अबूझमाड़ में नक्सलवाद के ताबूत में एक और कील: बोटेर में खुला नया सुरक्षा कैंप
4400 वर्ग किमी के दुर्गम अबूझमाड़ में बढ़ी सुरक्षा की पकड़, सड़क-विकास और जनसुविधाओं का रास्ता हुआ आसान

अबूझमाड़ में सुरक्षा का नया अध्याय: बोटेर में खुला सुरक्षा व जनसुविधा कैंप…
कैलाश सोनी- नारायणपुर। दशकों तक नक्सल हिंसा और अलगाव की पहचान रहे अबूझमाड़ क्षेत्र में अब बदलाव की नई तस्वीर उभरने लगी है। करीब 4400 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैले इस दुर्गम इलाके में सुरक्षा बलों की लगातार बढ़ती मौजूदगी नक्सलवाद के खात्मे की दिशा में निर्णायक साबित हो रही है। इसी क्रम में नारायणपुर पुलिस ने वर्ष 2026 का छठवां सुरक्षा एवं जनसुविधा कैंप ग्राम बोटेर में स्थापित किया है, जिसे अबूझमाड़ में शांति और विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।
थाना ओरछा क्षेत्रांतर्गत घोर नक्सल प्रभावित ग्राम बोटेर में स्थापित इस कैंप के साथ अब उस क्षेत्र में सुरक्षा का दायरा मजबूत हुआ है, जो वर्षों तक नक्सलियों का आश्रय स्थल माना जाता रहा। कैंप की स्थापना के साथ ही आसपास के गांवों में सुरक्षा का माहौल बनने के साथ-साथ विकास कार्यों की गति भी तेज होने की उम्मीद है।
‘माड़ बचाव अभियान’ के तहत बढ़ाया जा रहा सुरक्षा घेरा
वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में नारायणपुर पुलिस द्वारा नक्सल मुक्त और सशक्त बस्तर की परिकल्पना को साकार करने के लिए “माड़ बचाव अभियान” लगातार चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत अबूझमाड़ के अंदरूनी और दुर्गम गांवों में लगातार नए सुरक्षा कैंप स्थापित किए जा रहे हैं।
इन कैंपों के माध्यम से न केवल नक्सल विरोधी अभियानों को मजबूती मिल रही है, बल्कि सड़क, पुल-पुलिया, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं को भी अंदरूनी गांवों तक पहुंचाने का रास्ता खुल रहा है।
सड़क निर्माण और विकास कार्यों को मिलेगी सुरक्षा
ग्राम बोटेर में स्थापित यह नया कैंप कांदुलनार-ओरछा-एडजुम-इडवाया-आदेर-कुडमेल-बोटेर-दिवालूर-कुमनार मार्ग पर प्रस्तावित सड़क निर्माण और अन्य विकास कार्यों को सुरक्षा प्रदान करेगा।
नारायणपुर पुलिस के अनुसार, यह मार्ग बनने से अबूझमाड़ के अंदरूनी इलाकों को पहली बार बेहतर सड़क संपर्क मिलेगा।
नया कैंप
- जिला मुख्यालय नारायणपुर से लगभग 90 किमी
- थाना ओरछा से 30 किमी
- आदेर से 15 किमी
- कुडमेल कैंप से 6 किमी
की दूरी पर स्थित है।
आसपास के गांवों को मिलेगा विकास का लाभ
बोटेर में कैंप स्थापित होने से वेरकोटी, नीचेवारा, कुरकसा, गुंडेकोट और बोटेर जैसे गांवों में विकास कार्यों की रफ्तार तेज होने की उम्मीद है।
अब इन क्षेत्रों में
- सड़क और पुल-पुलिया निर्माण
- शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं
- मोबाइल नेटवर्क कनेक्टिविटी
- अन्य बुनियादी सुविधाएं
तेजी से पहुंच सकेंगी।
दशकों बाद मुख्यधारा से जुड़ने की उम्मीद
अबूझमाड़ लंबे समय तक देश के सबसे दुर्गम और अलग-थलग इलाकों में गिना जाता रहा है। कई गांव ऐसे थे जहां आजादी के बाद भी सड़क या प्रशासनिक पहुंच नहीं बन सकी थी।
अब कुमनार से सोनपुर होते हुए भैरमगढ़ (बीजापुर जिला) तक सड़क संपर्क बनने की संभावना से स्थानीय लोगों के लिए आवागमन और सरकारी योजनाओं का लाभ लेना आसान होगा।
सुरक्षा कैंप की स्थापना के बाद ग्रामीणों में उत्साह का माहौल देखा जा रहा है और लोग इसे क्षेत्र के विकास की नई शुरुआत मान रहे हैं।
पिछले वर्षों में लगातार बढ़े सुरक्षा कैंप
नारायणपुर पुलिस द्वारा अबूझमाड़ क्षेत्र में लगातार नए सुरक्षा कैंप स्थापित किए जा रहे हैं।
वर्ष 2025 में
कुतुल, कोडलियार, बेड़माकोटी, पदमकोट, कंडुलपार, नेलांगुर, पांगुड़, रायनार, एडजूम, ईदवाया, आदेर, कुडमेल, कोंगे, सितरम, तोके, जाटलूर, धोबे, डोडीमरका, पदमेटा, लंका, परियादी, काकुर, बालेबेड़ा, कोडेनार, कोडनार, आदिनपार और मंदोड़ा में नए सुरक्षा व जनसुविधा कैंप स्थापित किए गए।
वर्ष 2026 में अब तक
जटवर, वाड़ापेंदा, कुरसकोड़ो, हच्चेकोटी, आदनार और अब बोटेर में कैंप स्थापित किया जा चुका है।
वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में हुई स्थापना
बोटेर कैंप की स्थापना बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक पी. सुन्दराज और नारायणपुर पुलिस अधीक्षक रोबिनसन गुरिया के मार्गदर्शन में की गई।
इस अभियान में नारायणपुर पुलिस, डीआरजी, बस्तर फाइटर्स और आईटीबीपी की 38वीं, 44वीं, 41वीं, 45वीं, 53वीं और 29वीं वाहिनी ने संयुक्त रूप से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इसके अलावा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अक्षय प्रमोद साबद्रा, एसडीओपी अभिषेक केसरी सहित अन्य पुलिस अधिकारियों के नेतृत्व में सुरक्षा बलों ने अभियान को सफल बनाया।
अबूझमाड़ जैसे लंबे समय तक नक्सल हिंसा से प्रभावित रहे क्षेत्र में बोटेर कैंप की स्थापना केवल एक सुरक्षा कदम नहीं, बल्कि शांति, विश्वास और विकास की नई शुरुआत के रूप में देखी जा रही है। लगातार बढ़ती सुरक्षा मौजूदगी से उम्मीद है कि आने वाले समय में अबूझमाड़ भी मुख्यधारा के विकास से पूरी तरह जुड़ सकेगा।




