पद्मश्री वैद्यराज हेमचंद मांझी तक पहुंचना हुआ मुश्किल, पहली बारिश में ही सड़क बनी ‘दरिया’
देश के कोने-कोने से इलाज कराने आने वाले मरीज बदहाल मार्ग से परेशान, गड्ढों और कीचड़ में फंस रहे वाहन; ग्रामीणों ने सड़क निर्माण की उठाई मांग

नारायणपुर/छोटेडोंगर। मानसून की पहली ही बारिश ने छोटेडोंगर क्षेत्र में विकास कार्यों की पोल खोल दी है। पद्मश्री सम्मानित वैद्यराज हेमचंद मांझी के निवास तक पहुंचने वाली मुख्य सड़क पहली बारिश में ही गड्ढों और कीचड़ से भर गई है। छोटेडोंगर थाना और ग्राम पंचायत भवन के सामने से गुजरने वाला यह महत्वपूर्ण मार्ग अब सड़क कम और तालाब अधिक नजर आने लगा है। बड़े-बड़े गड्ढों में पानी भर जाने से आवागमन जोखिम भरा हो गया है। इसका सबसे अधिक खामियाजा उन मरीजों को उठाना पड़ रहा है, जो देश के कोने-कोने से वैद्यराज के पास उपचार के लिए पहुंचते हैं।

कैंसर सहित कई जटिल बीमारियों के पारंपरिक उपचार और नाड़ी परीक्षण के लिए प्रसिद्ध पद्मश्री वैद्यराज हेमचंद मांझी के पास प्रतिदिन देश के विभिन्न राज्यों से सैकड़ों मरीज पहुंचते हैं। उनके निवास तक पहुंचने का यही प्रमुख मार्ग है, लेकिन सड़क की जर्जर हालत मरीजों और उनके परिजनों के लिए बड़ी परेशानी बन गई है। बारिश के कारण बने गहरे गड्ढों और कीचड़ में कई बार वाहन फंस जाते हैं, जिससे मरीजों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
स्कूली बच्चों और राहगीरों के लिए भी बढ़ा खतरा
इसी मार्ग से प्रतिदिन स्कूली बच्चे, दोपहिया वाहन चालक और ग्रामीण आवागमन करते हैं। सड़क पर पानी भर जाने से गड्ढों का पता नहीं चल पाता, जिसके कारण आए दिन लोग फिसलकर घायल हो रहे हैं। लगातार बारिश के बीच स्थिति और भी गंभीर होती जा रही है।
पीडब्ल्यूडी और पंचायत की उदासीनता पर ग्रामीणों में आक्रोश
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क लंबे समय से बदहाल है, लेकिन लोक निर्माण विभाग और ग्राम पंचायत ने इसकी मरम्मत की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की। पहली ही बारिश में मार्ग की हालत और खराब हो गई है। ग्रामीणों ने मांग की है कि पद्मश्री वैद्यराज हेमचंद मांझी तक पहुंचने वाले इस महत्वपूर्ण मार्ग का तत्काल निर्माण और मरम्मत कराई जाए, ताकि मरीजों और स्थानीय लोगों को राहत मिल सके।
प्रदेश की पहचान बने वैद्यराज, लेकिन पहुंच मार्ग बदहाल
पद्मश्री सम्मानित वैद्यराज हेमचंद मांझी आज छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे देश में अपनी पारंपरिक चिकित्सा पद्धति के लिए पहचान बना चुके हैं। ऐसे में उनके निवास तक पहुंचने वाले मुख्य मार्ग की बदहाली न केवल प्रशासनिक उदासीनता को उजागर करती है, बल्कि इलाज की उम्मीद लेकर आने वाले मरीजों के लिए भी बड़ी मुश्किल खड़ी कर रही है।यदि यह खबर मुख्य पृष्ठ पर प्रमुखता से प्रकाशित करनी है, तो इसे और अधिक धारदार एवं खोजी अंदाज में भी तैयार किया जा सकता है।




