अबूझमाड़ के बीहड़ों में ‘सुशासन’ की दस्तक
नक्सल छाया से विकास की रोशनी तक—कलेक्टर नम्रता जैन की पहल से अंतिम छोर के गांवों में पहली बार दस्तावेज, योजनाओं का लाभ

150 किमी जंगल पार कर पहुंचा प्रशासन, दशकों का इंतजार टूटा
नारायणपुर, 30 मार्च 2026 (कैलाश सोनी) एक समय था जब अबूझमाड़ का नाम सुनते ही भय, बंदूक और नक्सलवाद की तस्वीर सामने आती थी। घने जंगल, ऊँचे पहाड़, उफनते नाले और 150 किलोमीटर तक फैला दुर्गम इलाका—जहां न सरकार की पहुंच थी, न विकास की कोई किरण। लेकिन आज वही इलाका एक नई कहानी लिख रहा है।
नारायणपुर जिला प्रशासन ने इस असंभव माने जाने वाले भूभाग में ‘सुशासन एक्सप्रेस’ के जरिए विकास की ऐसी पहल की है, जिसने दशकों से उपेक्षित ग्रामीणों के जीवन में उम्मीद की नई रोशनी जगा दी है।
बीहड़ जंगलों के बीच प्रशासन की ऐतिहासिक पहुंच
इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान के घने वन क्षेत्र में बसे इन गांवों तक पहुंचना आज भी आसान नहीं है। प्रशासनिक टीम को नदी-नाले पार करने, पहाड़ी रास्तों से गुजरने और सुरक्षा बलों के साथ कदमताल करते हुए 150 किलोमीटर की कठिन यात्रा तय करनी पड़ती है।
फिर भी, कलेक्टर नम्रता जैन के नेतृत्व में प्रशासन ने हार नहीं मानी। टीम सीधे ग्रामीणों के बीच पहुंची—जहां पहले सिर्फ स्थानीय लोग ही जाने का साहस करते थे।

तस्वीरों में दिखी बदलती तस्वीर
- पहली तस्वीर में स्कूल परिसर में बैठे सैकड़ों ग्रामीण और बच्चे—जहां अधिकारी उनके बीच बैठकर संवाद करते नजर आए।
- दूसरी तस्वीर में शिविर के दौरान मौके पर ही दस्तावेज तैयार करते कर्मचारी—तकनीक अब जंगल तक पहुंच चुकी है।
- तीसरी और चौथी तस्वीर में बच्चों के बीच बैठकर कलेक्टर और अधिकारी योजनाओं की जानकारी देते हुए—विश्वास का रिश्ता बनता हुआ।
- पांचवीं तस्वीर में महिलाओं और ग्रामीणों की भारी भीड़—जो प्रशासन के साथ हाथ उठाकर अपनी भागीदारी दिखा रही है।
ये तस्वीरें सिर्फ कार्यक्रम नहीं, बल्कि बदलते दौर का प्रमाण हैं।

जहां कभी ‘बसवराजू’ का राज था, वहां अब शासन
अबूझमाड़ का यह वही इलाका है, जहां कभी कुख्यात नक्सली नेता बसवराजू का प्रभाव था। सुरक्षा बलों की निर्णायक कार्रवाई के बाद इस क्षेत्र में नक्सल प्रभाव कमजोर पड़ा और अब पूरी तरह सुरक्षा बलों का नियंत्रण है।
यही बदलाव प्रशासन को यहां तक पहुंचने का अवसर दे रहा है। आज ग्रामीण खुले मन से प्रशासन के साथ जुड़ रहे हैं और विकास की मुख्यधारा में शामिल हो रहे हैं।

