दुर्गम अबूझमाड़ में उगता पर्यटन का नया सूरज,आदिमपार बना उम्मीदों का केंद्र
सुरक्षा बलों की मजबूत मौजूदगी, नए पुलिस बेस कैंप और अस्थायी हेलीपैड से दिखता मनमोहक नजारा — अबूझमाड़ को पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिलाने की संभावना

( कैलाश सोनी ) नारायणपुर। दशकों तक नक्सलवाद, दुर्गमता और विकास से दूरी की पहचान रहा अबूझमाड़ अब बदलाव के दौर में प्रवेश कर चुका है। जिस क्षेत्र का नाम आते ही कभी भय, असुरक्षा और घने जंगलों की तस्वीर उभरती थी, वही अबूझमाड़ आज शांति, सुरक्षा और संभावनाओं का प्रतीक बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। सुरक्षा बलों की सतत और मजबूत मौजूदगी ने न केवल यहां कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ किया है, बल्कि विकास और पर्यटन के नए रास्ते भी खोल दिए हैं। इसी बदलते अबूझमाड़ की सबसे सशक्त तस्वीर उभरकर सामने आई है आदिमपार क्षेत्र से, जहां हाल ही में स्थापित पुलिस बेस कैंप और उसके समीप निर्मित अस्थायी हेलीपैड से प्रकृति का ऐसा अद्भुत दृश्य दिखाई देता है, जो किसी भी पर्यटक को मंत्रमुग्ध कर सकता है।


सुरक्षा से स्थिरता, स्थिरता से विकास की ओर
अबूझमाड़ लंबे समय तक देश के सबसे दुर्गम और संवेदनशील इलाकों में गिना जाता रहा। ऊंची-नीची पहाड़ियां, घने जंगल, सीमित सड़कें और संचार सुविधाओं की कमी ने इसे वर्षों तक मुख्यधारा से अलग रखा। नक्सली गतिविधियों के कारण न केवल प्रशासनिक पहुंच सीमित रही, बल्कि विकास योजनाएं भी जमीन पर उतरने से पहले ही ठप हो जाती थीं।
लेकिन बीते कुछ वर्षों में सुरक्षा बलों द्वारा चलाए गए निरंतर अभियानों, नए कैंपों की स्थापना और रणनीतिक उपस्थिति ने अबूझमाड़ की तस्वीर बदलनी शुरू कर दी है। इसी कड़ी में आदिमपार में स्थापित नया पुलिस बेस कैंप सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ इस पूरे इलाके के भविष्य की दिशा तय करता नजर आ रहा है।

