नक्सलगढ़ से सुरक्षित मातृत्व की नई शुरुआत: पीड़ियाकोट में पहली बार हुआ संस्थागत प्रसव
बाइक एम्बुलेंस से दुर्गम गांव से मायका सेंटर पहुंचीं दो गर्भवतियां | एक स्वस्थ बालक और एक बालिका का जन्म, जच्चा-बच्चा सभी स्वस्थ

नारायणपुर। कभी घोर नक्सल प्रभावित रहा अबूझमाड़ का दुर्गम पीड़ियाकोट गांव अब विकास और स्वास्थ्य सेवाओं की नई कहानी लिख रहा है। गांव में पहली बार दो गर्भवती महिलाओं का सफल संस्थागत प्रसव कराकर स्वास्थ्य विभाग ने सुरक्षित मातृत्व की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। मायका सेंटर डुंगा में दोनों महिलाओं ने सुरक्षित रूप से बच्चों को जन्म दिया और वर्तमान में दोनों माताएं एवं दोनों नवजात पूरी तरह स्वस्थ हैं। इसे अबूझमाड़ के अंतिम छोर तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और संस्थागत प्रसव के प्रति बढ़ते विश्वास का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है।
जानकारी के अनुसार ग्राम पीड़ियाकोट निवासी दशरी (38 वर्ष), पति बुधराम तथा सुधरी (35 वर्ष), पति मुरा को स्वास्थ्य विभाग के अमले द्वारा लगातार सुरक्षित मातृत्व एवं संस्थागत प्रसव के लिए जागरूक किया गया। स्वास्थ्य कर्मियों ने दोनों महिलाओं और उनके परिजनों को संस्थागत प्रसव के लाभ तथा मायका सेंटर डुंगा में उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं की विस्तृत जानकारी दी।
दुर्गम रास्तों से बाइक एम्बुलेंस बनी जीवनदूत
काउंसलिंग के बाद दोनों गर्भवतियों को दुर्गम एवं कठिन मार्गों से बाइक एम्बुलेंस के माध्यम से मायका सेंटर डुंगा पहुंचाया गया। यहां चिकित्सकीय टीम ने दोनों महिलाओं की नियमित स्वास्थ्य जांच, आवश्यक देखभाल और लगातार निगरानी की, जिससे सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित हो सका।
एक स्वस्थ बालक और एक बालिका का जन्म
26 जुलाई 2026 को मायका सेंटर में दशरी ने 2.480 किलोग्राम वजन के स्वस्थ बालक को जन्म दिया, जबकि सुधरी ने 2.400 किलोग्राम वजन की स्वस्थ बालिका को जन्म दिया। वर्तमान में दोनों माताएं और दोनों नवजात पूरी तरह स्वस्थ हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम प्रसव के बाद भी उनकी नियमित स्वास्थ्य जांच और आवश्यक देखभाल कर रही है।
स्वास्थ्य सेवाओं ने बदली दुर्गम गांव की तस्वीर
पीड़ियाकोट जैसे पूर्व घोर नक्सल प्रभावित और अत्यंत दुर्गम गांवों में वर्षों तक स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंचना बड़ी चुनौती रहा है। समय पर चिकित्सा सुविधा नहीं मिलने से गर्भवती महिलाओं को कई जोखिमों का सामना करना पड़ता था। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग की सतत काउंसलिंग, नियमित संपर्क और बाइक एम्बुलेंस सेवा ने दोनों गर्भवतियों को समय रहते स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।
मायका सेंटर बना सुरक्षित मातृत्व का भरोसा
स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित मायका सेंटर के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों की गर्भवती महिलाओं को प्रसव पूर्व देखभाल, सुरक्षित आवास, नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, संस्थागत प्रसव और प्रसव उपरांत आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। पीड़ियाकोट में पहली बार संस्थागत प्रसव का सफल आयोजन इस बात का प्रमाण है कि अब स्वास्थ्य सेवाएं अबूझमाड़ के अंतिम छोर तक पहुंच रही हैं और ग्रामीणों का भरोसा भी लगातार बढ़ रहा है। यह उपलब्धि मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के साथ सुरक्षित मातृत्व अभियान को नई मजबूती देने वाली पहल मानी जा रही है।