‘सुशासन एक्सप्रेस’: गांव-गांव में सरकार
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा शुरू की गई ‘सुशासन एक्सप्रेस’ इस परिवर्तन की मुख्य धुरी बन गई है।
इस पहल के तहत प्रशासनिक टीम गांव-गांव जाकर लोगों को मौके पर ही 22 प्रकार की शासकीय सेवाएं उपलब्ध करा रही है।
मौके पर मिल रही सुविधाएं:
- आधार कार्ड
- राशन कार्ड
- आयुष्मान कार्ड
- जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र
- नरेगा जॉब कार्ड
- पेंशन से संबंधित दस्तावेज
- वोटर आईडी सहित अन्य सेवाएं
जहां पहले ग्रामीणों को इन दस्तावेजों के लिए कई दिनों तक जिला मुख्यालय के चक्कर लगाने पड़ते थे, अब वही सुविधा उनके गांव में मिल रही है।
3 दिन में 116 समस्याओं का तत्काल समाधान
26, 27 और 28 मार्च को आयोजित तीन दिवसीय शिविर में प्रशासन ने रिकॉर्ड स्तर पर काम किया—
- कुल प्राप्त आवेदन: 122
- तत्काल निराकरण: 116
जारी किए गए दस्तावेज:
- 44 आधार कार्ड
- 25 राशन कार्ड
- 26 नरेगा जॉब कार्ड
- 3 वोटर आईडी
- 3 पेंशन प्रकरण
- 20 जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र
यह आंकड़े बताते हैं कि प्रशासन सिर्फ पहुंच ही नहीं रहा, बल्कि मौके पर समाधान भी दे रहा है।
कलेक्टर नम्रता जैन का विजन

कलेक्टर नम्रता जैन ने स्पष्ट लक्ष्य तय किया है—
“जिले का कोई भी नागरिक आवश्यक दस्तावेजों से वंचित न रहे और हर पात्र व्यक्ति को शासन की योजनाओं का लाभ मिले।”
इसी सोच के साथ वे लगातार खुद इन दुर्गम इलाकों में पहुंच रही हैं। ग्रामीणों के बीच बैठकर उनकी समस्याएं सुनना, बच्चों से संवाद करना और मौके पर समाधान देना—यह उनकी कार्यशैली को अलग पहचान देता है।
शिक्षा और जागरूकता पर विशेष जोर
शिविर के दौरान सिर्फ दस्तावेज ही नहीं बनाए गए, बल्कि बच्चों और ग्रामीणों को शिक्षा, स्वास्थ्य और योजनाओं के प्रति जागरूक भी किया गया।
स्कूलों में जाकर अधिकारियों ने बच्चों से बातचीत की, उन्हें पढ़ाई के महत्व के बारे में बताया और खेल सामग्री भी वितरित की गई।
ग्रामीणों का बढ़ा भरोसा
ग्रामीणों के चेहरे पर अब डर नहीं, बल्कि भरोसा नजर आ रहा है।
एक ग्रामीण महिला ने कहा—
“पहले हमें कागज बनवाने के लिए कई दिन लगते थे, अब अधिकारी खुद गांव आ रहे हैं।”
एक बुजुर्ग ने कहा—
“पहली बार लग रहा है कि सरकार हमारे पास आई है।”
आगे भी जारी रहेगा अभियान
प्रशासन ने इस पहल को लगातार जारी रखने का निर्णय लिया है—
- 1-2 अप्रैल: ग्राम पंचायत दण्डवन
- 6-7 अप्रैल: ग्राम पंचायत कोरेंडा
इन शिविरों के जरिए और अधिक गांवों को कवर किया जाएगा।
नक्सल क्षेत्र से विकास मॉडल तक
अबूझमाड़ का यह बदलाव सिर्फ प्रशासनिक पहल नहीं, बल्कि एक बड़ा सामाजिक परिवर्तन है।
जहां कभी बंदूक की आवाज गूंजती थी, वहां अब बच्चों की पढ़ाई, योजनाओं की जानकारी और विकास की चर्चा हो रही है।
यह मॉडल न सिर्फ नारायणपुर बल्कि पूरे देश के लिए एक उदाहरण बन सकता है कि कैसे सबसे कठिन इलाकों में भी इच्छाशक्ति और सही रणनीति से बदलाव लाया जा सकता है।
बदलते अबूझमाड़ की नई कहानी
नारायणपुर का अबूझमाड़ अब सिर्फ नक्सलवाद का प्रतीक नहीं, बल्कि सुशासन और विकास का नया अध्याय बन रहा है।
कलेक्टर नम्रता जैन और उनकी टीम ने यह साबित कर दिया है कि अगर प्रशासन ठान ले, तो कोई भी दूरी, कोई भी जंगल और कोई भी चुनौती विकास की राह में बाधा नहीं बन सकती।
आज अबूझमाड़ के ग्रामीण न सिर्फ योजनाओं का लाभ ले रहे हैं, बल्कि सरकार के साथ मिलकर अपने भविष्य को संवारने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं।
“बीहड़ जंगलों से निकलकर विकास की राह पर बढ़ता अबूझमाड़—यह सिर्फ खबर नहीं, बदलाव की सच्ची तस्वीर है।”




