लिंगो मुदियाल कृषि महाविद्यालय के छात्रों ने मशरूम से रचा नवाचार का नया अध्याय
आटा, चिप्स, केक और बिस्कुट बनाकर दिखाई आत्मनिर्भरता की राह, कृषि आधारित उद्यमिता की मिसाल बने विद्यार्थी

नारायणपुर। सीमित संसाधनों में बड़े सपने कैसे पूरे किए जा सकते हैं, इसका प्रेरणादायक उदाहरण लिंगो मुदियाल कृषि महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने प्रस्तुत किया है। कृषि और पोषण को आधुनिक सोच के साथ जोड़ते हुए छात्रों ने मशरूम आधारित पौष्टिक उत्पाद तैयार कर न केवल अपनी रचनात्मक क्षमता का परिचय दिया, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्वरोजगार के नए द्वार भी खोल दिए। महाविद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा तैयार किए गए मशरूम का आटा, मशरूम चिप्स, मशरूम केक एवं मशरूम बिस्कुट इन दिनों चर्चा का विषय बने हुए हैं। स्वाद, गुणवत्ता और पोषण से भरपूर इन उत्पादों ने हर किसी को प्रभावित किया।
महाविद्यालय परिसर में आयोजित प्रदर्शन के दौरान विद्यार्थियों की मेहनत और नवाचार स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। पारंपरिक कृषि शिक्षा से आगे बढ़ते हुए छात्रों ने यह साबित कर दिया कि खेती अब केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि मूल्य संवर्धन के माध्यम से इसे रोजगार और उद्यमिता का मजबूत माध्यम बनाया जा सकता है। छात्रों द्वारा तैयार किए गए उत्पादों को देखने और चखने पहुंचे लोगों ने इनके स्वाद और गुणवत्ता की जमकर सराहना की।
मशरूम को पहले केवल एक खाद्य पदार्थ के रूप में देखा जाता था, लेकिन अब यह स्वास्थ्य और पोषण का महत्वपूर्ण स्रोत बनकर उभर रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार मशरूम में प्रोटीन, फाइबर, विटामिन-बी, विटामिन-डी, आयरन और एंटीऑक्सीडेंट प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। यही कारण है कि स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों के बीच मशरूम आधारित उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है। विद्यार्थियों ने इसी संभावनाओं को समझते हुए मशरूम को विभिन्न खाद्य उत्पादों में परिवर्तित किया और यह दिखाया कि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों से भी बड़े स्तर की संभावनाएं तैयार की जा सकती हैं।
छात्रों द्वारा तैयार किया गया मशरूम आटा पोषण से भरपूर उत्पाद के रूप में सामने आया। विद्यार्थियों ने बताया कि इसे नियमित भोजन में शामिल कर शरीर को आवश्यक पोषक तत्व आसानी से उपलब्ध कराए जा सकते हैं। यह सामान्य आटे की तुलना में अधिक पौष्टिक माना जा रहा है और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों के लिए बेहतर विकल्प बन सकता है। वहीं मशरूम चिप्स बच्चों और युवाओं के बीच आकर्षण का केंद्र बने। स्वादिष्ट होने के साथ-साथ ये सामान्य तले हुए स्नैक्स की तुलना में अधिक स्वास्थ्यवर्धक बताए गए।
प्रदर्शनी में सबसे अधिक चर्चा मशरूम केक की रही। आमतौर पर केक को केवल स्वाद से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन विद्यार्थियों ने इसमें पोषण का नया आयाम जोड़ दिया। मशरूम के उपयोग से तैयार किए गए इस केक ने लोगों को स्वाद और स्वास्थ्य दोनों का अनोखा अनुभव दिया। इसके अलावा मशरूम बिस्कुट भी लोगों को काफी पसंद आए। कुरकुरे और पौष्टिक इन बिस्कुटों को देखकर लोगों ने विद्यार्थियों की सोच और मेहनत की सराहना की। छात्रों ने बताया कि यदि इन उत्पादों का नियमित सेवन किया जाए तो शरीर को आवश्यक पोषण तत्व प्राप्त होते हैं और यह सामान्य खाद्य पदार्थों की तुलना में बेहतर विकल्प साबित हो सकते हैं।
इस पूरी पहल के पीछे महाविद्यालय के शिक्षकों का मार्गदर्शन भी महत्वपूर्ण रहा। अधिष्ठाता डॉ. रत्ना नशीने के नेतृत्व में विद्यार्थियों को नवाचार और मूल्य संवर्धन के लिए प्रेरित किया गया। सहायक प्राध्यापक डॉ. नवीन मरकाम, डॉ. पुष्पेंद्र सिंह, डॉ. देवेंद्र कुर्रे, डॉ. सविता आदित्य, डॉ. मदनलाल कुर्रे, डॉ. गौतम भास्कर, डॉ. पुष्पराज दीवान, डॉ. नवनीत ध्रुवे एवं डॉ. विवेक विश्वकर्मा ने विद्यार्थियों को तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया। शिक्षकों के सहयोग और विद्यार्थियों की मेहनत का परिणाम रहा कि इतने कम संसाधनों में भी उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद तैयार किए जा सके।
छात्र नमन मौर्य, हिमानी नायक, सुशीला नाग, प्रिया सोढ़ी, हिमांशु देवांगन, काजल मंडावी एवं कौशल्या यादव ने इस नवाचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विद्यार्थियों ने बताया कि उनका उद्देश्य केवल उत्पाद तैयार करना नहीं था, बल्कि यह संदेश देना भी था कि कृषि क्षेत्र में नवाचार और मूल्य संवर्धन के माध्यम से ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं। उनका मानना है कि यदि छोटे स्तर पर भी ऐसे उत्पादों का निर्माण शुरू किया जाए तो ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को बढ़ावा मिल सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आज के समय में केवल कच्चे उत्पाद बेचने की बजाय मूल्य संवर्धित उत्पादों पर ध्यान देना आवश्यक है। मशरूम आधारित उत्पादों की बढ़ती मांग इस दिशा में बड़ी संभावना के रूप में देखी जा रही है। स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता और पौष्टिक खाद्य पदार्थों की मांग ने ऐसे उत्पादों के लिए बाजार तैयार किया है। यही कारण है कि कृषि महाविद्यालय के विद्यार्थियों की यह पहल केवल एक शैक्षणिक गतिविधि नहीं, बल्कि भविष्य की उद्यमिता का मजबूत संकेत मानी जा रही है।
लिंगो मुदियाल कृषि महाविद्यालय की यह पहल यह भी दर्शाती है कि यदि विद्यार्थियों को सही दिशा और अवसर मिले तो वे नवाचार के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। ग्रामीण अंचल के युवा अब केवल नौकरी की तलाश तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि वे कृषि और खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में स्वयं का व्यवसाय स्थापित करने की सोच विकसित कर रहे हैं। मशरूम आधारित उत्पादों का यह प्रयोग आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा को भी मजबूती देता है।
महाविद्यालय परिसर में विद्यार्थियों की इस उपलब्धि को लेकर उत्साह का माहौल दिखाई दिया। शिक्षकों और विद्यार्थियों ने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में ऐसे और भी नवाचार सामने आएंगे, जो कृषि क्षेत्र को नई दिशा देने के साथ युवाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करेंगे। मशरूम जैसे साधारण उत्पाद को नवाचार और मूल्य संवर्धन के माध्यम से रोजगार और पोषण का सशक्त माध्यम बनाकर विद्यार्थियों ने यह साबित कर दिया कि मेहनत, रचनात्मक सोच और सही मार्गदर्शन से सफलता की नई इबारत लिखी जा सकती है।




