“अधिकारों का दुरुपयोग नहीं, जागरूकता ही सशक्तिकरण का आधार”
नारायणपुर के कृषि महाविद्यालय में POSH Act पर एक दिवसीय कार्यशाला, विशेषज्ञों ने दिए कानूनी अधिकारों के महत्वपूर्ण टिप्स

नारायणपुर। लिंगो मुढ़ियाल कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, नारायणपुर में कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (POSH Act, 2013) विषय पर एक दिवसीय जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जिससे परिसर में जागरूकता और सकारात्मक वातावरण का संचार हुआ।

कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय की डीन डॉ. रत्ना नाशिने ने की। उन्होंने कहा कि POSH Act महिलाओं को सुरक्षित और सम्मानजनक कार्यस्थल देने का प्रभावी माध्यम है, लेकिन इसके साथ अधिकारों के दुरुपयोग से बचना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने जागरूकता, संवेदनशीलता और संतुलित सोच को वास्तविक सशक्तिकरण का आधार बताया।
मुख्य वक्ता के रूप में 45वीं आईटीबीपी बटालियन (जेलबाड़ी, एड़का) के डिप्टी कमांडर डॉ. रजनीकांत सिंह ने अधिनियम के प्रावधानों पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया, आंतरिक शिकायत समिति (ICC) की भूमिका और कानूनी अधिकारों को सरल भाषा में समझाया। साथ ही यह भी बताया कि कार्यस्थल पर किन व्यवहारों को यौन उत्पीड़न की श्रेणी में रखा जाता है और पीड़ित को बिना किसी भय के अपनी बात रखने का अधिकार है।
डॉ. सिंह ने संस्थानों की जिम्मेदारी पर जोर देते हुए कहा कि सुरक्षित, सम्मानजनक और निष्पक्ष कार्य वातावरण सुनिश्चित करना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने वास्तविक केस स्टडी के माध्यम से विषय को और अधिक व्यवहारिक बनाते हुए बताया कि जागरूकता के अभाव में कई बार पीड़ित न्याय से वंचित रह जाते हैं।
कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों ने सक्रिय भागीदारी करते हुए प्रश्न पूछे, जिससे कार्यक्रम संवादात्मक और प्रभावी बना। मंच संचालन एवं आभार प्रदर्शन डॉ. नवीन मरकाम ने किया।
इस अवसर पर डॉ. नवनीत, डॉ. पुष्पराज, डॉ. विवेक, डॉ. राज सेंगर, डॉ. मदन कुर्रे (क्रीड़ा अधिकारी) एवं डॉ. पुष्पेन्द्र का विशेष सहयोग रहा। वहीं स्वयंसेवक भीवेश, कुनाल अग्रवाल, गौरव, देव निराला, रीता भगेल सहित अन्य विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी ने कार्यक्रम को सफल बनाया।
अंत में सभी प्रतिभागियों को यह संकल्प दिलाया गया कि वे अपने कार्यस्थल और समाज में सुरक्षित, सम्मानजनक और जागरूक वातावरण के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।
