दो साल की धूल, दलदल और इंतजार के बाद दिखी राहत की सड़क
नारायणपुर-कोंडागांव NH-130D पर दौड़ने लगा विकास, सोशल मीडिया पर छलका लोगों का उत्साह

कभी गड्ढों और कीचड़ से बदनाम रहा मार्ग अब बन रहा बस्तर की नई पहचान, अबूझमाड़ से महाराष्ट्र तक खुलेगी तरक्की की राह
(कैलाश सोनी) नारायणपुर। पिछले दो वर्षों से धूल, दलदल, जाम और टूटे रास्तों की पीड़ा झेल रहे नारायणपुर और कोंडागांव जिले के लोगों के चेहरे पर आखिरकार राहत की मुस्कान लौटने लगी है। राष्ट्रीय राजमार्ग 130-डी (NH-130D) का निर्माण अब तेजी से पूर्णता की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। नारायणपुर से कोंडागांव तक वन-वे साइड का बड़ा हिस्सा लगभग तैयार हो चुका है और इसी के साथ सोशल मीडिया पर लोगों की खुशी खुलकर सामने आने लगी है।

जो सड़क कभी लोगों के गुस्से और बदहाली की पहचान बन चुकी थी, वही सड़क अब विकास, उम्मीद और बदलते बस्तर की नई तस्वीर बनती नजर आ रही है। लोग सड़क पर दौड़ते वाहनों के वीडियो बनाकर सोशल मीडिया में साझा कर रहे हैं और लिख रहे हैं— “अब लग रहा है कि विकास सच में यहां पहुंच रहा है।”
दो वर्ष पहले तक हालात ऐसे थे कि बारिश के दिनों में यह मार्ग दलदल में तब्दील हो जाता था। छोटी-बड़ी गाड़ियां घंटों तक कीचड़ में फंसी रहती थीं। मरीज अस्पताल पहुंचने से पहले रास्ते में परेशान होते थे। व्यापारियों का सामान समय पर नहीं पहुंच पाता था। स्कूल-कॉलेज जाने वाले विद्यार्थियों और नौकरीपेशा लोगों की मुश्किलें अलग थीं।
सोशल मीडिया पर इस सड़क की बदहाली को लेकर लगातार वीडियो वायरल होते थे। लोग सवाल उठा रहे थे कि आखिर कब खत्म होगा यह निर्माण कार्य? कब मिलेगी राहत?
अब वही लोग सड़क निर्माण को देखकर संतोष जता रहे हैं।
अबूझमाड़ के बीच बन रही विकास की नई धुरी

जंगलों और पहाड़ों के बीच तैयार हो रहा रणनीतिक राष्ट्रीय राजमार्ग
राष्ट्रीय राजमार्ग 130-डी केवल एक सड़क परियोजना नहीं, बल्कि बस्तर और अबूझमाड़ के भविष्य को बदलने वाली सबसे महत्वपूर्ण आधारभूत परियोजनाओं में से एक मानी जा रही है।
घने जंगलों, ऊंचे पहाड़ों और दशकों तक दुर्गम माने जाने वाले अबूझमाड़ क्षेत्र के बीच से गुजरने वाला यह मार्ग छत्तीसगढ़ को सीधे महाराष्ट्र से जोड़ने जा रहा है।
यह वही इलाका है जहां कभी छोटी, टूटी और खतरनाक सड़कों पर सफर करना जोखिम से भरा माना जाता था। बारिश आते ही कई गांवों का संपर्क टूट जाता था। दुर्घटनाएं आम बात थीं और व्यापारिक गतिविधियां बेहद सीमित रह जाती थीं।
लेकिन अब तस्वीर बदल रही है।
कोंडागांव से नारायणपुर होते हुए महाराष्ट्र तक पहुंचने वाला यह विशाल राष्ट्रीय राजमार्ग आने वाले वर्षों में पूरे बस्तर संभाग की आर्थिक तस्वीर बदल सकता है।
195 किलोमीटर लंबा रणनीतिक कॉरिडोर
छत्तीसगढ़ को महाराष्ट्र से जोड़ेगा NH-130D
राष्ट्रीय राजमार्ग 130-डी की कुल लंबाई लगभग 195 किलोमीटर है। इसमें से लगभग 122 किलोमीटर हिस्सा छत्तीसगढ़ में आता है।
यह मार्ग कोंडागांव से प्रारंभ होकर नारायणपुर, कुतुल और नेलांगुर होते हुए महाराष्ट्र में प्रवेश करेगा। आगे यह बिनागुंडा, लाहेरी, भामरागढ़ और हेमलकसा होते हुए आलापल्ली तक पहुंचेगा, जहां यह NH-353D से जुड़ेगा।
इस परियोजना का सबसे बड़ा महत्व यह है कि इससे बस्तर का सीधा संपर्क महाराष्ट्र और देश के बड़े व्यापारिक केंद्रों से मजबूत होगा।
विशेषज्ञ मानते हैं कि सड़क बनने के बाद बस्तर में व्यापार, पर्यटन और निवेश की संभावनाएं कई गुना बढ़ सकती हैं।
निर्माण के दौरान जनता ने झेली भारी परेशानी
धूल, जाम और दलदल ने बढ़ाई थी मुश्किलें
पिछले दो वर्षों में सड़क निर्माण के दौरान लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
कई जगह सड़क खोद दिए जाने से यातायात प्रभावित हुआ। भारी वाहनों की आवाजाही से धूल का गुबार लगातार उड़ता रहा। बरसात में यही रास्ता कीचड़ और दलदल में बदल गया।
नारायणपुर- कोंडागांव मार्ग पर कई बार वाहन घंटों तक फंसे रहे। एंबुलेंस तक को निकलने में दिक्कतें आईं। स्थानीय व्यापारियों का कारोबार प्रभावित हुआ और ग्रामीणों की दैनिक जिंदगी मुश्किल हो गई।
सोशल मीडिया में सड़क की बदहाली लगातार चर्चा का विषय बनी रही। लोग वीडियो डालकर प्रशासन और निर्माण एजेंसियों पर सवाल उठा रहे थे।
हालांकि अब जैसे-जैसे सड़क का निर्माण अंतिम चरण में पहुंच रहा है, लोगों की नाराजगी धीरे-धीरे संतोष में बदलती दिखाई दे रही है।
“अब लग रहा है कि नारायणपुर बदल रहा है”
सोशल मीडिया में वायरल हो रहे विकास के वीडियो
सड़क निर्माण के बाद अब सोशल मीडिया में एक अलग तरह का माहौल देखने को मिल रहा है।
जहां पहले लोग कीचड़ और जाम के वीडियो साझा करते थे, वहीं अब नई सड़क पर दौड़ती गाड़ियों और बेहतर मार्ग के वीडियो वायरल हो रहे हैं।
स्थानीय युवाओं द्वारा बनाए गए वीडियो में लोग कहते दिखाई दे रहे हैं कि “इतने साल बाद अब नारायणपुर में भी बड़ी सड़क दिख रही है।”
कई लोग इसे “बस्तर के विकास की नई शुरुआत” बता रहे हैं।
बारिश से पहले सड़क तैयार करना बड़ी चुनौती
मंत्री ने किया निरीक्षण, गुणवत्ता पर सख्त निर्देश

