अबूझमाड़ में बैंकिंग क्रांति की दस्तक: हर ग्राम पंचायत में होंगी बैंक सखियां
दूरस्थ गांवों तक पहुंचेगी बैंकिंग सुविधा, महिलाओं को मिलेगा रोजगार और ग्रामीणों को गांव में ही नकद लेन-देन की सुविधा

नारायणपुर। अबूझमाड़ के दुर्गम और वनांचल क्षेत्रों में अब बैंकिंग सेवाओं की पहुंच आसान होने जा रही है। कलेक्टर नम्रता जैन के निर्देश पर जिले की सभी ग्राम पंचायतों में चरणबद्ध तरीके से बैंक सखी तैयार करने की महत्वाकांक्षी पहल शुरू की गई है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के तहत ओरछा विकासखंड की महिलाओं को एसबीआई-आरसेटीआई में विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि वे अपने-अपने गांवों में बैंक की अधिकृत बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट (बीसी) के रूप में ग्रामीणों को बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध करा सकें।

09 से 16 जुलाई तक चल रहे इस प्रशिक्षण में अबूझमाड़ के दूरस्थ और अंदरूनी इलाकों की महिलाओं को आधुनिक बैंकिंग व्यवस्था, डिजिटल भुगतान और वित्तीय लेन-देन की व्यवहारिक जानकारी दी जा रही है। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद ये महिलाएं अपने गांवों में ही ग्रामीणों के लिए बैंकिंग सुविधा का माध्यम बनेंगी।
गांव में ही मिलेंगी बैंकिंग सुविधाएं
बैंक सखी बनने वाली महिलाएं माइक्रो-एटीएम और डिजिटल उपकरणों के जरिए बैंक खाता खोलना, नकद जमा-निकासी, आधार सक्षम भुगतान प्रणाली (एईपीएस) से लेन-देन, राशि भेजना एवं प्राप्त करना, बैंक खाते का बैलेंस बताना तथा विभिन्न शासकीय योजनाओं की राशि निकालने जैसी सुविधाएं ग्रामीणों को उपलब्ध कराएंगी। इससे लोगों को छोटी-छोटी बैंकिंग जरूरतों के लिए कई किलोमीटर दूर बैंक शाखाओं तक नहीं जाना पड़ेगा।
महिलाओं को मिलेगा स्वरोजगार, बढ़ेगा वित्तीय समावेशन
प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को बैंक सखी की जिम्मेदारियों के साथ वित्तीय साक्षरता और डिजिटल बैंकिंग का गहन अभ्यास कराया जा रहा है। इस पहल से एक ओर महिलाओं को स्थायी आजीविका और स्वरोजगार का अवसर मिलेगा, वहीं दूसरी ओर अबूझमाड़ के दुर्गम क्षेत्रों में वित्तीय समावेशन को नई मजबूती मिलेगी।
ग्रामीणों का समय और धन दोनों बचेंगे
बिहान योजना के अधिकारियों के अनुसार प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद बैंक सखियां अपनी-अपनी ग्राम पंचायतों में नियमित रूप से बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराएंगी। इससे ग्रामीणों को बैंक शाखाओं तक लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी, समय और परिवहन खर्च दोनों की बचत होगी। साथ ही शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी सीधे और आसानी से अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सकेगा।
दृष्टि
अबूझमाड़ जैसे दुर्गम अंचल में प्रत्येक ग्राम पंचायत तक बैंक सखी की तैनाती केवल बैंकिंग सुविधा का विस्तार नहीं, बल्कि महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण, डिजिटल भारत और ग्रामीण विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह पहल गांवों में वित्तीय आत्मनिर्भरता का नया अध्याय लिखने की तैयारी है।




