अब नहीं थमेगा ओरछा का सफर: पिनगुंडा नाला पर बना पुल, बरसात में भी दौड़ेंगी गाड़ियां
हर साल उफनते नाले से कट जाता था नारायणपुर-ओरछा संपर्क, 2.58 करोड़ की लागत से बने बॉक्स ब्रिज ने खत्म की दशकों पुरानी परेशानी, हजारों ग्रामीणों को मिली बड़ी राहत

नारायणपुर। बारिश का मौसम आते ही जिस पिनगुंडा नाला का नाम सुनकर ओरछा क्षेत्र के लोगों की धड़कनें बढ़ जाती थीं, अब उसी नाले पर हर मौसम में वाहनों के पहिए बिना रुके दौड़ेंगे। वर्षों से बरसात के दौरान उफान पर आने वाले इस नाले के कारण नारायणपुर और ओरछा के बीच संपर्क पूरी तरह टूट जाता था, लेकिन अब यह परेशानी इतिहास बनने जा रही है। करीब 2 करोड़ 58 लाख 25 हजार रुपये की लागत से निर्मित 6 बॉक्स (7×6 मीटर) बॉक्स ब्रिज का निर्माण पूरा हो चुका है और इस पर आवागमन भी शुरू हो गया है।

पल्ली-छोटेडोंगर-ओरछा मार्ग पर स्थित पिनगुंडा नाला लंबे समय से क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या बना हुआ था। बारिश के दौरान नाला उफान पर आते ही तहसील मुख्यालय ओरछा सहित आसपास के कई गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क कट जाता था। लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ता था, जिससे समय की बर्बादी होती थी।
मरीजों, विद्यार्थियों और ग्रामीणों को मिलेगी राहत
पुलिया बनने के बाद अब बारिश के मौसम में भी आवागमन निर्बाध रहेगा। सबसे बड़ा लाभ उन मरीजों को मिलेगा, जिन्हें समय पर इलाज के लिए जिला अस्पताल पहुंचने में कठिनाई होती थी। वहीं विद्यार्थियों की पढ़ाई भी अब बारिश के कारण प्रभावित नहीं होगी। प्रशासनिक कार्यों के साथ-साथ सरकारी योजनाओं का लाभ भी ग्रामीणों तक बिना किसी बाधा के पहुंच सकेगा।
खेती और व्यापार को भी मिलेगी नई रफ्तार
पुलिया बनने से कृषि उपज, दैनिक उपयोग की वस्तुओं और अन्य आवश्यक सामानों के परिवहन में भी आसानी होगी। इससे स्थानीय व्यापार को मजबूती मिलेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी। परिवहन सुगम होने से किसानों को अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने में भी सुविधा होगी।
वर्षों पुरानी मांग हुई पूरी
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पिनगुंडा नाला पर पुल निर्माण उनकी वर्षों पुरानी मांग थी। हर बारिश में संपर्क टूटने से पूरे क्षेत्र को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। अब पुल बनने से लोगों को स्थायी राहत मिली है और पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है।
विकास का नया सेतु बना पिनगुंडा पुल
ग्रामीणों का मानना है कि यह पुल केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि ओरछा क्षेत्र के विकास का नया सेतु है। इससे शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रशासन, कृषि और व्यापार सभी क्षेत्रों को मजबूती मिलेगी। शासन की यह पहल दूरस्थ और आदिवासी अंचल के हजारों लोगों के जीवन को अधिक सुरक्षित, सुविधाजनक और सुगम बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।




