अबूझमाड़ के ‘दिवालूर’ में सुरक्षाबलों की ऐतिहासिक एंट्री, नक्सलियों के गढ़ में गड़ा विकास का झंडा
बसवा राजू के खात्मे वाले इलाके में खुला नया कैंप, नारायणपुर पुलिस की 2026 में सातवीं बड़ी कार्रवाई

(कैलाश सोनी) नारायणपुर, 17 मार्च। घोर नक्सल प्रभावित अबूझमाड़ के दुर्गम और वर्षों से माओवादियों के सुरक्षित ठिकाने माने जाने वाले दिवालूर क्षेत्र में आखिरकार सुरक्षा बलों ने अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा दी है। नारायणपुर पुलिस ने इस बीहड़ पहाड़ी इलाके में नवीन सुरक्षा एवं जन सुविधा कैंप स्थापित कर नक्सलियों के प्रभाव क्षेत्र में निर्णायक चोट की है।
विशेष महत्व की बात यह है कि दिवालूर वही इलाका है, जहां सुरक्षाबलों ने कुख्यात माओवादी नेता बसवा राजू सहित कई बड़े नक्सलियों को ढेर किया था। अब इसी क्षेत्र में स्थायी कैंप की स्थापना को नक्सलवाद के खिलाफ बड़ी रणनीतिक सफलता माना जा रहा है।
वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में संचालित ‘माड़ बचाओ अभियान’ के तहत थाना ओरछा क्षेत्र के ग्राम दिवालूर में 16 मार्च 2026 को यह कैंप स्थापित किया गया। इसका उद्देश्य नक्सल विरोधी अभियानों को मजबूती देने के साथ-साथ कांदुलनार-ओरछा-एडजुम-इडवाया-आदेर-कुडमेल-बोटेर-दिवालूर-कुमनार मार्ग पर सड़क निर्माण और विकास कार्यों को सुरक्षा प्रदान करना है।
करीब 96 किलोमीटर दूर जिला मुख्यालय से और 36 किलोमीटर दूर ओरछा थाना क्षेत्र में स्थित यह कैंप अब आसपास के गांवों के लिए सुरक्षा का नया केंद्र बन गया है। ग्रामीणों में इसके बाद उत्साह का माहौल है और लंबे समय से भय के साए में जी रहे लोगों को अब राहत की उम्मीद जगी है।
दिवालूर में कैंप खुलने से रेकापारा, कुमनार, गुंडेकोट, लेकवाड़ा, नेडअट्टे समेत आसपास के इलाकों में सड़क, पुल-पुलिया, शिक्षा, स्वास्थ्य और मोबाइल नेटवर्क जैसी मूलभूत सुविधाओं का तेजी से विस्तार संभव होगा। अब सुरक्षा के साये में विकास कार्यों को गांव-गांव तक पहुंचाया जाएगा।
इस कदम से दशकों से अलग-थलग पड़े अबूझमाड़ क्षेत्र को मुख्यधारा से जोड़ने का रास्ता भी साफ हो गया है। कुमनार से सोनपुर होते हुए भैरमगढ़ (जिला बीजापुर) तक सीधी सड़क कनेक्टिविटी विकसित होने से आम नागरिकों को आवागमन में बड़ी सुविधा मिलेगी।
नारायणपुर पुलिस द्वारा पिछले वर्षों में भी लगातार अंदरूनी क्षेत्रों में कैंप स्थापित कर नक्सल नेटवर्क को कमजोर किया गया है। वर्ष 2025 में कुतुल सहित दर्जनों इलाकों में कैंप खोलने के बाद वर्ष 2026 में जटवर, वाड़ापेंदा, कुरसकोड़ो, हच्चेकोटी, आदनार, बोटेर और अब दिवालूर में कैंप स्थापित कर सुरक्षा तंत्र को और मजबूत किया गया है।
इस पूरी कार्रवाई में नारायणपुर पुलिस, डीआरजी, बस्तर फाइटर्स तथा आईटीबीपी की विभिन्न वाहिनियों—38वीं, 44वीं, 41वीं, 45वीं, 53वीं और 29वीं—की संयुक्त भूमिका रही। पुलिस महानिरीक्षक बस्तर रेंज पी. सुंदरराज, पुलिस अधीक्षक रोबिनसन गुरिया सहित वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में यह अभियान सफलतापूर्वक संचालित किया गया।
स्पष्ट है कि दिवालूर में कैंप स्थापना के साथ ही अबूझमाड़ में नक्सलवाद के खिलाफ अंतिम चरण की लड़ाई और तेज हो गई है, जहां सुरक्षा के साथ-साथ विकास की रफ्तार भी अब जमीन पर दिखने लगी है।




