नारायणपुर के बांस शिल्प को मिलेगी नई उड़ान, ब्रांडिंग और बाजार से बढ़ेगी शिल्पकारों की आमदनी
हस्तशिल्प विकास बोर्ड अध्यक्ष शालिनी राजपूत ने बांस शिल्प केंद्र का किया निरीक्षण, शिल्पकारों से संवाद कर सुनी समस्याएं • आधुनिक डिज़ाइन, प्रशिक्षण और शबरी एम्पोरियम के जरिए देश-विदेश के बाजारों तक पहुंचाने की रणनीति

नारायणपुर। बस्तर की पारंपरिक बांस कला को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में राज्य सरकार ने कदम तेज कर दिए हैं। छत्तीसगढ़ राज्य हस्तशिल्प विकास बोर्ड की अध्यक्ष शालिनी राजपूत ने शुक्रवार को नारायणपुर स्थित बांस शिल्प केंद्र का निरीक्षण कर शिल्पकारों से सीधा संवाद किया। उन्होंने शिल्पकारों की समस्याएं सुनीं और संबंधित अधिकारियों को उनके त्वरित एवं प्रभावी निराकरण के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरकार का लक्ष्य केवल पारंपरिक हस्तशिल्प को संरक्षित करना नहीं, बल्कि उसे आधुनिक बाजार से जोड़कर शिल्पकारों की आय बढ़ाना भी है।

निरीक्षण के दौरान बोर्ड अध्यक्ष ने प्रशिक्षण गतिविधियों, उत्पादन प्रक्रिया, तैयार उत्पादों की गुणवत्ता और उपलब्ध संसाधनों का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि नारायणपुर का बांस शिल्प अपनी विशिष्ट पहचान रखता है और इसे देश-विदेश के बाजारों तक पहुंचाने के लिए सरकार योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर रही है।
ब्रांडिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग पर रहेगा विशेष जोर
शालिनी राजपूत ने कहा कि हस्तशिल्प विकास बोर्ड शिल्पकारों के उत्पादों की ब्रांडिंग, आकर्षक पैकेजिंग और प्रभावी विपणन पर विशेष फोकस कर रहा है। सरकार चाहती है कि प्रदेश के हस्तशिल्प उत्पाद बड़े बाजारों तक पहुंचें, जिससे शिल्पकारों को उनके श्रम का उचित मूल्य मिले और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो।
उन्होंने शिल्पकारों से समय की मांग के अनुरूप नए डिज़ाइन और उपयोगी बांस उत्पाद विकसित करने का आह्वान करते हुए कहा कि शबरी एम्पोरियम को स्थानीय उत्पादों के विपणन का सशक्त मंच बनाया जा रहा है। इससे शिल्पकारों को स्थायी बाजार और रोजगार के नए अवसर उपलब्ध होंगे।
युवा और महिलाओं को जोड़ने पर रहेगा जोर
बोर्ड अध्यक्ष ने कहा कि बांस शिल्प जैसी पारंपरिक कला को नई पीढ़ी तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है। इसके लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों का विस्तार किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक युवा और महिलाएं इस क्षेत्र से जुड़ सकें। उन्होंने कहा कि इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत भी सुरक्षित रहेगी।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रशिक्षण कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी बनाया जाए, आधुनिक तकनीकों को शामिल किया जाए तथा शिल्पकारों की जरूरतों के अनुरूप हरसंभव सहयोग उपलब्ध कराया जाए। साथ ही उत्पादों की गुणवत्ता, डिज़ाइन नवाचार और विपणन व्यवस्था को और सुदृढ़ करने पर बल दिया।
शिल्पकारों के हुनर की सराहना
शालिनी राजपूत ने बांस शिल्प केंद्र में तैयार किए जा रहे उत्पादों की सराहना करते हुए कहा कि नारायणपुर के शिल्पकारों की कला प्रदेश की धरोहर है। इसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच दिलाने के लिए हस्तशिल्प विकास बोर्ड पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करेगा।
निरीक्षण के दौरान जनपद पंचायत अध्यक्ष पिंकी उसेंडी, सरपंच संध्या पवार, पार्षद रमशीला नाग एवं संगीता जैन, जिला पंचायत सदस्य शांति नेताम और रानो पोटाई, एसडीएम अभयजीत मंडावी, बांस शिल्प केंद्र के प्रबंधक आर.आर. भगत, जनप्रतिनिधि, अधिकारी, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में शिल्पकार उपस्थित रहे।




