नारायणपुर

अबूझमाड़ में आजादी की असली रोशनी: दशकों बाद आदिवासी घरों में जले बिजली के बल्ब

नक्सलवाद की काली छाया हटते ही विकास ने बदली तस्वीर • नियद नेल्लानार योजना से मोहन्दी और मसपुर के सुदूर पाराओं तक पहुंची पहली बार बिजली • 45 परिवारों के घर जगमगाए, बच्चों की पढ़ाई से लेकर आजीविका तक खुलेंगे नए रास्ते

(कैलाश सोनी) नारायणपुर। अबूझमाड़ के घने जंगलों में बसे जिन आदिवासी परिवारों ने आजादी के बाद से केवल अंधेरा ही देखा था, उनके घरों में आखिरकार रोशनी पहुंच गई है। वर्षों तक नक्सलवाद और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण विकास से कटे रहे ग्राम मोहन्दी और मसपुर के सुदूर पाराओं में पहली बार बिजली के बल्ब जले तो पूरा गांव खुशी से झूम उठा। ग्रामीणों के लिए यह केवल बिजली नहीं, बल्कि दशकों के इंतजार के बाद विकास, विश्वास और नए भविष्य की किरण बनकर आई है।

छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी ‘नियद नेल्लानार (आपका अच्छा गांव) योजना’ के तहत नारायणपुर जिले के वनांचल क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाएं पहुंचाने का अभियान लगातार जारी है। इसी कड़ी में ग्राम मोहन्दी के मिचिंगपारा, कोडियारपारा और बीचपारा तथा ग्राम मसपुर के गुडरापारा तक पहली बार विद्युत सुविधा पहुंचाई गई है।

घने जंगल, ऊंचे पहाड़… फिर भी नहीं रुका विकास

इन गांवों तक बिजली पहुंचाना आसान नहीं था। घने जंगल, दुर्गम पहाड़ियां और वर्षों तक नक्सली प्रभाव के कारण यह इलाका विकास की मुख्यधारा से दूर रहा। लेकिन जिले को नक्सल मुक्त घोषित किए जाने के बाद प्रशासन ने विकास कार्यों को नई गति दी। कलेक्टर नम्रता जैन के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड की टीम ने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में विद्युत लाइन विस्तार का कार्य निर्धारित समय सीमा में पूरा किया। परियोजना का क्रियान्वयन एम/एस माँ शारदा द्वारा किया गया।

84 लाख से अधिक की लागत, 45 परिवारों का सपना पूरा

परियोजना के तहत ग्राम मोहन्दी के तीनों पाराओं में 61.79 लाख रुपये की लागत से विद्युत विस्तार किया गया, जिससे 40 परिवारों को पहली बार बिजली मिली। वहीं ग्राम मसपुर के गुडरापारा में 22.42 लाख रुपये की लागत से कार्य पूरा कर 5 परिवारों को विद्युत कनेक्शन उपलब्ध कराया गया। इस तरह कुल 84.21 लाख रुपये की लागत से 45 आदिवासी परिवारों के घर रोशनी से जगमगा उठे।

अब रात में भी होगी पढ़ाई, बदलने लगेगी गांव की तस्वीर

बिजली पहुंचने के साथ ही गांवों की जीवनशैली बदलने लगी है। अब बच्चे रात में बेहतर रोशनी में पढ़ाई कर सकेंगे। मोबाइल चार्ज करने, पंखे चलाने और अन्य घरेलू विद्युत उपकरणों का उपयोग संभव हो गया है। स्वास्थ्य सेवाओं को भी मजबूती मिलेगी, क्योंकि बिजली उपलब्ध होने से स्वास्थ्य केंद्रों और आवश्यक चिकित्सा उपकरणों का संचालन आसान होगा।

रोशनी के साथ आएंगे रोजगार के अवसर

ग्रामीणों का कहना है कि बिजली केवल घरों को रोशन नहीं करती, बल्कि विकास की राह भी खोलती है। अब गांवों में लघु उद्योग, स्वरोजगार और आजीविका के नए अवसर विकसित होने की उम्मीद बढ़ गई है। वर्षों तक अंधेरे में जीवन बिताने वाले परिवारों ने पहली बार अपने घरों में जलते बल्ब देखकर शासन, जिला प्रशासन और विद्युत विभाग के प्रति आभार जताया।

अबूझमाड़ में बदल रही विकास की तस्वीर

नियद नेल्लानार योजना के माध्यम से अबूझमाड़ में केवल बिजली ही नहीं, बल्कि सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य मूलभूत सुविधाएं भी तेजी से पहुंचाई जा रही हैं। प्रशासन का लक्ष्य जिले के सभी दूरस्थ एवं वंचित गांवों तक चरणबद्ध तरीके से विद्युत सुविधा सहित विकास की प्रत्येक योजना पहुंचाना है। कभी नक्सलवाद के कारण अंधेरे में डूबा अबूझमाड़ अब विकास की रोशनी से नई पहचान बना रहा है।

 तथ्य

  • 45 आदिवासी परिवारों के घर पहली बार बिजली से रोशन।
  • 84.21 लाख रुपये की लागत से पूरा हुआ विद्युतीकरण।
  • मोहन्दी के 3 पारा और मसपुर का 1 पारा पहली बार बिजली से जुड़े।
  • नियद नेल्लानार योजना के तहत वनांचल के दूरस्थ गांवों में पहुंच रहीं मूलभूत सुविधाएं।
  • नक्सलवाद के अंधेरे से निकलकर अबूझमाड़ में विकास का उजाला लगातार मजबूत हो रहा है।

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