19 घंटे अंधेरे में डूबा अबूझमाड़, तब सरपंच-ग्रामीण बने ‘लाइनमैन’
66 किमी दूर ओरछा में बिजली विभाग का लाइनमैन नहीं, कंप्यूटर ऑपरेटर के साथ ग्रामीणों ने बारिश में संभाला मोर्चा, टूटी लाइन जोड़कर बहाल की विद्युत आपूर्ति; व्यवस्था पर फिर उठे सवाल

नारायणपुर। अबूझमाड़ के सबसे दूरस्थ मुख्यालय ओरछा में सरकारी व्यवस्था की एक बड़ी खामी उस समय उजागर हो गई, जब बिजली गुल होने के बाद पूरे 19 घंटे तक विद्युत आपूर्ति बहाल नहीं हो सकी। कारण यह रहा कि ओरछा जैसे महत्वपूर्ण मुख्यालय में बिजली विभाग का नियमित लाइनमैन ही पदस्थ नहीं है। आखिरकार जब व्यवस्था जवाब दे गई तो सरपंच और ग्रामीणों ने खुद जिम्मेदारी उठाई। लगातार हो रही बारिश के बीच बिजली विभाग के कंप्यूटर ऑपरेटर के साथ जंगलों में पहुंचकर टूटे हुए तार की मरम्मत की और 19 घंटे बाद बिजली आपूर्ति बहाल कराई।

ओरछा मुख्यालय जिला मुख्यालय नारायणपुर से करीब 66 किलोमीटर दूर अबूझमाड़ के भीतरी क्षेत्र में स्थित है। यहां आज भी अधिकांश सरकारी कार्यालय नियमित रूप से संचालित नहीं हो पाते, जिसके कारण स्थानीय लोगों को छोटे-छोटे कामों के लिए भी जिला मुख्यालय का रुख करना पड़ता है। ऐसे हालात में जब कोई आपात स्थिति बनती है तो स्थानीय जनप्रतिनिधि और ग्रामीण ही व्यवस्था का सहारा बनते हैं।

बताया गया कि विद्युत लाइन में खराबी आने के बाद ओरछा सहित अबूझमाड़ के कई गांव अंधेरे में डूब गए। बिजली विभाग के पास मौके पर मरम्मत करने के लिए लाइनमैन उपलब्ध नहीं था। इससे लोगों को पेयजल, संचार, छोटे व्यापार और दैनिक कार्यों में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। 19 घंटे तक इंतजार के बाद भी जब कोई तकनीकी दल नहीं पहुंचा तो ओरछा के सरपंच ने ग्रामीणों को साथ लेकर स्वयं मरम्मत कार्य शुरू कराया। बारिश के बीच टूटे तारों को जोड़ने का काम किया गया, जिसके बाद आखिरकार विद्युत आपूर्ति बहाल हो सकी।

व्यवस्था से बड़ा बना जनसहयोग
ओरछा के ग्रामीणों ने एक बार फिर साबित कर दिया कि अबूझमाड़ में सरकारी संसाधनों की कमी के बावजूद सामूहिक सहयोग की परंपरा आज भी जीवित है। समय की परवाह किए बिना देर रात तक ग्रामीण और जनप्रतिनिधि बिजली बहाली में जुटे रहे। उनके प्रयासों से पूरे क्षेत्र में फिर से रोशनी लौट सकी।
बिजली बंद होते ही कई गांव हो जाते हैं प्रभावित
ओरछा फीडर से जुड़े अबूझमाड़ के कई गांवों की विद्युत आपूर्ति इसी लाइन पर निर्भर है। ऐसे में ओरछा में आई तकनीकी खराबी का असर पूरे क्षेत्र पर पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इतने संवेदनशील और दूरस्थ क्षेत्र में नियमित लाइनमैन की नियुक्ति नहीं होना गंभीर लापरवाही है।
उठने लगे बड़े सवाल
- अबूझमाड़ के मुख्यालय ओरछा में नियमित लाइनमैन क्यों नहीं?
- दूरस्थ क्षेत्र में आपातकालीन विद्युत व्यवस्था का जिम्मेदार कौन?
- हर बार ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों के भरोसे कब तक चलेगी व्यवस्था?
- संवेदनशील इलाके में बुनियादी सेवाओं के लिए स्थायी अमला कब मिलेगा?
अबूझमाड़ में विकास की बातें लगातार हो रही हैं, लेकिन ओरछा जैसी महत्वपूर्ण जगह पर बिजली जैसी मूलभूत सेवा के लिए भी स्थायी तकनीकी अमला उपलब्ध नहीं होना गंभीर चिंता का विषय है। जिस क्षेत्र को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की बात की जा रही है, वहां बुनियादी व्यवस्थाओं का मजबूत होना सबसे पहली आवश्यकता है। ग्रामीणों की संवेदनशीलता और जनभागीदारी सराहनीय है, लेकिन सरकारी व्यवस्था का विकल्प नहीं बन सकती।




