राष्ट्रपति भवन के स्वतंत्रता दिवस निमंत्रण पर चमका बस्तर, ‘झिटकू–मिटकी’ को मिला राष्ट्रीय सम्मान
'एट होम' निमंत्रण पत्र में मिली बस्तर की ऐतिहासिक लोकगाथा को जगह | वन मंत्री केदार कश्यप बोले— यह पूरे छत्तीसगढ़ और बस्तर की सांस्कृतिक अस्मिता का गौरवपूर्ण क्षण

रायपुर। देश के सर्वोच्च संवैधानिक संस्थान राष्ट्रपति भवन से जारी स्वतंत्रता दिवस के ‘एट होम’ (At Home) निमंत्रण पत्र में इस वर्ष बस्तर की ऐतिहासिक लोकगाथा ‘झिटकू–मिटकी’ के प्रतीक (मोटिफ) को स्थान मिलने से पूरे छत्तीसगढ़, विशेषकर बस्तर अंचल में गौरव और उत्साह का माहौल है। राष्ट्रपति भवन के आधिकारिक निमंत्रण में शामिल यह कलात्मक आकृति बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर मिली विशिष्ट पहचान का प्रतीक बन गई है।
वन मंत्री केदार कश्यप ने इसे बस्तर की सांस्कृतिक धरोहर के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि बस्तर की लोकसंस्कृति आज राष्ट्रीय पहचान प्राप्त कर रही है। उन्होंने कहा कि झिटकू–मिटकी की लोकगाथा सदियों से बस्तर के जनजीवन, लोकआस्था और सांस्कृतिक चेतना का अभिन्न हिस्सा रही है। राष्ट्रपति भवन के स्वतंत्रता दिवस निमंत्रण पत्र में इस प्रतीक को स्थान मिलना प्रत्येक बस्तरवासी और छत्तीसगढ़वासी के लिए गर्व का क्षण है।
300 वर्ष पुरानी प्रेमगाथा, संस्कृति और परंपरा का जीवंत प्रतीक
मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि लगभग 300 वर्ष पुरानी झिटकू–मिटकी की अमर प्रेमगाथा केवल प्रेम और समर्पण की कहानी नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की परंपराओं, सामाजिक मूल्यों और सांस्कृतिक पहचान का जीवंत प्रतीक है। यही कारण है कि बस्तर की विश्वप्रसिद्ध ढोकरा (बेल मेटल) कला में झिटकू–मिटकी की प्रतिमाओं का विशेष स्थान है और इन्हें वर्षों से सम्मान-चिह्न के रूप में भेंट किया जाता रहा है।
राष्ट्रपति को भी भेंट की गई थी झिटकू–मिटकी की ढोकरा कलाकृति
वन मंत्री ने बताया कि हाल ही में राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान भी छत्तीसगढ़ की ओर से झिटकू–मिटकी की पारंपरिक ढोकरा कलाकृति राष्ट्रपति को भेंट की गई थी। अब उसी प्रतीक का स्वतंत्रता दिवस के आधिकारिक निमंत्रण पत्र में उपयोग इस बात का प्रमाण है कि बस्तर की लोककला और जनजातीय संस्कृति देश की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है।
स्थानीय संस्कृति को मिल रहा राष्ट्रीय सम्मान
केदार कश्यप ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर की स्थानीय संस्कृति, जनजातीय परंपराओं और भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत को सम्मान और नई पहचान देने का कार्य निरंतर किया जा रहा है। वहीं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार भी बस्तर की संस्कृति, लोककला और जनजातीय परंपराओं को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयासरत है।
बस्तर की अस्मिता को मिला राष्ट्रीय मंच
मंत्री कश्यप ने कहा कि राष्ट्रपति भवन के निमंत्रण पत्र पर झिटकू–मिटकी का अंकन केवल एक सांस्कृतिक प्रतीक का चयन नहीं है, बल्कि यह बस्तर की अस्मिता, गौरव और समृद्ध जनजातीय विरासत को पूरे देश के सामने सम्मानपूर्वक प्रस्तुत करने का ऐतिहासिक अवसर है। उन्होंने कहा कि यह सम्मान प्रत्येक बस्तरवासी और छत्तीसगढ़वासी के लिए गर्व, आत्मसम्मान और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है।




