षा और शोध से जोड़ने का प्रयास दिखाई देता है।
अबूझमाड़िया जनजाति के सामाजिक एवं सांस्कृतिक जीवन, परंपराओं, रीति-रिवाजों और बदलते सामाजिक परिवेश को समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण से समझने की दिशा में भी उनका शोध कार्य केंद्रित है।
कक्षा से शोध तक का सफर
मंडावी की उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि वे स्वयं अबूझमाड़ जैसे दुर्गम क्षेत्र की प्राथमिक शाला में बच्चों को पढ़ा रहे हैं और इसी जमीनी अनुभव के साथ उच्च शिक्षा के स्तर पर शोध कार्य में सक्रिय हैं। उनके कार्य में अध्यापन के व्यावहारिक अनुभव और समाजशास्त्रीय अकादमिक दृष्टिकोण का समन्वय नजर आता है।
मंडावी के अनुसार, आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा को स्थानीय संस्कृति, भाषा, परंपरा और पारंपरिक ज्ञान से जोड़कर ही नई शिक्षा नीति के उद्देश्यों को प्रभावी ढंग से धरातल पर उतारा जा सकता है।
शोध एवं अकादमिक गतिविधियों में सक्रिय
अध्यापन के दायित्व के साथ शोध पत्र लेखन, शोध पत्र वाचन और पीएचडी शोध कार्य में सक्रिय भागीदारी शिक्षक समुदाय के लिए प्रेरणादायी पहल मानी जा रही है। उनके शोध कार्य में शोध-निर्देशक डॉ. किरण नूरेटी एवं डॉ. गंगा राम कश्यप के मार्गदर्शन का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
दूरस्थ नारायणपुर जिले से शिक्षा, अनुसंधान और जनजातीय समाज के अध्ययन को व्यापक अकादमिक मंच तक पहुंचाने की दिशा में मंडावी की यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उनकी उपलब्धि अन्य शिक्षकों और शोधार्थियों को भी अध्यापन के साथ शोध, नवाचार और अकादमिक गतिविधियों से जुड़ने के लिए प्रेरित कर सकती है।




