बारिश में बह गई पाइप पुलिया, 20 गांवों का संपर्क टूटा
गोटा बेनूर में तेज बहाव में बही कच्ची पुलिया; 6 गांवों के शिक्षकों का स्कूल पहुंचना मुश्किल, साप्ताहिक बाजार और स्वास्थ्य सुविधाओं पर भी असर

नारायणपुर। जिले में लगातार हो रही बारिश ने ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। जिला मुख्यालय से करीब 16 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत बावड़ी के आश्रित ग्राम गोटा बेनूर में रविवार रात हुई तेज बारिश के बाद करीब 15 से 20 गांवों को जोड़ने वाली पाइप नुमा कच्ची पुलिया पानी के तेज बहाव में बह गई। पुलिया बहने के बाद ग्रामीणों का मुख्य मार्ग से संपर्क बाधित हो गया है। इससे रोजमर्रा की जरूरतों के लिए करमरी साप्ताहिक बाजार जाने वाले ग्रामीणों के साथ-साथ स्कूल जाने वाले शिक्षक और अस्पताल पहुंचने वाले लोगों की परेशानी बढ़ गई है।

पानी के तेज बहाव में रातोंरात बह गई पुलिया
ग्रामीणों के अनुसार रविवार रात हुई झमाझम बारिश के बाद नदी-नाले उफान पर आ गए। गोटाबेनूर मार्ग पर बनाई गई पाइप नुमा कच्ची पुलिया तेज बहाव का दबाव नहीं झेल सकी और रात में ही बह गई। सुबह ग्रामीणों को इसकी जानकारी हुई तो आवागमन पूरी तरह बाधित मिला।
यह मार्ग आसपास के करीब 15 से 20 गांवों के लिए महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। पुलिया बह जाने के बाद ग्रामीणों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक आने-जाने में परेशानी हो रही है।
करमरी साप्ताहिक बाजार तक पहुंचना मुश्किल
इस मार्ग से आसपास के गांवों के लोग रोजमर्रा की जरूरतों और खरीदारी के लिए ग्राम करमरी में लगने वाले साप्ताहिक बाजार पहुंचते हैं। पुलिया बहने से बाजार तक पहुंचने का रास्ता प्रभावित हो गया है। ग्रामीणों को जरूरी सामान लेने के लिए वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे अतिरिक्त दूरी और समय दोनों बढ़ गए हैं।
6 गांवों के शिक्षकों का आवागमन प्रभावित
पुलिया बहने का असर शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक इस मार्ग से करीब छह गांवों के शिक्षक स्कूलों तक पहुंचते हैं। पुलिया बह जाने के कारण शिक्षकों का आवागमन प्रभावित हुआ है। यदि जल्द वैकल्पिक रास्ता नहीं बनाया गया तो स्कूलों में पढ़ाई भी प्रभावित होने की आशंका है।
अस्पताल पहुंचने में भी परेशानी
आवागमन बाधित होने का असर स्वास्थ्य सुविधाओं पर भी पड़ रहा है। ग्रामीणों को उपचार के लिए अस्पताल तक पहुंचने में परेशानी हो रही है। आपात स्थिति में मरीजों को समय पर स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल वैकल्पिक रास्ते की व्यवस्था करने की मांग की है।
ग्राम सभा से सुशासन तिहार तक आवेदन, फिर भी स्थायी समाधान नहीं
ग्रामीणों का कहना है कि इस मार्ग पर स्थायी पुलिया निर्माण की मांग लंबे समय से की जा रही है। ग्राम सभा की बैठकों में भी पुलिया निर्माण का मुद्दा उठाया गया। इसके अलावा सुशासन तिहार के दौरान भी सचिव और सरपंच को पक्की पुलिया निर्माण के लिए आवेदन दिया गया था। इसके बावजूद अब तक स्थायी पुलिया का निर्माण नहीं हो सका।
ग्रामीणों के अनुसार लोगों की आवाजाही को देखते हुए सरपंच की ओर से पाइप नुमा कच्ची पुलिया बनाई गई थी, लेकिन लगातार बारिश के दौरान तेज पानी के बहाव में यह पुलिया बह गई।
हर बारिश में खड़ा होता है संपर्क का संकट
ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के मौसम में इस मार्ग पर हर साल आवागमन की समस्या सामने आती है। अस्थाई व्यवस्था के भरोसे रहने के कारण तेज बारिश होते ही पुलिया बहने का खतरा बना रहता है। इससे गांवों का संपर्क टूट जाता है और ग्रामीणों को जरूरी काम के लिए भी परेशानी उठानी पड़ती है।
ग्रामीणों की मांग—तत्काल वैकल्पिक रास्ता और पक्की पुलिया
पुलिया बहने के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से मौके का तत्काल निरीक्षण कराने और स्थायी समाधान के तौर पर पक्की पुलिया का निर्माण कराने की मांग की है। साथ ही जब तक पक्की पुलिया नहीं बनती, तब तक वैकल्पिक आवागमन की व्यवस्था करने की मांग की गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि इससे 15 से 20 गांवों के लोगों, छह गांवों के शिक्षकों-विद्यार्थियों, बाजार जाने वाले ग्रामीणों और अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को राहत मिलेगी। ग्रामीणों ने प्रशासन से बारिश के दौरान आवागमन बहाल रखने के लिए शीघ्र कार्रवाई की मांग की है।




