रावघाट के युवाओं को मिला तकनीकी उड़ान का अवसर भिलाई इस्पात संयंत्र के सीएसआर के तहत सीटीटीसी, भुवनेश्वर में प्रशिक्षण हेतु रवाना हुआ पहला बैच

नारायणपुर/रावघाट-09 जून 2025। सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि औद्योगिक विकास केवल खनिज संसाधनों तक सीमित नहीं होता, बल्कि जब उद्योग अपने सामाजिक दायित्व को गंभीरता से लेते हैं, तो विकास की नई परिभाषाएँ गढ़ी जाती हैं।

रावघाट परियोजना के अंतर्गत सीएसआर (निगमित सामाजिक दायित्व) के तहत 02 जून को रावघाट अंचल के 21 युवाओं का पहला बैच तकनीकी प्रशिक्षण के लिए सीटीटीसी, भुवनेश्वर के लिए रवाना हुआ।

इन युवाओं को ‘सीएनसी टर्निंग’ विषय में पाँच माह का आवासीय प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। यह प्रशिक्षण केवल तकनीकी दक्षता ही नहीं देगा, बल्कि उन्हें स्वावलंबन, आधुनिक उत्पादन प्रक्रिया की समझ और उद्योगों में काम करने की व्यावहारिक क्षमता भी प्रदान करेगा। दुर्ग रेलवे स्टेशन से विदा हुए ये युवा न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे रावघाट क्षेत्र की उम्मीदों के प्रतिनिधि बनकर निकले हैं।
सेंट्रल टूल रूम एंड ट्रेनिंग सेंटर (सीटीटीसी), भुवनेश्वर एक प्रतिष्ठित संस्थान है जो युवाओं को अत्याधुनिक तकनीक में प्रशिक्षित कर उन्हें उद्योगों के लिए तैयार करता है। यहां युवाओं को उच्च गुणवत्ता के औद्योगिक यंत्रों के संचालन और प्रिसिशन मैन्युफैक्चरिंग की बारीकियों में दक्ष किया जाएगा।
भिलाई इस्पात संयंत्र की यह पहल केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि रावघाट की पहाड़ियों से निकलते एक नए भविष्य की रूपरेखा है। संयंत्र के लिए रावघाट खदानें जहां लौह अयस्क की आपूर्ति का आधार हैं, वहीं यह क्षेत्र अब सामाजिक सशक्तिकरण का केंद्र भी बनता जा रहा है।
शिक्षा, खेल, संस्कृति और आजीविका जैसे विविध क्षेत्रों में पहले से ही सक्रिय बीएसपी द्वारा अब तकनीकी प्रशिक्षण के माध्यम से युवाओं के लिए दीर्घकालिक रोजगार के अवसर तैयार किए जा रहे हैं। इससे न केवल उनकी रोज़गार क्षमता में वृद्धि होगी, बल्कि वे उद्यमिता की दिशा में भी प्रेरित होंगे।
यह प्रयास दर्शाता है कि जब उद्योग सामाजिक सरोकारों के साथ कदम मिलाकर चलते हैं, तो वे संसाधनों के दोहन के साथ-साथ मानव संसाधनों का संवर्धन भी करते हैं। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम एक नया सामाजिक अनुबंध है, जिसमें तकनीकी कौशल, आत्मनिर्भरता और सामुदायिक विकास की भावना समाहित है।
अब रावघाट की धरती से केवल खनिज नहीं, बल्कि तकनीकी रूप से दक्ष और आत्मविश्वासी युवा भी भारत की औद्योगिक प्रगति में अपना योगदान देने निकलेंगे।




