“चंदा के चकोर” नाटक ने बांधा समां
नितारा एवं राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के सहयोग से मंचन, आदिवासी संस्कृति और सामाजिक बदलाव की दिखी जीवंत झलक

नारायणपुर। जिला प्रशासन नारायणपुर एवं राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी), नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में “नितारा” थिएटर कार्यशाला के अंतर्गत एजी सिनेमा हॉल में “चंदा के चकोर” नाटक का भव्य मंचन किया गया। प्रस्तुति में आदिवासी संस्कृति, लोकजीवन, परंपराओं तथा गांव के विकास से लेकर लोकतांत्रिक व्यवस्था तक की यात्रा को प्रभावशाली ढंग से दर्शाया गया।
कलेक्टर नम्रता जैन ने बताया कि जनजातीय, दूरस्थ एवं नक्सल पुनर्वासित युवा-युवतियों के समग्र विकास, सांस्कृतिक सशक्तिकरण एवं आजीविका संवर्धन के उद्देश्य से राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के सहयोग से 30 दिवसीय प्रस्तुति आधारित थिएटर प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई थी। इसी कार्यशाला के तहत “चंदा के चकोर” नाटक का मंचन किया गया।
नाटक की कहानी अबूझमाड़ के एक अविकसित गांव की पृष्ठभूमि पर आधारित रही। इसमें चंदा और चकोर की कहानी के माध्यम से आदिवासी देवी-देवताओं में आस्था, शादी-विवाह की परंपराएं, मेला-मड़ई, पारंपरिक वेशभूषा, लोकगीत एवं जनजातीय रहन-सहन का जीवंत चित्रण किया गया। कलाकारों ने शिक्षा, सामाजिक परिवर्तन, गांव के विकास एवं लोकतांत्रिक व्यवस्था की महत्ता को भी प्रभावशाली तरीके से मंच पर उतारा।
नाटक का मंचन नक्सल पुनर्वासित युवा-युवतियों एवं स्थानीय कलाकारों द्वारा किया गया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। कार्यक्रम के अंत में जिला पंचायत अध्यक्ष नारायण मरकाम ने कलाकारों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि ऐसी प्रस्तुतियां जनजातीय संस्कृति को संरक्षित करने के साथ समाज में सकारात्मक बदलाव का संदेश देती हैं। उन्होंने प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे कलाकारों के उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं भी दीं।
इस अवसर पर नाटक के निर्देशक हीरा मानिकपुरी, लोक गायिका गरिमा दिवाकर, पार्षद संजय नदी, रमशिला नाग, जिला पंचायत सदस्य संतनाथ उसेंडी, अपर कलेक्टर बीरेंद्र बहादुर पंचभाई, एसडीएम अभयजीत मंडावी, जनपद सीईओ सुनील सोनपिपरे, सहायक आयुक्त आदिवासी विकास डॉ. राजेंद्र सिंह सहित जिला स्तरीय अधिकारी एवं बड़ी संख्या में नगरवासी उपस्थित रहे।




