जब जिंदगी पर बन आई… देवदूत बनकर पहुंचे आईटीबीपी के जवान, रक्तदान से बचाई 3 साल के मासूम की सांसें

कैलाश सोनी- नारायणपुर। कर्तव्य के साथ मानवीय संवेदनाओं का जीवंत उदाहरण पेश करते हुए भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के जवानों ने समय पर रक्तदान कर तीन वर्षीय मासूम की जान बचा ली। 41वीं वाहिनी आईटीबीपी के जवानों की इस मानवीय पहल ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वर्दीधारी जवान केवल देश की सीमाओं की ही नहीं, बल्कि समाज और मानवता की रक्षा के लिए भी हमेशा तैयार रहते हैं।

जानकारी के अनुसार 3 वर्ष 6 माह के पंकज सलाम, पिता मलसाय सलाम, को उपचार के लिए जिला अस्पताल नारायणपुर में भर्ती कराया गया था। चिकित्सकों ने जांच के बाद बच्चे की स्थिति को गंभीर बताते हुए तत्काल बी-पॉजिटिव (B+) ब्लड की आवश्यकता बताई। लेकिन अस्पताल के ब्लड बैंक में उस समय आवश्यक रक्त उपलब्ध नहीं था, जिससे परिजनों की चिंता बढ़ गई।
इसी बीच सीजी 24 न्यूज़ के चीफ एडिटर डे नारायण सिंह बघेल को बच्चे की गंभीर स्थिति और रक्त की तत्काल आवश्यकता की जानकारी मिली। उन्होंने मानवीय पहल करते हुए तुरंत 41वीं बटालियन आईटीबीपी के कमांडेंट नरेंद्र सिंह से संपर्क कर स्थिति से अवगत कराया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए कमांडेंट नरेंद्र सिंह ने तत्परता दिखाते हुए कुकड़ाझोर हेडक्वार्टर में पदस्थ अधिकारियों को तत्काल आवश्यक व्यवस्था करने के निर्देश दिए। निर्देश मिलते ही सहायक निरीक्षक जगदीश सिंह और सहायक उपनिरीक्षक कुंजीलाल बिना देर किए जिला अस्पताल पहुंचे।
दोनों जवानों ने आगे बढ़कर 300-300 मिलीलीटर रक्तदान किया, जिससे चिकित्सकों को बच्चे का उपचार शुरू करने में मदद मिली और उसकी स्थिति में सुधार होने लगा। समय पर मिले रक्त से बच्चे की जान बच पाई।
मरीज के परिजनों ने आईटीबीपी जवानों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संकट की इस घड़ी में जवान उनके लिए किसी देवदूत से कम नहीं थे। यदि समय पर रक्त उपलब्ध नहीं होता तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी।
आईटीबीपी जवानों की इस संवेदनशील और त्वरित कार्रवाई की जिला अस्पताल प्रशासन और स्थानीय नागरिकों ने भी सराहना की है। लोगों का कहना है कि जवानों की यह पहल समाज में सेवा, समर्पण और इंसानियत की प्रेरणादायक मिसाल है।




