‘आई एम कलाम’ से अबूझमाड़ के बच्चों को बड़े सपनों की उड़ान
माड़ संवाद में तोके गांव पहुंचीं कलेक्टर नम्रता जैन, शाला प्रवेश उत्सव में बांटी अध्ययन सामग्री; शिक्षा, स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता का दिया मंत्र

नर्सिंग पढ़ने की इच्छा लेकर सामने आईं बेटियां, कलेक्टर ने अधिकारियों को दिए मार्गदर्शन और प्रवेश में सहयोग के निर्देश
पेयजल समस्या पर ग्रामीणों की मांग, जलापूर्ति व्यवस्था सुधारने के निर्देश
नारायणपुर। अबूझमाड़ के सुदूर अंचल में शिक्षा और विकास की नई अलख जगाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा संचालित माड़ संवाद कार्यक्रम गुरुवार को ओरछा विकासखंड के ग्राम तोके पहुंचा। कलेक्टर नम्रता जैन ने ग्रामीणों से सीधा संवाद करते हुए न केवल शासन की योजनाओं की जानकारी दी, बल्कि बच्चों और युवाओं को शिक्षा के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने और बड़े सपने देखने का संदेश भी दिया। इस दौरान प्रेरणादायी फिल्म ‘आई एम कलाम’ का प्रदर्शन आकर्षण का केंद्र रहा।

फूलों से स्वागत, बैग-किताबों के साथ मिला उज्ज्वल भविष्य का संदेश
कार्यक्रम की शुरुआत शाला प्रवेश उत्सव से हुई। कलेक्टर ने नवप्रवेशी विद्यार्थियों का पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया तथा उन्हें नए गणवेश, स्कूल बैग, कॉपी, पुस्तक, पेंसिल सहित अन्य अध्ययन सामग्री वितरित की। उन्होंने बच्चों से नियमित विद्यालय आने और शिक्षा के माध्यम से बेहतर भविष्य गढ़ने की बात कही।
ग्रामीणों को बताया गया कि गांव में विद्यालय शुरू होने से बच्चों को शिक्षा की सुविधा मिल रही है तथा नए स्कूल भवन का निर्माण भी प्रगति पर है। कलेक्टर ने अभिभावकों से बच्चों की शिक्षा पर विशेष ध्यान देने और उन्हें उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित करने की अपील की।

कॉफी और चॉकलेट की खेती से बढ़ेगी आय, स्वरोजगार अपनाने का आह्वान
माड़ संवाद के दौरान ग्रामीणों को प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वच्छ भारत मिशन सहित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी गई। कलेक्टर ने कहा कि वनांचल क्षेत्र में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग से आय के नए अवसर सृजित किए जा सकते हैं।
उन्होंने इमली, बांस आधारित गतिविधियों, बकरी पालन, मुर्गी पालन और अन्य स्वरोजगार योजनाओं से जुड़ने की अपील की। साथ ही कॉफी और चॉकलेट की खेती को क्षेत्र के लिए दीर्घकालिक आर्थिक लाभ का माध्यम बताते हुए आवश्यक प्रशिक्षण और सहयोग उपलब्ध कराने की बात कही।

मनरेगा और कौशल विकास से आत्मनिर्भरता की राह
ग्रामीणों को मनरेगा, मत्स्य पालन, कृषि आधारित गतिविधियों और कौशल विकास प्रशिक्षणों से जुड़कर आय बढ़ाने के लिए प्रेरित किया गया। महिलाओं और युवाओं से स्वरोजगार आधारित गतिविधियों में अधिक भागीदारी का आह्वान भी किया गया।
कलेक्टर ने कहा कि जंगलों का संरक्षण और आजीविका एक-दूसरे के पूरक हैं तथा प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के लिए भी लाभकारी सिद्ध होगा।
पेयजल समस्या पर दिखी गंभीरता
ग्रामीणों ने पेयजल संबंधी समस्याओं और जलापूर्ति व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता बताई। इस पर कलेक्टर ने संबंधित विभाग के अधिकारियों को त्वरित निराकरण और नियमित पेयजल उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

नर्सिंग की पढ़ाई का सपना, प्रशासन देगा सहारा
संवाद के दौरान रमशिला उसेंडी, सुनीता ध्रुव और दैनी गोटा ने उच्च शिक्षा के लिए नर्सिंग संस्थानों में प्रवेश दिलाने का अनुरोध किया। कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक मार्गदर्शन और प्रवेश प्रक्रिया में सहयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही पात्र वृद्धजनों को पेंशन योजनाओं से जोड़ने के निर्देश भी दिए।
कार्यक्रम में महिलाओं को साड़ी वितरित कर विभिन्न विभागों की योजनाओं का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया गया। इस अवसर पर एसडीएम डॉ. सुमित गर्ग, जनपद पंचायत सीईओ लोकेश चतुर्वेदी, विकासखंड शिक्षा अधिकारी संतु नुरेटी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
‘आई एम कलाम’ के पर्दे पर अबूझमाड़ के बच्चों ने देखे अपने सपने

कैलाश सोनी…
तोके जैसे सुदूर गांव में जब बड़े पर्दे पर ‘आई एम कलाम’ चली, तो यह केवल एक फिल्म का प्रदर्शन नहीं था, बल्कि उन मासूम आंखों में छिपे सपनों को पहचानने और उन्हें दिशा देने का प्रयास भी था। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बीच पल रहे बच्चों के लिए यह फिल्म एक संदेश बनकर सामने आई कि मंजिलें दूर जरूर हो सकती हैं, लेकिन असंभव नहीं।
सबसे भावुक पल तब सामने आया, जब गांव की बेटियों ने नर्सिंग की पढ़ाई कर आगे बढ़ने की अपनी इच्छा खुलकर जाहिर की। यह दृश्य इस बात का संकेत था कि अबूझमाड़ के जंगलों के बीच भी सपनों की उड़ान आकार लेने लगी है।
शायद यही माड़ संवाद की सबसे बड़ी सफलता है कि अब यहां केवल योजनाओं की चर्चा नहीं हो रही, बल्कि शिक्षा, आत्मविश्वास और भविष्य की नई संभावनाओं पर भी संवाद शुरू हो चुका है। गांवों के बच्चों की आंखों में चमक और उनके सपनों को मिले नए पंख आने वाले समय में इस अंचल की बदलती तस्वीर की कहानी कहेंगे।




