नारायणपुर

पेड़ की छांव में सत्ता का संवाद: मंत्री जमीन पर बैठे, ग्रामीणों ने खुलकर रखीं बात

‘गांव चलो–बस्ती चलो’ अभियान में दुग्गाबैंगाल पहुंचा शासन, विकास की नई तस्वीर उभरती दिखी

रिपोर्ट | नारायणपुर (दुग्गाबैंगाल)

नक्सल प्रभावित अंचल में सड़कों का जाल, संस्कृति और विकास दोनों पर जोर…

(कैलाश सोनी) नारायणपुर। आमतौर पर सरकारी कार्यक्रम मंच, माइक और औपचारिक भाषणों तक सीमित रहते हैं, लेकिन दुग्गाबैंगाल में कुछ अलग ही नजारा देखने को मिला। गांव के बीचों-बीच एक आम के पेड़ की छांव तले मंत्री केदार कश्यप जमीन पर बैठकर ग्रामीणों से सीधे संवाद करते नजर आए। न कोई औपचारिकता, न दूरी—बस सहज बातचीत और गांव की असल समस्याओं पर खुली चर्चा।

भारतीय जनता पार्टी के स्थापना दिवस के तहत चलाए जा रहे ‘गांव चलो–बस्ती चलो’ अभियान के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम में स्थानीय ग्रामीणों की बड़ी भागीदारी रही। दूरस्थ इलाकों से पहुंचे लोग अपने-अपने मुद्दे और उम्मीदें लेकर आए थे। मंत्री ने एक-एक कर सभी की बातें सुनीं और कई मांगों पर मौके पर ही पहल का भरोसा दिलाया।

जमीन पर बैठा संवाद बना चर्चा का केंद्र

कार्यक्रम की सबसे खास बात यह रही कि मंत्री ने मंच की बजाय ग्रामीणों के बीच जमीन पर बैठकर संवाद किया। आम के पेड़ की छांव में बैठे इस दृश्य ने पूरे आयोजन को अलग पहचान दी।

ग्रामीणों ने भी बिना किसी संकोच के अपनी समस्याएं रखीं—कहीं सड़क की मांग, तो कहीं पेयजल और शिक्षा सुविधाओं को लेकर सवाल उठे। मंत्री ने हर मुद्दे को गंभीरता से सुना और अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश देने की बात कही।

स्थानीय लोगों का कहना था कि इस तरह का सीधा संवाद पहली बार देखने को मिला, जिससे उन्हें अपनी बात रखने का वास्तविक मौका मिला।

“नारायणपुर बनेगा विकास और समृद्धि की पहचान”

ग्रामीणों को संबोधित करते हुए मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि आने वाले समय में नारायणपुर जिला विकास और समृद्धि की नई पहचान बनेगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए लगातार काम कर रही है।

उन्होंने कहा कि “अब समय बदल रहा है। जो इलाके कभी विकास से दूर थे, वहां आज सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य की सुविधाएं पहुंच रही हैं। नारायणपुर भी तेजी से इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है।”

नक्सल प्रभाव घटा, विकास को मिली रफ्तार

कार्यक्रम में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में आए बदलाव पर भी चर्चा हुई। मंत्री ने कहा कि सुरक्षा बलों के साहस और सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति के चलते अब हालात बदल रहे हैं।

उन्होंने बताया कि पहले जिन इलाकों में विकास कार्य करना मुश्किल था, वहां अब तेजी से सड़कें बन रही हैं और योजनाएं धरातल पर उतर रही हैं। नारायणपुर जिले में सड़कों का जाल बिछने से दूरस्थ गांवों तक पहुंच आसान हो रही है।

ग्रामीणों ने भी इस बदलाव को महसूस करने की बात कही। कई लोगों ने बताया कि अब पहले की तुलना में आवाजाही और सुविधाओं में सुधार हुआ है।

