नारायणपुर

अबूझमाड़ में नक्सलमुक्ति की ओर निर्णायक कदम

वाड़ापेंदा में खुला नया सुरक्षा व जन सुविधा कैंप, विकास को मिलेगी रफ्तार

नारायणपुर, 14 जनवरी। अबूझमाड़ को नक्सलमुक्त कर “शांतिपूर्ण एवं समृद्ध नारायणपुर” के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में नारायणपुर पुलिस ने एक और निर्णायक कदम बढ़ाया है। माड़ बचाव अभियान के तहत थाना कोहकामेटा क्षेत्र के घोर नक्सल प्रभावित ग्राम वाड़ापेंदा में वर्ष 2026 का दूसरा नवीन सुरक्षा एवं जन सुविधा कैंप स्थापित किया गया है। यह कैंप नक्सलवाद के अंतिम गढ़ों में अंतिम कील ठोंकने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

दशकों से अलग-थलग और विकास से अछूते इस क्षेत्र को अब मुख्यधारा से जोड़ने की राह खुलेगी। नए कैंप की स्थापना से क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने के साथ ही सड़क, पुल-पुलिया, शिक्षा, स्वास्थ्य, मोबाइल नेटवर्क और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार को गति मिलेगी।

सुरक्षा के साए में विकास कार्य
वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में नारायणपुर पुलिस द्वारा लगातार नक्सल विरोधी “माड़ बचाओ” अभियान संचालित किया जा रहा है। इसके तहत अबूझमाड़ के भीतर नए कैंप स्थापित कर सड़क निर्माण सहित जनकल्याणकारी योजनाओं को अंतिम गांव तक पहुंचाने में सुरक्षा बल सहयोग दे रहे हैं। इसी क्रम में 14 जनवरी को वाड़ापेंदा में कैंप की स्थापना की गई, जिससे ग्रामीणों में सुरक्षा और भरोसे का माहौल बना है।

रणनीतिक रूप से अहम स्थान
वाड़ापेंदा कैंप जिला मुख्यालय नारायणपुर से लगभग 60 किमी, थाना कोहकामेटा से 32 किमी, कच्चापाल से 23 किमी, कोडनार से 12 किमी और जटवर से 6 किमी दूरी पर स्थित है। इस कैंप से कोगाली, टहकाटोंड, परबेड़ा, रेपिंग और वाड़ापेंदा सहित आसपास के गांवों को सीधा लाभ मिलेगा।

कनेक्टिविटी से बदलेगी तस्वीर
नए कैंप के जरिए कच्चापाल–तोके–कोडनार–जटवर–वाड़ापेंदा–बालेबेड़ा मार्ग पर आवागमन सुगम होगा। बालेबेड़ा से गरपा तक कनेक्टिविटी तथा कच्चापाल से गरपा तक सड़क निर्माण का मार्ग भी प्रशस्त होगा। इससे आम नागरिकों को स्वास्थ्य, शिक्षा और बाजार जैसी सुविधाओं तक आसान पहुंच मिलेगी।

पिछले वर्षों में भी बड़ा विस्तार
नारायणपुर पुलिस ने वर्ष 2025 में कुतुल, कोडलियार, बेड़माकोटी, पदमकोट, कंडुलपार, नेलांगुर, पांगूड़, रायनार, एडजूम, ईदवाया, आदेर, कुड़मेल, कोंगे, सितरम, तोके, जाटलूर, धोबे, डोडीमरका, पदमेटा, लंका, परियादी, काकुर, बालेबेड़ा, कोडेनार, कोडनार, आदिनपार और मंदोड़ा सहित कई इलाकों में सुरक्षा व जन सुविधा कैंप स्थापित किए। वहीं वर्ष 2026 में जटवर और वाड़ापेंदा में नए कैंप खोले गए हैं।

संयुक्त प्रयासों से मिली सफलता
नए कैंप की स्थापना में नारायणपुर पुलिस, डीआरजी, बस्तर फाइटर और बीएसएफ की 86वीं, 178वीं, 83वीं व 133वीं वाहिनी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। वरिष्ठ अधिकारियों के नेतृत्व में चल रहे इन प्रयासों से अबूझमाड़ क्षेत्र में नक्सल प्रभाव तेजी से कमजोर पड़ रहा है और विकास की नई इबारत लिखी जा रही है।

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