अबूझमाड़ के 9 गांवों में पहली बार लहराया तिरंगा, आजादी के बाद लिखा नया इतिहास
नक्सल भय से निकलकर लोकतंत्र की ओर बढ़ा अबूझमाड़; 31 मार्च को नक्सलमुक्त होने के बाद पहली बार मनाया स्वतंत्रता दिवस

(कैलाश सोनी) नारायणपुर। अबूझमाड़ के लिए 15 अगस्त 2026 का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया। दशकों तक नक्सल हिंसा और भय के साये में रहे क्षेत्र के कोरसकोडो, हचेकोटी, आदनार, बोटेर, कुमनार, दिवालुर, गुंडेकोट, रेकापाल और रासमेटा गांवों में आजादी के बाद पहली बार स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगा शान से लहराया। ग्रामीणों ने राष्ट्रीय ध्वज को सलामी दी और पूरे उत्साह के साथ आजादी का पर्व मनाया।

जहां तिरंगा फहराना भी था मुश्किल, वहां गूंजा भारत माता का जयकारा
लंबे समय तक अबूझमाड़ के इन गांवों में नक्सली गतिविधियों का गहरा प्रभाव रहा। शीर्ष नक्सल नेतृत्व के आश्रयस्थल माने जाने वाले इन इलाकों में भय का ऐसा माहौल था कि राष्ट्रीय पर्वों पर सार्वजनिक रूप से आयोजन करना और तिरंगा फहराना ग्रामीणों के लिए संभव नहीं था। नक्सलियों के दबाव और हिंसा के कारण ग्रामीण देश के राष्ट्रीय पर्वों से भी दूर रहे।

लेकिन बदले हालात ने इस तस्वीर को बदल दिया। 31 मार्च 2026 को क्षेत्र के नक्सलमुक्त होने के बाद यह पहला स्वतंत्रता दिवस है, जब इन गांवों में ग्रामीणों ने खुले तौर पर राष्ट्रध्वज फहराकर आजादी का पर्व मनाया। गांवों में तिरंगा लहराते ही ग्रामीणों के चेहरों पर खुशी, गर्व और भावुकता के भाव दिखाई दिए।

भय पर आजादी, हिंसा पर शांति की जीत
इन गांवों में पहली बार स्वतंत्रता दिवस मनाया जाना महज एक आयोजन नहीं, बल्कि अबूझमाड़ में बदलते हालात की बड़ी तस्वीर भी सामने लाता है। वर्षों तक जहां नक्सलवाद के भय ने ग्रामीणों की जिंदगी को प्रभावित किया, वहीं अब उसी क्षेत्र में भारत का तिरंगा पूरे सम्मान के साथ लहरा रहा है।

ग्रामीणों ने राष्ट्रध्वज को नमन कर देश के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की। राष्ट्रीय पर्व में सहभागिता के साथ उन्होंने लोकतांत्रिक व्यवस्था और देश की मुख्यधारा से जुड़ने का संदेश भी दिया।

अबूझमाड़ में बदलाव की नई तस्वीर
स्वतंत्रता दिवस के इस ऐतिहासिक अवसर ने अबूझमाड़ में शांति और बदलाव की नई तस्वीर पेश की है। जिन गांवों में कभी नक्सली भय के कारण राष्ट्रीय पर्वों की खुशियां नहीं मनाई जा सकती थीं, वहां अब ग्रामीण उत्साह के साथ तिरंगे के नीचे एकत्र हुए।

ग्रामीणों के लिए यह पल केवल स्वतंत्रता दिवस मनाने तक सीमित नहीं रहा। यह उनके लिए वर्षों के भय से बाहर निकलने और नए भविष्य की ओर कदम बढ़ाने का अवसर भी बना।


आज इन नौ गांवों में सिर्फ तिरंगा नहीं लहराया, बल्कि यह संदेश भी बुलंद हुआ कि अबूझमाड़ भय से निकलकर शांति, विकास और लोकतंत्र की राह पर आगे बढ़ रहा है।




