नारायणपुर

अबूझमाड़ के दुर्गम रेकावाया तक पहुंची ‘सरकार’

150 किमी कठिन सफर तय कर कलेक्टर नम्रता जैन का निरीक्षण, आंगनबाड़ी में बच्चों की पढ़ाई-पोषण पर सख्ती

उपस्थिति, स्वच्छता और पोषण पर फोकस-अधिकारियों को दिए स्पष्ट निर्देश…

(कैलाश सोनी) नारायणपुर, 29 मार्च 2026। अबूझमाड़ के दुर्गम अंचल में प्रशासनिक सक्रियता की नई तस्वीर सामने आई है। कलेक्टर नम्रता जैन ने 150 किलोमीटर का कठिन सफर तय कर ग्राम रेकावाया पहुंचकर न केवल व्यवस्थाओं की हकीकत देखी, बल्कि जमीनी स्तर पर सुधार के कड़े निर्देश भी दिए। उनका यह दौरा क्षेत्र में सरकारी योजनाओं की वास्तविक स्थिति का आईना बन गया।

कलेक्टर ने गांव में मूलभूत सुविधाओं का जायजा लेते हुए अधिकारियों को स्पष्ट कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों में भी योजनाओं का लाभ समय पर और प्रभावी तरीके से पहुंचना चाहिए।


आंगनबाड़ी में बच्चों से संवाद, पढ़ाई की ली परीक्षा

निरीक्षण के दौरान कलेक्टर सीधे आंगनबाड़ी केंद्र पहुंचीं, जहां बच्चों से अक्षरज्ञान से जुड़े सवाल पूछे। बच्चों की समझ और उपस्थिति को लेकर उन्होंने संतोष भी जताया, लेकिन साथ ही नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को स्पष्ट हिदायत दी कि बच्चों को समय पर पोषण आहार दिया जाए और किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पालकों से भी अपील की गई कि वे बच्चों को नियमित रूप से केंद्र भेजें।


एक माह पहले शुरू हुआ केंद्र, अब दिख रहा असर

उल्लेखनीय है कि यह आंगनबाड़ी केंद्र जिला प्रशासन के प्रयासों से करीब एक माह पहले ही शुरू हुआ है। इससे रेकावाया जैसे दूरस्थ क्षेत्र के बच्चों को अब प्रारंभिक शिक्षा और पोषण सुविधा मिलनी शुरू हो गई है, जो पहले एक बड़ी चुनौती थी।


साफ-सफाई और पेयजल व्यवस्था पर कड़ी नजर

कलेक्टर ने केंद्र की साफ-सफाई व्यवस्था का बारीकी से निरीक्षण किया और नियमित स्वच्छता बनाए रखने के निर्देश दिए। साथ ही बच्चों के लिए बेहतर माहौल सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

केंद्र में लगे हैंडपंप का निरीक्षण कर स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया। भंडार कक्ष का भी जायजा लेकर पोषण आहार के सुरक्षित भंडारण की स्थिति पर संतोष जताया।


सरपंच के प्रयासों की सराहना

केंद्र की व्यवस्थाओं को लेकर कलेक्टर ने सरपंच द्वारा किए गए कार्यों की सराहना की और कहा कि जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी से ही विकास कार्यों को गति मिलती है।


अधिकारियों की मौजूदगी में दिए दिशा-निर्देश

दौरे के दौरान जिला स्तरीय अधिकारी-कर्मचारी एवं स्थानीय जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे। कलेक्टर ने मौके पर ही अधिकारियों को जिम्मेदारियों का अहसास कराते हुए स्पष्ट किया कि दूरस्थ क्षेत्रों में लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं है।

दुर्गम अबूझमाड़ में कलेक्टर का यह दौरा सिर्फ निरीक्षण नहीं, बल्कि प्रशासन की पहुंच और जवाबदेही का मजबूत संदेश है—अब विकास की किरणें सबसे दूर बसे गांवों तक भी पहुंच रही हैं।

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