हाल ही में छत्तीसगढ़ शासन के सड़क परिवहन एवं वन मंत्री केदार कश्यप ने निर्माणाधीन मार्ग का निरीक्षण किया था।
उन्होंने निर्माण एजेंसी और राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए।
मंत्री ने यह भी कहा कि बारिश शुरू होने से पहले सड़क को आवागमन योग्य बनाना बेहद जरूरी है ताकि जनता को फिर से परेशानी का सामना न करना पड़े।
निर्माण एजेंसी को माइनिंग वाहनों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
गुणवत्ता को लेकर उठे सवाल भी
कुछ हिस्सों में डामर उखड़ने की शिकायत
जहां एक ओर लोग सड़क निर्माण को लेकर उत्साहित हैं, वहीं दूसरी ओर निर्माण गुणवत्ता को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ हिस्सों में सड़क की परत जल्दी खराब होने लगी है। कई जगह डामर उखड़ने जैसी शिकायतें सामने आई हैं।
लोगों की मांग है कि इतनी महत्वपूर्ण परियोजना में गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए क्योंकि यह सड़क आने वाले दशकों तक क्षेत्र की जीवनरेखा बनने वाली है।
नक्सल प्रभावित क्षेत्र में विकास की बड़ी पहल
सड़क बनने से सुरक्षा और सुविधाएं दोनों मजबूत होंगी
राष्ट्रीय राजमार्ग 130-डी रणनीतिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
यह मार्ग देश के सबसे संवेदनशील और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में से एक अबूझमाड़ से होकर गुजरता है।
सड़क बनने के बाद सुरक्षाबलों की आवाजाही आसान होगी और अंदरूनी इलाकों तक प्रशासनिक पहुंच मजबूत होगी।
इसके साथ ही वर्षों से कटे हुए गांवों तक अस्पताल, स्कूल, राशन और अन्य बुनियादी सुविधाएं तेजी से पहुंच सकेंगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि जहां सड़कें पहुंचती हैं, वहां विकास अपने आप रास्ता बना लेता है।
व्यापार, पर्यटन और रोजगार को मिलेगा नया जीवन
बदल सकती है पूरे बस्तर की आर्थिक तस्वीर
NH-130D को भविष्य के आर्थिक कॉरिडोर के रूप में भी देखा जा रहा है।
इस सड़क के बनने से किसानों की उपज तेजी से बाजार तक पहुंच सकेगी। व्यापारियों के परिवहन खर्च में कमी आएगी।
नारायणपुर और आसपास के क्षेत्रों में पर्यटन की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। अबूझमाड़ की प्राकृतिक सुंदरता, जंगल, पहाड़ और आदिवासी संस्कृति देश-दुनिया के पर्यटकों को आकर्षित कर सकती है।
स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
बदलाव की इस सड़क पर अब उम्मीदें दौड़ रही हैं
दो वर्षों तक धूल, जाम और कीचड़ झेलने के बाद अब नारायणपुर और कोंडागांव के लोगों को लगने लगा है कि उनका इंतजार आखिरकार रंग ला रहा है।
विकास की राह भले कठिन रही हो, लेकिन अब इस सड़क पर केवल वाहन ही नहीं, बल्कि पूरे बस्तर की उम्मीदें दौड़ती दिखाई दे रही हैं।
और शायद इसलिए अब लोग मुस्कुराकर कह रहे हैं—
“कुछ तो लोग कहेंगे… लोगों का काम है कहना…
लेकिन आने वाला समय इन सड़कों पर दौड़ते विकास के पहियों की गवाही जरूर देगा।”




