अबूझमाड़ में बदली तस्वीर: नक्सल साये से निकल विकास की राह पर थुलथुली
चार दशकों की वीरानी के बाद गांव तक पहुंचा राशन, 22 किमी पैदल सफर की मजबूरी खत्म

सरकार की मंशा, प्रशासन की सक्रियता और ग्रामीणों की जरूरतों का मिला संगम
(कैलाश सोनी) नारायणपुर, 11 अप्रैल 2026। कभी नक्सलवाद की छाया में दशकों तक सिमटा और विकास से दूर रहा अबूझमाड़ अब बदलती तस्वीर के साथ नई कहानी लिख रहा है। बस्तर के इस संवेदनशील अंचल में, जहां वर्षों तक भय, असुरक्षा और प्रशासनिक पहुंच का अभाव रहा, वहां अब विकास की आहट स्पष्ट सुनाई देने लगी है। नारायणपुर जिले के ओरछा विकासखंड अंतर्गत थुलथुली ग्राम पंचायत इसका ताजा उदाहरण बनकर उभरा है, जहां पहली बार गांव तक राशन पहुंचाकर वितरण शुरू किया गया है।
चार दशकों तक नक्सली प्रभाव के कारण यह क्षेत्र लगभग वीरान और प्रशासनिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील बना रहा। नतीजतन, यहां के ग्रामीण बुनियादी सुविधाओं से भी वंचित रहे। लेकिन अब नक्सलवाद के क्षरण और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने के बाद प्रशासन ने अपनी पहुंच बढ़ाई है, जिससे ग्रामीणों के जीवन में ठोस बदलाव दिखाई देने लगा है।

22 किलोमीटर की मजबूरी खत्म, गांव में ही मिला हक का राशन
थुलथुली के ग्रामीणों के लिए राशन प्राप्त करना कभी आसान नहीं था। उन्हें सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत मिलने वाला खाद्यान्न लेने के लिए लगभग 22 किलोमीटर दूर ओरछा तक पैदल सफर करना पड़ता था। यह सफर न केवल कठिन था, बल्कि कई बार जोखिम भरा भी साबित होता था।
बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांगजनों के लिए यह दूरी तय करना अत्यंत कष्टदायक था। कई बार लोग अपनी जरूरत के बावजूद राशन लेने नहीं जा पाते थे, जिससे खाद्य सुरक्षा भी प्रभावित होती थी। लेकिन अब यह समस्या पूरी तरह समाप्त हो गई है।
जिला प्रशासन की पहल से अब खाद्यान्न सीधे गांव तक पहुंचाया जा रहा है। ट्रैक्टरों के माध्यम से दुर्गम रास्तों को पार करते हुए राशन थुलथुली तक पहुंचा, जहां ग्रामीणों को उनके गांव में ही वितरण किया गया।

