चक्रिय निधि से महिलाओं को मिला आर्थिक संबल, स्वरोजगार से आत्मनिर्भरता की राह
10 महिला स्व सहायता समूहों को 37 लाख रुपए का ऋण; फूलझाड़ू, इमली प्रसंस्करण से लेकर मसाला निर्माण, बेकरी-किराना और कैंटीन संचालन तक आजीविका गतिविधियां

नारायणपुर। ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में वन विभाग की पहल अब परिणाम देने लगी है। नारायणपुर और ओरछा विकासखंड की महिला स्व सहायता समूहों को चक्रिय निधि के माध्यम से आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर उन्हें विभिन्न स्वरोजगार एवं आजीविका गतिविधियों से जोड़ा गया है। वर्ष 2026-27 में 10 महिला स्व सहायता समूहों को कुल 37 लाख रुपए का ऋण प्रदान किया गया है।

अबूझमाड़ क्षेत्र में नक्सलमुक्ति के बाद महिलाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें स्थायी आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। घरेलू कार्यों तक सीमित रहने वाली ग्रामीण महिलाओं को स्व सहायता समूहों के माध्यम से संगठित कर रोजगारोन्मुखी गतिविधियों से जोड़ा गया है। चक्रिय निधि के साथ प्रशिक्षण और संसाधनों की उपलब्धता ने महिलाओं को अपने स्तर पर छोटे-छोटे उद्यम शुरू करने का अवसर दिया है।
इन गतिविधियों से जुड़ी महिलाएं
चक्रिय निधि से लाभान्वित समूहों द्वारा फूलझाड़ू संग्रहण एवं प्रसंस्करण, इमली संग्रहण एवं प्रसंस्करण, माहुल पत्ते की खरीदी कर दोना-पत्तल निर्माण, कच्चे फूलझाड़ू का प्रसंस्करण, किराना स्टोर एवं कैंटीन संचालन, गृह उद्योग के तहत मसाला निर्माण, लघु वनोपज संग्रहण एवं प्रसंस्करण तथा बेकरी सह किराना एवं कैंटीन जैसी गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।
लाभान्वित समूहों में जगदम्बा, जय वाला कारयो, मां लक्ष्मी, मां शीतला, मां दंतेश्वरी, मां दुर्गा, मां सरस्वती, जय बिहान और मां अम्बे महिला स्व सहायता समूह सहित अन्य समूह शामिल हैं।
आय बढ़ी तो बदली परिवार की तस्वीर
स्वरोजगार से जुड़ने के बाद महिलाओं को नियमित आय का जरिया मिलने लगा है। इससे वे परिवार की आर्थिक जरूरतों में योगदान देने के साथ बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य पर भी बेहतर तरीके से ध्यान दे पा रही हैं। समूह आधारित गतिविधियों ने महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ उन्हें स्थानीय स्तर पर उद्यमिता की ओर भी अग्रसर किया है।
वन विभाग की यह पहल ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का प्रभावी उदाहरण बन रही है। वित्तीय सहयोग, प्रशिक्षण और संसाधन उपलब्ध होने पर महिलाएं न केवल अपने परिवार को आर्थिक रूप से मजबूत कर रही हैं, बल्कि भविष्य में स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।




