अबूझमाड़: जहां दशकों बाद पहुंची सरकार
जाटलूर में ‘चावल उत्सव’ के साथ गांव में शुरू हुआ राशन वितरण, 272 हितग्राहियों को मिली बड़ी राहत

(कैलाश सोनी) नारायणपुर। बस्तर के घने जंगलों के बीच बसे अबूझमाड़ का इलाका लंबे समय तक प्रशासनिक पहुंच से दूर रहा। यहां के कई गांव ऐसे थे जहां आजादी के दशकों बाद भी न सड़क पहुंची थी और न ही शासन की योजनाएं नियमित रूप से पहुंच पाती थीं। लेकिन अब हालात बदलने लगे हैं। नक्सल प्रभाव घटने और प्रशासन की सक्रिय पहल के चलते अबूझमाड़ के दूरस्थ गांवों तक सरकारी योजनाएं पहुंचने लगी हैं।

इसी कड़ी में जिले के ग्राम पंचायत जाटलूर में पहली बार गांव में ही सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत राशन वितरण की शुरुआत की गई। इस अवसर पर ‘चावल उत्सव’ का आयोजन कर ग्रामीणों को उनके गांव में ही खाद्यान्न उपलब्ध कराया गया। इस पहल से क्षेत्र के ग्रामीणों में उत्साह का माहौल देखने को मिला।
272 हितग्राहियों को गांव में मिला राशन
छत्तीसगढ़ शासन की मंशा के अनुरूप तथा कलेक्टर नम्रता जैन के निर्देशन में खाद्य विभाग द्वारा अबूझमाड़ के दुर्गम वनांचल क्षेत्रों में भी खाद्यान्न उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है।
ग्राम पंचायत जाटलूर के आश्रित ग्राम बोटेर, धोबे, हरवेल और गटटाकाल के 272 हितग्राहियों को पहली बार उनके गांव में ही राशन उपलब्ध कराया गया। खाद्य विभाग द्वारा ओरछा से ट्रैक्टर के माध्यम से खाद्यान्न परिवहन कर सीधे जाटलूर पहुंचाया गया, जहां राशनकार्डधारी हितग्राहियों को नियमानुसार खाद्यान्न वितरित किया गया।

पहले राशन के लिए 30 किलोमीटर पैदल जाना पड़ता था
जिला खाद्य अधिकारी मोहम्मद अलाउद्दीन खान ने बताया कि ग्राम जाटलूर में अंत्योदय के 331, प्राथमिकता के 1 और एपीएल के 3 राशनकार्डधारी हितग्राही पंजीकृत हैं।
उन्होंने बताया कि इससे पहले यहां के ग्रामीणों को राशन लेने के लिए लगभग 30 किलोमीटर पैदल चलकर ओरछा जाना पड़ता था। दुर्गम जंगल और कठिन रास्तों के कारण विशेष रूप से बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांगजनों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता था।
गांव में राशन पहुंचने से खुशी की लहर
कलेक्टर नम्रता जैन की पहल से अब ग्रामीणों को अपने गांव में ही राशन उपलब्ध होने लगा है। पहली बार गांव में राशन वितरण होने से क्षेत्रवासियों में उत्साह का माहौल देखा गया।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अब उन्हें राशन लेने के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी। इससे उनके समय, श्रम और धन तीनों की बचत होगी।
अबूझमाड़ में बढ़ रही प्रशासनिक पहुंच
गौरतलब है कि अबूझमाड़ क्षेत्र लंबे समय तक नक्सल प्रभाव और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण विकास से दूर रहा। लेकिन अब जैसे-जैसे हालात बदल रहे हैं, प्रशासन की पहुंच भी इन क्षेत्रों तक बढ़ रही है।
जिला प्रशासन द्वारा दूरस्थ और दुर्गम गांवों में आवश्यक सेवाएं पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि शासन की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके।
जाटलूर में पहली बार गांव में राशन वितरण
- चावल उत्सव के साथ पीडीएस वितरण का शुभारंभ
- 4 गांवों के 272 हितग्राहियों को मिला लाभ
- पहले 30 किमी पैदल चलकर जाना पड़ता था ओरछा
- ट्रैक्टर से खाद्यान्न पहुंचाकर गांव में कराया गया वितरण