आदिमपार : पहाड़ों के बीच छिपा प्रकृति का अनमोल रत्न
अबूझमाड़ की दुर्गम पहाड़ियों में बसा आदिमपार क्षेत्र प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत उदाहरण है। चारों ओर फैली हरियाली, घने जंगल, पहाड़ियों की परतदार श्रृंखलाएं और शांत वातावरण इस क्षेत्र को विशिष्ट बनाते हैं। हाल ही में पुलिस बेस कैंप से कुछ दूरी पर एक ऊंची पहाड़ी पर समतल स्थान चिन्हित कर अस्थायी हेलीपैड का निर्माण किया गया है। यह हेलीपैड मुख्य रूप से आपातकालीन परिस्थितियों में हेलीकॉप्टर लैंडिंग के लिए बनाया गया है, ताकि जरूरत के समय त्वरित सहायता पहुंचाई जा सके।
लेकिन यही हेलीपैड अब आदिमपार की नई पहचान बनता जा रहा है। यहां से दिखाई देने वाला दृश्य अबूझमाड़ की आत्मा को दर्शाता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त का अद्भुत संगम
आदिमपार के इस हेलीपैड से सुबह और शाम का नजारा किसी स्वप्नलोक से कम नहीं लगता।
सुबह सूरज की पहली किरणें जब पहाड़ियों की चोटियों पर पड़ती हैं, तो पूरा इलाका सुनहरी आभा में नहाया नजर आता है। धुंध के बीच से झांकती पहाड़ियां, जंगलों के ऊपर तैरती रोशनी और बदलता आसमान एक अलौकिक दृश्य रचते हैं।
वहीं शाम के समय सूर्यास्त के दौरान आसमान में बिखरते नारंगी, गुलाबी और बैंगनी रंग पहाड़ियों के साथ मिलकर ऐसा दृश्य प्रस्तुत करते हैं, जिसे देखने वाला देर तक निहारता ही रह जाता है। यह दृश्य न केवल आंखों को सुकून देता है, बल्कि अबूझमाड़ को एक संभावित सनराइज-सनसेट टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करता है।
भौगोलिक स्थिति भी पर्यटन के लिए अनुकूल
आदिमपार की भौगोलिक स्थिति इसे पर्यटन के लिहाज से और अधिक महत्वपूर्ण बनाती है। यह स्थल
- जिला मुख्यालय नारायणपुर से लगभग 56 किलोमीटर,
- कोहकामेटा थाना से 28 किलोमीटर,
- कच्चापाल से 19 किलोमीटर,
- कुतुल से 12 किलोमीटर,
- तथा कोडनार से मात्र 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने के बाद इन
मार्गों पर आवागमन पहले की तुलना में कहीं अधिक सुरक्षित और सुगम हो रहा है। आने वाले समय में यदि सड़क और संचार सुविधाओं में और सुधार किया गया, तो यह इलाका पर्यटकों के लिए सहज पहुंच वाला स्थल बन सकता है।
इको-टूरिज्म और एडवेंचर टूरिज्म की अपार संभावनाएं
पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि आदिमपार और आसपास के क्षेत्रों में इको-टूरिज्म, एडवेंचर टूरिज्म और नेचर टूरिज्म की व्यापक संभावनाएं हैं। यहां ट्रैकिंग रूट, नेचर वॉक, फोटोग्राफी पॉइंट, सनराइज-सनसेट व्यू प्वाइंट और जंगल सफारी जैसे विकल्प विकसित किए जा सकते हैं।
घने जंगल और पहाड़ियां रोमांच पसंद करने वाले पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकती हैं, वहीं शांति और प्रकृति से जुड़ाव चाहने वाले सैलानियों के लिए यह क्षेत्र एक आदर्श स्थल बन सकता है।
जनजातीय संस्कृति बनेगी विशेष आकर्षण
अबूझमाड़ की पहचान केवल प्राकृतिक सौंदर्य तक सीमित नहीं है। यहां की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, परंपराएं, लोकनृत्य, लोकगीत और जीवनशैली भी पर्यटन के लिए बड़ी पूंजी साबित हो सकती हैं। यदि स्थानीय समुदाय की सहभागिता के साथ पर्यटन को बढ़ावा दिया जाए, तो आदिंगपार और आसपास के गांव सांस्कृतिक पर्यटन के केंद्र बन सकते हैं।
इससे न केवल अबूझमाड़ की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर बनेगी, बल्कि स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार, आय और आत्मनिर्भरता के अवसर भी मिलेंगे।
सुरक्षा बल बने भरोसे की सबसे मजबूत कड़ी
किसी भी पर्यटन क्षेत्र के विकास की पहली शर्त सुरक्षा होती है। अबूझमाड़ में सुरक्षा बलों की निरंतर तैनाती और नए पुलिस बेस कैंपों की स्थापना ने यह भरोसा पैदा किया है कि यह इलाका अब स्थिरता की ओर बढ़ रहा है।आदिमपार का पुलिस बेस कैंप इस भरोसे का प्रतीक है, जिसने न केवल क्षेत्र को सुरक्षित बनाया है, बल्कि विकास और पर्यटन की संभावनाओं की नींव भी रखी है।
संतुलित और योजनाबद्ध विकास की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि अबूझमाड़ जैसे संवेदनशील और जैव-विविधता से भरपूर क्षेत्र में पर्यटन विकास बेहद संतुलित होना चाहिए। यहां बड़े होटल या भारी निर्माण के बजाय इको-फ्रेंडली होम-स्टे, स्थानीय गाइड, सीमित पर्यटक संख्या और पर्यावरण-संरक्षण आधारित मॉडल अपनाया जाना चाहिए। इससे प्रकृति को नुकसान पहुंचाए बिना विकास संभव होगा।
अबूझमाड़ की छवि बदलने का सुनहरा अवसर
आदिमपार और वहां से दिखाई देने वाला मनोरम दृश्य अबूझमाड़ की दशकों पुरानी छवि को बदलने का अवसर प्रदान करता है। यह इलाका अब भय और संघर्ष की पहचान से निकलकर शांति, सुरक्षा और सौंदर्य का प्रतीक बन सकता है।
नया सवेरा, नई पहचान
कुल मिलाकर आदिमपार में स्थापित पुलिस बेस कैंप और अस्थायी हेलीपैड केवल सुरक्षा ढांचा नहीं, बल्कि अबूझमाड़ के उज्ज्वल भविष्य का संकेत हैं। यहां उगता सूरज केवल एक प्राकृतिक दृश्य नहीं, बल्कि उस नए सवेरे का प्रतीक है, जिसमें अबूझमाड़ पर्यटन, विकास और विश्वास के पथ पर आगे बढ़ता नजर आ रहा है।




