25 किलोमीटर की दूरी हुई खत्म, अब गांव में ही राशन

कलेक्टर नम्रता जैन के निर्देश पर थुलथुली में घर पहुंचा पीडीएस खाद्यान्न
दुर्गम क्षेत्र के ग्रामीणों को मिली बड़ी राहत, बुजुर्गों-महिलाओं की कठिनाई हुई कम
कैलाश सोनी- नारायणपुर। अबूझमाड़ अंचल के दुर्गम ग्राम पंचायत थुलथुली के ग्रामीणों के लिए बुधवार का दिन राहत और सुकून लेकर आया। वर्षों से राशन के लिए 25 किलोमीटर दूर ओरछा तक पैदल सफर करने को मजबूर ग्रामीणों को पहली बार अपने ही गांव में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) का खाद्यान्न उपलब्ध कराया गया। कलेक्टर नम्रता जैन के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन ने विशेष व्यवस्था कर ओरछा से ट्रैक्टर के माध्यम से खाद्यान्न का परिवहन कर सीधे ग्राम थुलथुली में वितरण सुनिश्चित कराया।

जिला खाद्य अधिकारी अल्लाहउद्दीन खान ने बताया कि ग्राम थुलथुली में अंत्योदय योजना के 343 हितग्राही, निराश्रित श्रेणी का 1 तथा एपीएल श्रेणी का 1 राशनकार्डधारी शामिल हैं। सभी पात्र हितग्राहियों को नियमानुसार खाद्यान्न उपलब्ध कराया गया। वितरण प्रक्रिया पारदर्शी ढंग से की गई, जिससे ग्रामीणों में विश्वास और संतोष का भाव देखने को मिला।
अब तक थुलथुली के ग्रामीणों को राशन लेने के लिए उबड़-खाबड़ रास्तों से होकर कई घंटे का पैदल सफर तय करना पड़ता था। बारिश और गर्मी के मौसम में यह दूरी बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांगजनों के लिए और भी कठिन हो जाती थी। कई बार समय और साधन के अभाव में राशन लेने में देरी हो जाती थी। जिला प्रशासन की इस पहल से अब ग्रामीणों को न केवल समय और श्रम की बचत होगी, बल्कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी सुलभ रूप से मिल सकेगा।
खाद्यान्न वितरण के दौरान गांव में उत्साह का माहौल देखने को मिला। ग्रामीणों ने प्रशासन के प्रति आभार जताते हुए कहा कि पहली बार उन्हें यह महसूस हुआ है कि शासन की योजनाएं वास्तव में अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रही हैं। ग्रामीणों का कहना था कि गांव में ही राशन मिलने से उन्हें मजदूरी छोड़कर दूर जाने की मजबूरी से भी राहत मिलेगी।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों में बुनियादी सेवाएं पहुंचाने की दिशा में जिला प्रशासन लगातार पहल कर रहा है। शिक्षा, स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा जैसी आवश्यक सेवाओं को अंतिम छोर के गांवों तक पहुंचाने के लिए विशेष रणनीति के तहत कार्य किया जा रहा है। थुलथुली में पीडीएस वितरण की यह पहल उसी श्रृंखला का हिस्सा मानी जा रही है।
अबूझमाड़ जैसे दुर्गम अंचलों में योजनाओं की प्रभावी पहुंच शासन की सुशासन की मंशा को जमीन पर उतारने का संकेत है। थुलथुली में राशन की गांव तक पहुंच ने यह भरोसा दिलाया है कि प्रशासनिक इच्छाशक्ति से दूरियां घट सकती हैं और सुविधाएं सचमुच गांव की देहरी तक लाई जा सकती हैं।




