अबूझमाड़ के आश्रम ने रचा सफलता का नया इतिहास
नवोदय चयन परीक्षा में 3 छात्र सफल, 2012 से अब तक 69 विद्यार्थियों का चयन दूरस्थ अंचल में मेहनत, नवाचार और मार्गदर्शन से निखर रही प्रतिभाएं

(कैलाश सोनी) नारायणपुर, 09 अप्रैल 2026। घने जंगलों और दुर्गम परिस्थितियों से घिरे अबूझमाड़ से एक बार फिर प्रतिभा ने अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराई है। विकासखंड ओरछा के बालक आश्रम तोके के विद्यार्थियों ने जवाहर नवोदय विद्यालय चयन परीक्षा 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए सफलता का नया अध्याय रच दिया है। इस प्रतिष्ठित परीक्षा में आश्रम के तीन मेधावी छात्र—दिनेश कुमेटी, अंशुमान उसेंडी और इक्षित कुमार—का चयन हुआ है, जिससे पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर है।
जिले की कलेक्टर नम्रता जैन ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए चयनित विद्यार्थियों को बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने इसे अबूझमाड़ जैसे दूरस्थ क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि बताया।
आश्रम अधीक्षक बुधराम कुमेटी ने बताया कि सीमित संसाधनों और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद छात्रों ने जिस लगन और अनुशासन के साथ तैयारी की, उसका परिणाम आज सामने है। उन्होंने कहा कि यह सफलता न केवल चयनित छात्रों के जीवन को नई दिशा देगी, बल्कि क्षेत्र के अन्य विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेगी।
बालक आश्रम तोके की यह उपलब्धि कोई पहली नहीं है। वर्ष 2012 से लगातार नवाचार आधारित शैक्षणिक प्रयासों के चलते अब तक 69 छात्र विभिन्न प्रतिष्ठित परीक्षाओं—जवाहर नवोदय विद्यालय, पंडित जवाहरलाल उत्कर्ष चयन परीक्षा, एकलव्य आवासीय विद्यालय और प्रयास आवासीय विद्यालय—में चयनित हो चुके हैं। वर्तमान में भी यहां के कई छात्र प्रदेश के उत्कृष्ट शिक्षण संस्थानों में निःशुल्क शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, जिसका पूरा व्यय शासन द्वारा वहन किया जा रहा है।
इस सफलता के पीछे आश्रम में संचालित रात्रिकालीन कक्षाएं, स्मार्ट क्लास, शिक्षकों का निरंतर मार्गदर्शन और छात्रों की कड़ी मेहनत महत्वपूर्ण कारक रहे हैं। यहां विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद एवं अन्य सह-शैक्षणिक गतिविधियों में भी सक्रिय भागीदारी के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, जिससे उनका सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो सके।
उपलब्धि के इस अवसर पर आश्रम अधीक्षक द्वारा चयनित छात्रों को एजुकेशन किट प्रदान कर सम्मानित किया गया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई। अबूझमाड़ के इन होनहारों की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि अगर अवसर और सही मार्गदर्शन मिले, तो दूरस्थ अंचलों की प्रतिभाएं भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकती हैं।




