नारायणपुर

नवरात्रि पर करेलघाटी में भक्तों का उमड़ा सैलाब, भव्य भंडारे का आयोज

करेलघाटी के राक्षस डोंगरी में नवरात्रि की धूम, विधिविधान से हुई नवरात्रि की पूजा अर्चना और कलश विसर्जन
जी मीडिया के रिपोर्टर ने कराया भव्य भंडारे का आयोजन…

नारायणपुर– घोर नक्सल प्रभावित नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ के प्रवेश द्वारा में स्थित करेलघाटी माता मावली मंदिर में नवरात्री के आज नवमी के दिन विधि-विधान से माता के नाम से जलाए गए ज्योति कलश का विसर्जन मोदुरगुंडा धोड्गी नाला में भक्तो ने किया | नक्सलियों और पुलिस की गोलियों से गूंजने वाली अबूझमाड़ की हसीन वादियाँ में माता रानी के जयकारे की गूंज नवरात्रि के 9 दिनों तक इन वादियों में सुनाई देने लगी जो इस इलाके में शांति बहाली की ओर कदम बढ़ाने ने अहम कड़ी साबित होगी | वही जी मीडिया के रिपोर्टर हेमंत संचेती द्वारा माता के भक्तो के लिए भंडारे का आयोजन किया गया जिसमे सैकड़ो भक्तो ने प्रसाद ग्रहण किया । जहा रहता था नक्सलियों का भय और आतंक , जहा की वादियों में सिर्फ गोलियों की आवाज गूंजा करती थी वहा कि वादियों में नवरात्रि के 9 दिनों सिर्फ और सिर्फ माता रानी के जयकारे और भजन देते है सुनाई जो बया करता है कि जिस तरह भगवान राम ने राक्षसों का किया था अंत वैसे ही भय और आतंक का हो रहा है अंत।


नारायणपुर जिले के नक्सलियों के गढ़ कहे जाने वाले अबूझमाड़ के प्रवेश द्वारा करेलघाटी जिसे राक्स हाड़ा (राक्षस डोंगरी) के नाम से जाना व पहचाना जाता है कहा जाता है कि जब भगवान राम को वनवास हुआ था तब भगवान राम इसी दंडकारण्य में अपने वनवास के 14 वर्ष बिताए थे इस दौरान दंडकारण्य में अत्याचार करने वाले राक्षसों का वध भगवान राम ने किया था जिनकी हड्डियों का ढांचा के अस्तित्व आज भी इस करेल घाटी में नजर आते है वही इस करेल घाटी में स्थित माता मावली के मंदिर में इस नवरात्रि में श्रधालुओ द्वारा ज्योति कलश जलाया गया और 9 दिनों तक माता की भक्ति आरधना की गई | आज नवमी के दिन आसपास के लगभग 10 गाँवो के लोग कलश विसर्जन कार्यकर्म में शामिल हुए और भक्तिभावना के साथ माता रानी के जयकारे लगाए | पहले नक्सलियों के भय के चलते इस मंदिर में पूजा अर्चना नहीं के बराबर होती थी लेकिन अब माता के भक्तो ने भय और दहशत को दरकिनार कर माता रानी की पूजा अर्चना करने पहुचने लगे है | वही नारायणपुर जिले के जी मीडिया के रिपोर्टर हेमंत संचेती पिछले पांच वर्षो से नवरात्रि के अवसर पर भंडारे का आयोजन करते आ रहे है इस वर्ष भी कि यहाँ पर भंडारे का आयोजन कर भक्तो के भय को कम करने की कोशिश कर लोगो में विश्वास जगाने का काम किया जा रहा है । करेलघाटी में कलश विसर्जन और जसजीत गाने पहुंचे युवतियों ने कहा कि बचपन से अपने माता पिता के साथ नवरात्रि में आते रहे है पहले काफी घना जंगल हुआ करता था आने में डर लगता था लेकिन अब ऐसा नहीं है । नवरात्रि में 9 दिनों तक माता रानी की भक्ति और भजन में भय कही रहता ही नही और पूरा माहौल भक्तिमय हो जाता है । नारायण यादव ने कहा कि पहले करेलघाट में नवरात्रि में दीपक जलाने आते थे घना जंगल और भय का माहौल था धीरे धीरे जंगल कम हुआ और भय में भी कमी आई । जिसके बाद मनोकामना ज्योत जलाने भक्तजन आने लगे । वही नारायणपुर के जी मध्यप्रदेश छत्तीसगढ़ के रिपोर्टर हेमंत संचेती द्वारा पिछले पांच वर्षो से नवरात्रि के प्रारंभ से लेकर समाप्ति तक समिति को आयोजन करने पूरा मदद किया जाता है और अंतिम दिवस भंडारे का आयोजन कर माता रानी के भक्तजनों को प्रसाद पूरी भक्तिभाव से खिलाया जाता है । उनके द्वारा नारायणपुर से इस घने जंगल में आकर आयोजन करना हम सभी में माता रानी की सेवा भावना को बढ़ाता है जिसके लिए हम सभी उनके सदैव आभारी रहेंगे और हर वर्ष उनका सहयोग ऐसा ही मिलता रहे है यही कामना करते है । हेमंत संचेती जी मीडिया के रिपोर्टर ने कहा कि 6 साल पहले दोस्तो के साथ करेलघाट में पिकनिक मनाने आए थे उस समय नवरात्रि की तैयारी के लिए ग्रामीणों के द्वारा मंदिर की साफ सफाई का कार्य किया जा रहा था उनसे बात करने पर उन्होंने बताया कि नवरात्रि में पूजा अर्चना की जाती है बहुत कम लोग यहां आते है कई लोग को उसकी जानकारी भी नही है । तभी मैंने मन बना लिया था कि मंदिर का प्रचार प्रसार और लोगो को इस इलाके के बदलते तस्वीर से रूबरू कराने का काम करूंगा । फिर नवरात्रि के अंतिम दिवस भंडारे का आयोजन की शुरुवात की गई जिसमे नारायणपुर के मित्रजनों का साथ सदैव मिलता रहा है । इस वर्ष भी भंडारे में माता रानी के प्रसाद में खिचड़ी बनाया गया था जिसे करेलघाटी में माता के भक्तजनों ने ग्रहण किया जिसके बाद पिकअप वाहन में 3 गंज खिचड़ी लेकर कूकड़ा झोर, कोचवाही, बेलगांव और बाकुलवाही में विसर्जन करने जा रहे सैकड़ों भक्तो को प्रसाद वितरण किया गया। इस वर्ष भी मित्रजन संतराम करगा, इवान राणा, लखु, मानसिंह, मोटू, सोनू गुप्ता, छोटू कारंगा, ज्ञान पैकरा, महेंद्र, सोनी, कोंदा आदि लोगो का अहम योगदान रहा।

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