’18 से पहले नहीं स्टीयरिंग’… नारायणपुर पुलिस ने बच्चों को पढ़ाया सड़क सुरक्षा का पाठ
विद्यालयों में यातायात जागरूकता अभियान, गोल्डन ऑवर, राहवीर योजना, पीएम-राहत, हेलमेट-सीट बेल्ट और डायल-112 की दी जानकारी • विद्यार्थियों से कहा- पहले खुद नियम मानें, फिर परिवार को करें जागरूक

नारायणपुर, 05 अगस्त। सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने और नई पीढ़ी में यातायात नियमों के प्रति जिम्मेदारी का भाव विकसित करने के उद्देश्य से नारायणपुर पुलिस ने मंगलवार को सरस्वती शिशु मंदिर कुम्हारपारा एवं बालक उच्चतर प्राथमिक विद्यालय में विशेष यातायात जागरूकता कक्षाओं का आयोजन किया। दृश्य-श्रव्य माध्यमों और व्यवहारिक उदाहरणों के जरिए विद्यार्थियों को सड़क सुरक्षा के महत्वपूर्ण नियमों से अवगत कराया गया। साथ ही उन्हें सुरक्षित नागरिक बनने और अपने परिवार को भी यातायात नियमों का पालन कराने का संदेश दिया गया।
पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार पटेल के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ऐश्वर्य चंद्राकर तथा एसडीओपी अजय कुमार के मार्गदर्शन में संचालित अभियान के तहत आयोजित कार्यक्रम में यातायात प्रभारी (रक्षित निरीक्षक) मोहसिन खान एवं यातायात शाखा के अधिकारियों-कर्मचारियों ने विद्यालयों के प्राचार्यों, शिक्षकों और छात्र-छात्राओं को सड़क सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी।
कार्यक्रम के दौरान प्रोजेक्टर एवं दृश्य-श्रव्य प्रस्तुति के माध्यम से विद्यार्थियों को बताया गया कि सड़क पर चलते समय यातायात संकेतों का पालन, निर्धारित गति सीमा का अनुपालन तथा सावधानीपूर्वक वाहन संचालन ही दुर्घटनाओं से बचने का सबसे प्रभावी उपाय है। अधिकारियों ने विद्यार्थियों को हेलमेट और सीट बेल्ट के महत्व को व्यवहारिक उदाहरणों के साथ समझाया।
18 वर्ष से कम उम्र में वाहन चलाना कानूनन अपराध
जागरूकता कक्षा में विद्यार्थियों को स्पष्ट रूप से बताया गया कि 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों द्वारा मोटर वाहन चलाना कानूनन प्रतिबंधित है। अधिकारियों ने कहा कि कम उम्र में वाहन चलाना न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि स्वयं और दूसरों के जीवन को भी गंभीर खतरे में डालता है। विद्यार्थियों से आग्रह किया गया कि वे स्वयं नियमों का पालन करें और अपने माता-पिता व परिजनों को भी यातायात नियमों के प्रति जागरूक करें।
हेलमेट और सीट बेल्ट ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच
कार्यक्रम में दोपहिया वाहन चलाते समय आईएसआई मार्क हेलमेट पहनने, चारपहिया वाहन में सीट बेल्ट लगाने, वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का उपयोग नहीं करने, नशे की हालत में वाहन नहीं चलाने तथा सभी यातायात संकेतों और नियमों का पालन करने की अपील की गई। अधिकारियों ने कहा कि छोटी-सी लापरवाही भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
गोल्डन ऑवर बचा सकता है जिंदगी
विद्यार्थियों को सड़क दुर्घटनाओं के दौरान गोल्डन ऑवर के महत्व की जानकारी देते हुए बताया गया कि दुर्घटना के बाद का पहला एक घंटा सबसे महत्वपूर्ण होता है। यदि घायल व्यक्ति को इस दौरान समय पर चिकित्सा सुविधा मिल जाए तो उसकी जान बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
राहवीर को मिलेगा ₹25 हजार, घायल का होगा कैशलेस इलाज
जागरूकता कार्यक्रम में विद्यार्थियों को बताया गया कि राहवीर (Good Samaritan) योजना के तहत सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति की मदद करने वाले नागरिक को शासन की ओर से 25 हजार रुपए तक की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है। वहीं पीएम-राहत योजना के माध्यम से सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को 1.50 लाख रुपए तक कैशलेस उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। आपात स्थिति में तत्काल डायल-112 पर सूचना देकर पुलिस और अन्य सहायता प्राप्त करने की जानकारी भी दी गई।
दिलाई सड़क सुरक्षा की शपथ
कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों को सड़क सुरक्षा की शपथ दिलाई गई। उन्हें बताया गया कि यातायात नियमों का पालन केवल कानूनी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि स्वयं, परिवार और समाज की सुरक्षा से जुड़ा नैतिक दायित्व भी है। विद्यार्थियों से सड़क सुरक्षा का संदेश घर-घर तक पहुंचाने का आह्वान किया गया।
पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार पटेल ने बताया कि जिले के विभिन्न विद्यालयों एवं सार्वजनिक स्थलों पर भविष्य में भी इसी प्रकार के सड़क सुरक्षा एवं यातायात जागरूकता कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक नागरिकों को जागरूक कर सड़क दुर्घटनाओं में प्रभावी कमी लाई जा सके।
विद्यार्थियों को दिए गए सुरक्षा के 7 सूत्र
- 18 वर्ष से पहले वाहन नहीं चलाएं।
- दोपहिया पर हमेशा आईएसआई हेलमेट पहनें।
- चारपहिया में सीट बेल्ट अनिवार्य रूप से लगाएं।
- वाहन चलाते समय मोबाइल का उपयोग न करें।
- नशे की हालत में कभी वाहन न चलाएं।
- दुर्घटना होने पर तुरंत डायल-112 पर सूचना दें।
- गोल्डन ऑवर में घायल को तत्काल अस्पताल पहुंचाएं।