संस्कृति और परंपरा को बताया असली पहचान

अपने संबोधन में मंत्री ने विकास के साथ-साथ संस्कृति और परंपराओं के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि “हमारी संस्कृति ही हमारी असली पहचान और गौरव है। इसे सहेजकर रखना हम सभी की जिम्मेदारी है।”

उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे अपनी परंपराओं और मूल्यों को बनाए रखें, क्योंकि यही समाज को मजबूत बनाते हैं।

कार्यकर्ताओं का सम्मान, संगठन की ताकत पर जोर

कार्यक्रम के दौरान पार्टी के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं का सम्मान भी किया गया। उन्हें गमछा और श्रीफल भेंट कर उनके योगदान की सराहना की गई।

मंत्री ने कहा कि किसी भी संगठन की असली ताकत उसके समर्पित कार्यकर्ता होते हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं के योगदान को भाजपा के विस्तार और मजबूती का आधार बताया।

ग्रामीणों की मांगों पर त्वरित पहल का भरोसा

संवाद के दौरान ग्रामीणों ने सड़क, पानी, बिजली और अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी कई मांगें रखीं। मंत्री ने इन मांगों को गंभीरता से लेते हुए कहा कि प्राथमिकता के आधार पर इन पर काम किया जाएगा।

उन्होंने आश्वासन दिया कि क्षेत्र के सर्वांगीण विकास के लिए सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है और किसी भी गांव को पीछे नहीं छोड़ा जाएगा।

अभियान का उद्देश्य—गांव तक पहुंच, सीधे संवाद

‘गांव चलो–बस्ती चलो’ अभियान के तहत पार्टी और जनप्रतिनिधि सीधे गांवों में पहुंचकर लोगों से संवाद कर रहे हैं। इसका उद्देश्य न केवल संगठन को मजबूत करना है, बल्कि जमीनी स्तर पर समस्याओं को समझकर उनका समाधान करना भी है।

दुग्गाबैंगाल में आयोजित कार्यक्रम ने इस अभियान के उद्देश्य को साकार रूप में प्रस्तुत किया, जहां संवाद औपचारिकता से बाहर निकलकर वास्तविक बातचीत में बदलता दिखा।

ग्रामीणों में बढ़ी उम्मीदें

कार्यक्रम के बाद ग्रामीणों में नई उम्मीदें नजर आईं। कई लोगों ने कहा कि यदि इसी तरह सीधे संवाद होते रहे और समस्याओं का समाधान जमीन पर दिखा, तो क्षेत्र की तस्वीर बदल सकती है।

एक बुजुर्ग ग्रामीण ने कहा, “पहली बार लगा कि हमारी बात सीधे सुनी जा रही है, वरना हम तो सिर्फ सुनते ही थे।”


बदलते नारायणपुर की झलक

दुग्गाबैंगाल का यह आयोजन सिर्फ एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि बदलते नारायणपुर की झलक भी था। जहां कभी विकास की पहुंच सीमित थी, वहां अब संवाद, सड़क और योजनाओं की बात हो रही है।

पेड़ की छांव में बैठा यह संवाद इस बात का संकेत है कि अब शासन और ग्रामीणों के बीच की दूरी कम हो रही है।

दुग्गाबैंगाल में हुआ यह आयोजन कई मायनों में खास रहा। यहां न मंच की दूरी थी, न संवाद की औपचारिकता। जमीन पर बैठकर हुई बातचीत ने यह एहसास कराया कि अगर संवाद सच्चा हो, तो समाधान की राह भी आसान हो जाती है। अब देखना यह होगा कि इन वादों की गूंज जमीन पर कितनी जल्दी और प्रभावी रूप में नजर आती है।

अबूझमाड़ लाइव न्यूज़

अबूझमाड़ लाइव न्यूज़ पक्ष पर विपक्ष पर हर एक पक्ष पर निष्पक्ष बेबाक एवं धारदार पत्रकारिता के लिए संकल्पित है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

You cannot copy content of this page