बंदूक नहीं, बाइक लेकर निकले जवान… गर्भवती को पहुंचाया अस्पताल
अबूझमाड़ में फिर दिखी पुलिस की संवेदना; कुड़मेल के दुर्गम रास्तों से डीआरजी जवानों ने गर्भवती महिला को बाइक से सुरक्षित पहुंचाया ओरछा

सूचना मिलते ही बिना देर किए मदद को पहुंचे जवान, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कराया भर्ती; एसपी संदीप पटेल ने कहा—सुरक्षा के साथ ग्रामीणों की मदद भी हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी
(कैलाश सोनी) नारायणपुर। अबूझमाड़ की दुर्गम पहाड़ियों और पहुंचविहीन इलाकों में जहां सामान्य परिस्थितियों में आवागमन भी चुनौती बना रहता है, वहीं नारायणपुर पुलिस के जवानों ने एक बार फिर मानवीय संवेदना और कर्तव्यनिष्ठा की मिसाल पेश की है। ग्राम कुड़मेल में एक गर्भवती महिला को तत्काल अस्पताल पहुंचाने की जरूरत की सूचना मिलते ही डीआरजी जवान मदद के लिए निकल पड़े। कठिन रास्तों और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के बीच जवानों ने महिला को बाइक से सुरक्षित निकालकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, ओरछा पहुंचाया, जहां उसे भर्ती कर आवश्यक चिकित्सकीय उपचार उपलब्ध कराया गया।

सूचना मिली तो बिना देर किए निकले जवान
कुड़मेल कैंप में सूचना मिली कि गांव की एक गर्भवती महिला को तत्काल चिकित्सकीय सहायता की जरूरत है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डीआरजी जवानों ने बिना किसी देरी के मदद के लिए कदम बढ़ाया।

अबूझमाड़ की भौगोलिक परिस्थितियां आसान नहीं हैं। दुर्गम रास्तों और सीमित आवागमन के बीच जवानों ने बाइक के माध्यम से महिला को सुरक्षित बाहर निकाला और ओरछा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाया।
दुर्गम रास्तों में बाइक बनी सहारा
अस्पताल तक पहुंचने के रास्ते में आने वाली कठिनाइयों के बावजूद जवानों ने महिला को सुरक्षित तरीके से स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाया। अस्पताल में भर्ती कराने के बाद महिला को आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई।
इस पूरे मानवीय प्रयास में प्रधान आरक्षक बोमडू राम वेजाम, बस्तर फाइटर आरक्षक रामलाल शोरी और बस्तर फाइटर आरक्षक सुरेश बेलसरिया की अहम भूमिका रही।
एसपी बोले—सुरक्षा के साथ मदद भी जिम्मेदारी
पुलिस अधीक्षक संदीप पटेल (भा.पु.से.) ने डीआरजी जवानों की तत्परता और संवेदनशीलता की सराहना की। उन्होंने कहा कि अबूझमाड़ जैसे दुर्गम क्षेत्र में पुलिस की जिम्मेदारी केवल सुरक्षा और कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं है। जरूरत के समय ग्रामीणों की सहायता करना और उनके जीवन की रक्षा के लिए हरसंभव प्रयास करना भी पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि गर्भवती महिला को समय पर अस्पताल पहुंचाना पुलिस की तत्परता, संवेदनशीलता और मानवीय प्रतिबद्धता का उदाहरण है। नारायणपुर पुलिस अबूझमाड़ के प्रत्येक ग्रामीण तक सुरक्षा, सहयोग और विश्वास पहुंचाने के लिए सदैव तत्पर है।
‘सुरक्षा के साथ संवेदना भी’
अबूझमाड़ के दुर्गम इलाकों में पुलिस जवानों की इस तरह की पहल ग्रामीणों के बीच पुलिस के प्रति भरोसा मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रही है। सुरक्षा व्यवस्था के साथ आपात स्थिति में ग्रामीणों की मदद के लिए आगे आना पुलिस और ग्रामीणों के बीच विश्वास की नई तस्वीर पेश कर रहा है।
नारायणपुर पुलिस का कहना है कि उसका संकल्प अबूझमाड़ के अंतिम छोर तक सुरक्षा, सहयोग और मानवीय संवेदना पहुंचाना है।




