मुख्यधारा की ओर लौटता विश्वास: बीजापुर में 30 माओवादी कैडरों का आत्मसमर्पण
शांति और विकास की दिशा में बड़ा कदम- मुख्यमंत्री साय

रायपुर, 7 फरवरी 2026।छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में शांति, विश्वास और विकास की दिशा में एक और निर्णायक उपलब्धि दर्ज हुई है। जिला बीजापुर में 30 माओवादी कैडरों ने राज्य सरकार की पुनर्वास आधारित पहल ‘पूना मारगेम: पुनर्वास से पुनर्जीवन’ के तहत आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का संकल्प लिया। आत्मसमर्पण करने वाले इन कैडरों पर कुल 85 लाख रुपए से अधिक का इनाम घोषित था। यह घटनाक्रम नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भरोसे की बहाली और हिंसा से विमुख होकर लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़ने की दिशा में बड़ा संकेत माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस घटनाक्रम को बस्तर में शांति स्थापना के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे सतत प्रयासों का ठोस परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि बीते दो वर्षों में दूरस्थ और संवेदनशील इलाकों तक सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार किया गया है। गांव-गांव तक विकास की रोशनी पहुंचने से युवाओं के सामने नई संभावनाएं खुली हैं और भटके युवाओं में हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज से जुड़ने का भरोसा बढ़ा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की सुशासन आधारित नीति का केंद्र सुरक्षा के साथ-साथ विश्वास की बहाली, पुनर्वास और भविष्य निर्माण है। आत्मसमर्पण करने वाले युवाओं को सम्मानजनक जीवन की ओर लौटाने के लिए पुनर्वास पैकेज, कौशल विकास, शिक्षा, रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। सरकार का उद्देश्य केवल हथियार छुड़वाना नहीं, बल्कि इन युवाओं के लिए आजीविका और सामाजिक स्वीकार्यता का स्थायी रास्ता बनाना है।
उन्होंने कहा कि बस्तर में सुरक्षा बलों की सतर्कता और प्रशासन की विकासोन्मुखी रणनीति ने मिलकर भरोसे का वातावरण तैयार किया है। सड़क संपर्क, मोबाइल नेटवर्क, स्वास्थ्य केंद्र, स्कूलों की उपलब्धता और योजनाओं की पहुंच से अंचल के भीतर बदलाव की बयार बह रही है। इसी का परिणाम है कि संगठन की पकड़ कमजोर पड़ रही है और बड़ी संख्या में कैडर मुख्यधारा में लौटने का साहस जुटा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी विज़न और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दृढ़ संकल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से बस्तर भय और हिंसा के दौर से बाहर निकलकर विश्वास, विकास और अवसरों की ओर तेज़ी से अग्रसर हो रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में बस्तर एक शांत, सुरक्षित और समृद्ध क्षेत्र के रूप में अपनी नई पहचान स्थापित करेगा।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों के लिए काउंसलिंग, दस्तावेज़ीकरण और पुनर्वास प्रक्रिया तत्काल शुरू की जा रही है, ताकि वे समाज में सम्मानपूर्वक पुनः स्थापित हो सकें। यह पहल नक्सलवाद से प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी शांति की दिशा में एक और मजबूत कदम के रूप में देखी जा रही है।

