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‘कांकेयर’ बना ग्रामीण महिलाओं की नई पहचान, जैविक उत्पादों ने बाजार में बनाई मजबूत साख

बिहान की महिलाओं की मेहनत रंग लाई, सरसों तेल से लेकर शहद और छिंद गुड़ तक शुद्ध उत्पादों की बढ़ी मांग; आत्मनिर्भरता का नया मॉडल बन रहा कांकेर

रायपुर/कांकेर। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के तहत महिला स्वसहायता समूहों की मेहनत अब सफलता की नई कहानी लिख रही है। कांकेर जिले का ‘कांकेयर’ ब्रांड आज केवल जैविक उत्पादों का नाम नहीं, बल्कि हजारों ग्रामीण महिलाओं की आत्मनिर्भरता, गुणवत्तापूर्ण उत्पादन और आर्थिक सशक्तीकरण की पहचान बन चुका है। शुद्ध एवं प्राकृतिक उत्पादों की बढ़ती मांग ने इस ब्रांड को स्थानीय बाजारों से लेकर ऑनलाइन मंच तक विशेष पहचान दिलाई है।

‘कांकेयर’ ब्रांड के तहत तैयार किए जा रहे सरसों तेल, अरहर दाल, छिंद गुड़, शहद, रागी, कोदो, मक्का तथा आम का अचार जैसे उत्पाद उपभोक्ताओं की पहली पसंद बनते जा रहे हैं। दण्डकारण्य अंचल की प्राकृतिक परिस्थितियों में तैयार इन उत्पादों की खासियत यह है कि इन्हें पारंपरिक एवं जैविक पद्धति से तैयार किया जाता है और इनमें रासायनिक उर्वरकों का उपयोग नहीं किया जाता।

गुणवत्ता से बढ़ा भरोसा, बाजार में बनी अलग पहचान

स्वसहायता समूहों द्वारा तैयार किए जाने वाले सभी उत्पाद एफएसएसएआई (FSSAI) से पंजीकृत हैं, जिससे उनकी गुणवत्ता और शुद्धता पर उपभोक्ताओं का भरोसा लगातार मजबूत हो रहा है। यही वजह है कि जैविक खाद्य पदार्थों की बढ़ती मांग के बीच ‘कांकेयर’ ब्रांड तेजी से अपनी अलग पहचान स्थापित कर रहा है।

सी-मार्ट से ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तक पहुंच

‘कांकेयर’ उत्पादों की बिक्री वर्तमान में सी-मार्ट तथा कांकेश्वरी एफपीसी के माध्यम से स्थानीय बाजारों में की जा रही है। वहीं जिला पंचायत परिसर स्थित पैकेजिंग इकाई से थोक खरीदी की सुविधा भी उपलब्ध है। इसके अलावा ऑनलाइन माध्यम से भी उपभोक्ता घर बैठे इन उत्पादों की खरीदारी कर सकते हैं, जिससे ग्रामीण उत्पादों को व्यापक बाजार मिल रहा है।

बिक्री के आंकड़े भी दे रहे सफलता की गवाही

जिला पंचायत के अनुसार अब तक ‘कांकेयर’ ब्रांड के तहत—

  • 92 किलोग्राम अरहर दाल
  • 5.5 किलोग्राम शहद
  • 5 किलोग्राम छिंद गुड़
  • 9 किलोग्राम रागी आटा
  • 6 किलोग्राम मक्का आटा

की बिक्री हो चुकी है। लगातार बढ़ती मांग इस बात का संकेत है कि उपभोक्ता अब शुद्ध, प्राकृतिक और जैविक उत्पादों को प्राथमिकता दे रहे हैं।

महिलाओं के सशक्तीकरण का बना प्रतीक

‘कांकेयर’ ब्रांड ने ग्रामीण महिलाओं को केवल रोजगार ही नहीं दिया, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भरता और आर्थिक मजबूती का नया आधार भी प्रदान किया है। महिला स्वसहायता समूहों की यह पहल स्थानीय संसाधनों को मूल्य संवर्धन के साथ बाजार तक पहुंचाने का सफल मॉडल बनकर उभरी है। इससे महिलाओं की आय में वृद्धि के साथ-साथ उनके आत्मविश्वास और सामाजिक भागीदारी को भी नई पहचान मिली है।

एक नजर में

  • बिहान के महिला स्वसहायता समूहों का ‘कांकेयर’ ब्रांड चर्चा में
  • शुद्ध जैविक उत्पादों की बाजार में लगातार बढ़ रही मांग
  • सरसों तेल, अरहर दाल, शहद, छिंद गुड़, रागी, कोदो व मक्का सहित कई उत्पाद उपलब्ध
  • एफएसएसएआई पंजीकृत उत्पादों ने जीता उपभोक्ताओं का भरोसा
  • सी-मार्ट, कांकेश्वरी एफपीसी और ऑनलाइन माध्यम से हो रही बिक्री
  • ग्रामीण महिलाओं की आत्मनिर्भरता और आर्थिक सशक्तीकरण का सफल मॉडल

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