‘चावल उत्सव’ बना बदलाव का प्रतीक
कलेक्टर नम्रता जैन के निर्देशन में थुलथुली में विशेष अभियान चलाकर ‘चावल उत्सव’ का आयोजन किया गया। इस आयोजन के माध्यम से ग्रामीणों को उनके गांव में ही राशन उपलब्ध कराया गया, जो इस क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक पहल मानी जा रही है।
जिला खाद्य अधिकारी अलाउद्दीन खान ने बताया कि खाद्य विभाग द्वारा विशेष रणनीति के तहत ट्रैक्टरों से खाद्यान्न को दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंचाया गया और गांव में ही वितरण सुनिश्चित किया गया। यह व्यवस्था भविष्य में भी नियमित रूप से जारी रखने की योजना है।
सरकार की मंशा: अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे योजनाओं का लाभ
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की प्राथमिकता स्पष्ट है—अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना। अबूझमाड़ जैसे क्षेत्रों में यह चुनौती और भी बड़ी थी, लेकिन प्रशासनिक इच्छाशक्ति और सुरक्षा बलों की सक्रियता ने इसे संभव बना दिया है।
सरकार की मंशा केवल योजनाएं बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें जमीन पर उतारकर वास्तविक लाभ दिलाना है। थुलथुली में शुरू हुई यह राशन वितरण व्यवस्था इसी सोच का परिणाम है, जहां ग्रामीणों की मूलभूत आवश्यकता—खाद्य सुरक्षा—को प्राथमिकता दी गई।
प्रशासन की सक्रियता: दुर्गम को बनाया सुगम
अबूझमाड़ का भौगोलिक स्वरूप हमेशा से चुनौतीपूर्ण रहा है। घने जंगल, कच्चे रास्ते और संचार की कमी ने प्रशासन के लिए यहां काम करना कठिन बना दिया था। लेकिन अब हालात बदल रहे हैं।
नारायणपुर जिला प्रशासन ने योजनाबद्ध तरीके से इन चुनौतियों का सामना किया है। सुरक्षा बलों की मदद से क्षेत्र में पहुंच सुनिश्चित की गई और फिर वहां आवश्यक सुविधाएं पहुंचाने का कार्य शुरू किया गया।
राशन वितरण की यह पहल केवल एक सेवा नहीं, बल्कि प्रशासन की उस प्रतिबद्धता का प्रमाण है, जिसमें वह दुर्गम को भी सुगम बनाने के लिए लगातार प्रयासरत है।
ग्रामीणों की जरूरत बनी प्राथमिकता
इस पूरी पहल की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसमें ग्रामीणों की वास्तविक जरूरतों को केंद्र में रखा गया है। वर्षों से जो समस्या लोगों को परेशान कर रही थी, उसे समझकर उसका स्थायी समाधान निकाला गया।
गांव में ही राशन मिलने से अब—
- समय की बचत हो रही है
- श्रम और शारीरिक कष्ट कम हुआ है
- आर्थिक खर्च में कमी आई है
- खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित हुई है
ग्रामीणों ने प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अब उनका जीवन पहले से अधिक आसान और सुरक्षित हो गया है।
नक्सलवाद के बाद बढ़ी प्रशासनिक पहुंच
अबूझमाड़ क्षेत्र लंबे समय तक नक्सल गतिविधियों का गढ़ रहा, जिसके कारण यहां प्रशासनिक पहुंच बेहद सीमित थी। गांवों तक पहुंचना जोखिम भरा था और कई बार संभव भी नहीं हो पाता था।
लेकिन पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षा बलों की निरंतर कार्रवाई और रणनीतिक प्रयासों से नक्सलवाद का प्रभाव कमजोर हुआ है। इसके परिणामस्वरूप अब प्रशासन बिना बाधा के इन क्षेत्रों तक पहुंच पा रहा है।
थुलथुली में राशन वितरण की शुरुआत इस बात का संकेत है कि अबूझमाड़ में भय का माहौल खत्म हो रहा है और विकास की राह खुल रही है।
बदलाव की बयार: वीरान से जीवंत होता इलाका
चार दशकों तक वीरान और संवेदनशील रहा यह इलाका अब धीरे-धीरे जीवंत हो रहा है। गांवों में चहल-पहल बढ़ रही है, लोग खुलकर अपनी जरूरतें बता रहे हैं और प्रशासन उन जरूरतों को पूरा करने में जुटा है।
सड़कों, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और खाद्य सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं की पहुंच बढ़ने से यहां के लोगों के जीवन स्तर में सुधार हो रहा है।
आगे की राह: विकास को मिलेगी रफ्तार
थुलथुली में शुरू हुई यह पहल केवल शुरुआत है। प्रशासन का लक्ष्य है कि अबूझमाड़ के अन्य दूरस्थ गांवों तक भी इसी तरह सुविधाएं पहुंचाई जाएं।
योजनाएं बनाई जा रही हैं कि—
- सभी पंचायतों में नियमित राशन वितरण सुनिश्चित हो
- सड़क और संचार व्यवस्था को और मजबूत किया जाए
- स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाओं का विस्तार किया जाए
अबूझमाड़ की नई पहचान
अबूझमाड़, जो कभी नक्सलवाद और वीरानी के लिए जाना जाता था, अब विकास, विश्वास और बदलाव की नई पहचान बना रहा है। थुलथुली गांव की यह कहानी केवल एक गांव की नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र में आ रहे सकारात्मक परिवर्तन की झलक है।
सरकार की मंशा, प्रशासन की सक्रियता और ग्रामीणों की जरूरतों का यह संगम आने वाले समय में अबूझमाड़ को पूरी तरह बदलने की दिशा में एक मजबूत कदम साबित होगा।




