बाढ़ ने छीनी छत, खुले आसमान तले सुलग रही मासूमों की भूख
ब्रेबेड़ा में घर डूबे तो जंगल में चूल्हा जलाकर पेट भरने को मजबूर बच्चे, एक पतीला और पत्तों की थाली बनी जिंदगी का सहारा

नारायणपुर। लगातार हो रही मूसलधार बारिश और बाढ़ ने अबूझमाड़ अंचल के कई गांवों में जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। कहीं घर पानी में समा गए, तो कहीं लोगों का वर्षों का आशियाना उजड़ गया। इसी बीच बाढ़ प्रभावित ग्राम ब्रेबेड़ा से सामने आई एक तस्वीर ने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया है। तस्वीर में तीन मासूम बच्चे खुले आसमान के नीचे जंगल किनारे लकड़ियां बटोरकर चूल्हा जलाने की तैयारी करते दिखाई दे रहे हैं। उनके पास न घर है, न रसोई और न ही जीवन की बुनियादी सुविधाएं।
बाढ़ में घर डूबने के बाद इन बच्चों के परिवार खुले में रहने को मजबूर हैं। हालात ऐसे हैं कि भोजन बनाने के लिए उनके पास केवल एक पतीला है और खाने के लिए पत्तों का सहारा लेना पड़ रहा है। जंगल के बीच मिट्टी पर बैठकर गुजारा कर रहे इन बच्चों की बेबसी बाढ़ की भयावह तस्वीर बयां कर रही है।
बचपन पर आफत का पहाड़
जिस उम्र में बच्चों के हाथों में किताबें और खिलौने होने चाहिए, उस उम्र में वे जलाऊ लकड़ी जुटाकर अपने परिवार के लिए भोजन पकाने को मजबूर हैं। लगातार बारिश और बाढ़ ने उनके सिर से छत छीन ली है। खुले आसमान के नीचे दिन-रात गुजारना उनकी मजबूरी बन गया है। तस्वीर साफ बताती है कि प्राकृतिक आपदा ने सबसे अधिक चोट मासूम बचपन पर पहुंचाई है।
राहत का इंतजार, मुश्किलों का बढ़ता दायरा
ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ से कई परिवार बेघर हो गए हैं। भोजन, स्वच्छ पेयजल, कपड़े और सुरक्षित आश्रय जैसी मूलभूत जरूरतें भी पूरी नहीं हो पा रही हैं। प्रभावित परिवारों का कहना है कि तत्काल राहत सामग्री, अस्थायी आवास और भोजन की समुचित व्यवस्था की जाए, ताकि छोटे बच्चों और महिलाओं को राहत मिल सके।
सबसे बड़ा सवाल—कब मिलेगी सुरक्षित छत?
अबूझमाड़ के बाढ़ प्रभावित इलाकों में कई परिवार आज भी राहत का इंतजार कर रहे हैं। ब्रेबेड़ा के इन मासूमों की तस्वीर एक सवाल छोड़ जाती है—क्या आपदा के बाद इन बच्चों को जल्द सुरक्षित छत और सम्मानजनक जीवन मिल पाएगा, या इन्हें खुले आसमान के नीचे ही संघर्ष करना पड़ेगा?
(नोट: यह खबर उपलब्ध जानकारी और स्थानीय स्तर पर प्राप्त विवरण के आधार पर तैयार की गई है। यदि प्रशासन की ओर से राहत या पुनर्वास संबंधी अद्यतन जानकारी प्राप्त होती है, तो उसे भी समाचार में प्रमुखता से शामिल किया जा सकता है।)




