खस की राखी, पानी की बूंद पड़ते ही महकेगी
बहनों के प्यार से महकेगी भाइयों की कलाई; धमतरी की 10 महिलाओं ने तैयार कीं 1000 सुगंधित राखियां

रायपुर, 20 अगस्त। इस रक्षाबंधन भाइयों की कलाई पर बंधने वाली राखियां सिर्फ भाई-बहन के प्रेम और स्नेह का प्रतीक नहीं होंगी, बल्कि पानी की एक बूंद पड़ते ही प्राकृतिक खुशबू भी बिखेरेंगी। छत्तीसगढ़ में खस की जड़ों से अनोखी, पर्यावरण अनुकूल और जैव अपघटनीय राखियां तैयार की जा रही हैं। खास बात यह है कि नमी या पानी के संपर्क में आते ही इन राखियों से सोंधी और मनमोहक खुशबू निकलने लगती है।

वन संपदा और पारंपरिक औषधीय पौधों से जुड़े स्थानीय हुनर को बढ़ावा देने की दिशा में यह नवाचार सामने आया है। पूरी तरह प्राकृतिक और हाथ से तैयार इन राखियों को पर्यावरण के अनुकूल बताया गया है। इनका निर्माण स्थानीय स्तर पर महिलाओं को रोजगार और आजीविका से जोड़ने की पहल के रूप में भी किया जा रहा है।
10 महिलाओं ने तैयार कीं 1000 राखियां
वन मंत्री केदार कश्यप की मंशानुरूप वन संपदा और पारंपरिक औषधीय पौधों के उपयोग से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर विकसित किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड द्वारा खस से विशेष राखियों को नया स्वरूप दिया गया है।
बोर्ड अध्यक्ष विकास मरकाम और उपाध्यक्ष अंजय शुक्ला के मार्गदर्शन में अन्नपूर्णा महिला स्व सहायता समूह, नारी जिला धमतरी की 10 महिलाओं ने 1000 राखियां तैयार की हैं। ये राखियां पारंपरिक भावना और आधुनिक सोच के संगम का उदाहरण हैं।
पानी पड़ते ही खुशबू का एहसास
खस से बनी राखियों की सबसे बड़ी खासियत इनकी प्राकृतिक सुगंध है। सामान्य राखियों से अलग इन पर पानी या नमी पड़ने पर खुशबू फैलने लगती है। बारिश के मौसम में या हाथ धोते समय पानी की बूंद पड़ने पर राखी से उठने वाली खुशबू भाई को बहन के स्नेह के साथ छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक संपदा का भी एहसास कराएगी।
वन संपदा से रोजगार, हुनर को बाजार
इस पहल को केवल रक्षाबंधन के त्योहार से जोड़कर नहीं देखा जा रहा, बल्कि वन आधारित उत्पादों को बाजार से जोड़ने और स्थानीय महिलाओं के हुनर को नई पहचान देने की दिशा में भी इसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खस जैसी उपयोगी वनस्पतियों से उत्पाद तैयार कर पारंपरिक ज्ञान को संरक्षित करने के साथ स्थानीय स्तर पर आजीविका के अवसर विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।
रिश्तों की मिठास के साथ मिट्टी की खुशबू
वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि इस रक्षाबंधन बहनों का प्यार भाइयों की कलाई पर बंधेगा और राखी महकेगी। खस से बनी यह राखी केवल प्रेम का धागा नहीं, बल्कि प्रकृति से जुड़ा स्नेह भी अपने साथ बांधेगी। पानी की बूंद के साथ जब राखी महकेगी तो भाई को बहन के प्यार के साथ छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक संपदा की खुशबू भी महसूस होगी।




